विशेष

मै मुग़ल शासक ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर हूँ : video

मुगल साम्राज्य
फरगाना वैलर जो कि आज का उज़बेकिस्तान है, के तैमूर और चंगेज़ खान के वंशज बाबर ने सन् 1526 में खैबर दर्रे को पार किया और वहां मुगल साम्राज्य की स्थापना की, जहां आज अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश है। सन् 1600 तक मुग़ल वंश ने ज्यादातर भारतीय उपमहाद्वीप पर राज किया। सन् 1700 के बाद इस वंश का पतन होने लगा और आखिरकार भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के समय सन् 1857 में पूरी तरह खात्मा हो गया।

बाबर
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1494 में ट्रांस-आक्सीयाना की एक छोटी सी रियासत फ़रग़ना का बाबर उत्तराधिकारी बना। उज़बेक ख़तरे से बेख़बर होकर तैमूर राजकुमार आपस में लड़ रहे थे। बाबर ने भी अपने चाचा से समरकन्द छीनना चाहा। उसने दो बार उस शहर को फ़तह किया, लेकिन दोनों ही बार उसे जल्दी ही छोड़ना पड़ा। दूसरी बार उज़बेक शासक शैबानी ख़ान को समरकन्द से बाबर को खदेड़ने के लिए आमंत्रित किया गया था। उसने बाबर को हराकर समरकन्दर पर अपना झंडा फहरा दिया। उसके बाद जल्दी ही उसने उस क्षेत्र में तैमूर साम्राज्य के भागों को भी जीत लिया। इससे बाबर को क़ाबुल की ओर बढ़ना पड़ा और उसने 1504 में उस पर अधिकार कर लिया। उसके बाद चौदह वर्ष तक वह इस अवसर की तलाश में रहा कि फिर उज़बेकों को हराकर अपनी मातृभूमि पर पुनः अधिकार कर सके। उसने अपने चाचा, हिरात के शासक को अपनी ओर मिलाना चाहा, लेकिन इस कार्य में वह सफल नहीं हुआ। शैबानी ख़ान ने अंततः हिरात पर भी अधिकार कर लिया। इससे सफ़वीयों से उसका सीधा संघर्ष उत्पन्न हो गया। क्योंकि वे भी हिरात और उसके आस-पास के क्षेत्र को अपना कहते थे। इस प्रदेश को तत्कालीन लेखकों ने ख़ुरासान कहा है। 1510 की प्रसिद्ध लड़ाई में ईरान के शाह इस्माइल ने शैबानी को हराकर मार डाला। इसी समय बाबर ने समरकन्द जीतने का एक प्रयत्न और किया। इस बार उसने ईरानी सेना की सहायता ली। वह समरकन्द पहुंच गया। लेकिन जल्दी ही ईरानी सेनापतियों के व्यवहार के कारण रोष से भर गया। वे उसे ईरानी साम्राज्य का एक गवर्नर ही मानते थे। स्वतंत्र शासक नहीं। इसी बीच उज़बेक भी अपनी हार से उभर गये। बाबर को एक बार फिर समरकन्द से खदेड़ दिया गया और उसे क़ाबुल लौटना पड़ा। स्वयं शाह ईरान इस्माइल को भी आटोहान-साम्राज्य के साथ हुई प्रसिद्ध लड़ाई में हार का सामना करना पड़ा। इस प्रकार उज़बेक ट्रांस-आक्सीयाना के निर्विरोध स्वामी हो गए। इन घटनाऔं के कारण ही अन्ततः बाबर ने भारत की ओर रूख किया।

अयोध्या विवाद : सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन सुनवाई की 40 बड़ी बातें

क्विंट हिंदी

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 9 नवंबर को फैसला सुनाया जाएगा. इससे पहले अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक सुनवाई चली, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

आइए जानते हैं अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन की सुनवाई से जुड़ी 40 बड़ी बातें.

पहला दिन
6 अगस्त, मंगलवार को सुनवाई के पहले दिन हिंदू पक्षकार ने दावा किया कि 1934 से इस विवादित ढांचे में किसी भी मुस्लिम को प्रवेश की इजाजत नहीं थी और यह पूरी तरह से निर्मोही अखाड़े के अधिकार में था.

निर्मोही अखाड़े ने कहा कि विवादित जमीन पर 1934 से 1949 तक उसका ‘अनन्य’ कब्जा था और मुस्लिमों को सिर्फ जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत दी गई, वह भी पुलिस सुरक्षा के तहत.

दूसरा दिन
7 अगस्त, बुधवार को सुनवाई के दूसरे दिन निर्मोही अखाड़े से संविधान पीठ ने कई सवाल पूछे. इस दौरान बेंच ने मूल दस्तावेद अखाड़ा के वकील से स्वामित्व के मूल दस्तावेज दिखाने की बात कही.

तीसरा दिन
8 अगस्त, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पक्षकार ‘राम लला विराजमान’ से सवाल किया कि भूमि विवाद में ‘जन्म स्थान’ को पक्षकार कैसे बनाया जा सकता है

चौथा दिन
9 अगस्त, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के चौथे दिन अयोध्या मामले में शामिल पक्षों में से एक राम लला विराजमान से पूछा कि क्या रघुवंश (भगवान राम के के वंशज‍ों) में से कोई अभी भी अयोध्या में रह रहा है?

पांचवां दिन
13 अगस्त, मंगलवार को कोर्ट ने पूछा, जमीन पर आपका हक मुस्लिम पक्षकार के साथ साझा है, तब एकाधिकार कैसे? रामलला विराजमान ने कहा, जमीन कुछ समय के लिए बोर्ड के पास जाने से वह मालिक नहीं हो जाता.

छठवां दिन
14 अगस्त, बुधवार को हिंदू पक्ष की ओर से वेद-पुराणों का हवाला दिया. रामलला विराजमान की तरफ से ऐतिहासिक किताबें, विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांतों और वेद और स्कंद पुराण की दलीलें कोर्ट में पेश की गईं.

सातवां दिन
16 अगस्त, शुक्रवार को सातवें दिन की सुनवाई के दौरान राम लला विराजमान की ओर से दलील दी गयी कि विवादित स्थल पर देवताओं की अनेक आकृतियां मिली हैं. ‘राम लला विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वैद्यनाथन ने ढांचे के भीतर देवताओं के तस्वीरों का एक एलबम भी पीठ को सौंपा और कहा कि मस्जिदों में इस तरह के चित्र नहीं होते हैं.

आठवां दिन
20 अगस्त, मंगलवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के फैसले का जिक्र किया गया. रामलला विराजमान के वकील ने इलाहाबाद सीएस वैद्यनाथ मामले में हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, जज ने खुद लिखा है कि भगवान राम का मंदिर ढहाकर मस्जिद बनाई गई.

नौवां दिन
21 अगस्त, बुधवार को रामलला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, कोई भी महज मस्जिद जैसा ढांचा खड़ा कर इस पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता. रामलला के वकील ने विवादित भूमि पर मुस्लिम पक्ष और निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज किया

10वां दिन
22 अगस्त, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में 10वें दिन की सुनवाई के दौरान मूल याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने विवादित स्थल में पूजा करने का उसका अधिकार लागू किए जाने का अनुरोध किया.

11वां दिन
23 अगस्त, शुक्रवार को निर्मोही अखाड़े की ओर से दलील रख रहे सुशील जैन ने कोर्ट से कहा कि वो विवादित जमीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर रहे, सिर्फ पूजा-प्रबन्धन और कब्जे का अधिकार मांग रहे है. अयोध्या बहुत बड़ा है, पर प्रभु राम की तस्वीर सिर्फ रामजन्म भूमि में स्थापित की गई थी.

12वां दिन
26 अगस्त, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील कुमार जैन ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने कहा कि हम देव स्थान का प्रबंधन करते हैं और पूजा का अधिकार चाहते हैं.

13वां दिन
27 अगस्त, मंगलवार को सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े ने कहा, 1855 से पहले यहां कभी नमाज नहीं पढ़ी गई. निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि विवादित ढांचे में मुस्लिम ने 1934 के बाद से कभी नमाज नहीं पढ़ी है.

14वां दिन
28 अगस्त, बुधवार को एक हिंदू संस्था ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया कि मुगल बादशाह बाबर न तो अयोध्या गया था और और न ही विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर 1528 में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था.

15वां दिन
29 अगस्त, गुरुवार को राम मंदिर पुनरोद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने संवैधानिक बेंच के सामने दलील पेश की. पीएन मिश्रा ने कहा कि मुस्लिम पक्षकार हाई कोर्ट में यह साबित नहीं कर पाए थे कि मस्जिद का निर्माण बाबर ने करवाया.

16वां दिन
30 अगस्त, शुक्रवार को रामजन्म भूमि पुनरुत्थान समिति के वकील ने दलील पूरी की. हिंदू महासभा के वकील हरिशंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि ये जगह शुरू से हिंदुओं के अधिकार में रही है. आजादी के बाद भी हमारे अधिकार भी सीमित क्यों रहें? क्योंकि 1528 से 1885 तक कहीं भी और कभी भी मुसलमानों का यहां कोई दावा नहीं था.

17वां दिन
2 सितंबर, सोमवार को सुनवाई के 17वें दिन मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हिंदुओं ने 1934 में बाबरी मस्जिद पर हमला किया, फिर 1949 में अवैध घुसपैठ की और 1992 में इसे तोड़ दिया और अब कह रहे हैं कि संबंधित जमीन पर उनके अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए.

18वां दिन
4 सितंबर, बुधवार को मुस्लिम पक्षकारों ने दावा किया कि 22-23 दिसंबर की रात अयोध्या में बाबरी मस्जिद के अंदर मूर्तियां रखने के लिए सुनियोजित और नजर बचा के हमला किया गया, जिसमें कुछ अधिकारियों की हिंदुओं के साथ मिलीभगत थी और उन्होंने प्रतिमाओं को हटाने से इनकार कर दिया.

19वां दिन
5 सितंबर, गुरुवार को मुस्लिम पक्षकारों ने दलील दी कि लगातार नमाज ना पढ़ने और मूर्तियां रख देने से मस्जिद के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाए जा सकते. मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह सही है कि विवादित ढांचे का बाहरी अहाता शुरू से निर्मोही अखाड़े के कब्जे में रहा है. झगड़ा आंतरिक हिस्से को लेकर है जिस पर कब्जा किया गया.

20वां दिन
6 सितंबर, शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा 1734 से अस्तित्व का दावा कर रहा है. लेकिन अखाड़ा 1885 में बाहरी आंगन में था और राम चबूतरा बाहरी आंगन में है, जिसे राम जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है और मस्जिद को विवादित स्थल माना जाता है.

21वां दिन
11 सितंबर, बुधवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने अपना पक्ष रखा. मुस्लिम पक्ष ने कहा- हिंदू पक्ष के पास जमीन का मालिकाना हक नहीं है. राजीव धवन ने दलील दी कि 22 दिसंबर 1949 को जो गलती हुई उसे जारी नहीं रखा जा सकता. क्या हिंदू पक्षकार गलती को लगातार जारी रखने के आधार पर अपने मालिकाना हक का दावा कर सकते हैं?

22वां दिन
12 सितंबर, गुरुवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि उन्हें फेसबुक पर धमकी मिली है, लेकिन उन्हें फिलहाल सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है. सीजेआई बोले- ऐसे कृत्य नहीं होने चाहिए

23वां दिन
13 सितंबर, शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने बहस शुरू की. उन्होंने कहा कि निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल पर मस्जिद होने की बात मानी थी. 1885 और1949 में दायर अपनी याचिकाओं में उसने मस्जिद का जिक्र किया था.

24वां दिन
16 सितंबर को मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से राजीव धवन ने कहा की हिंदू पक्षकारों ने पूरे इलाके पर दावा कर दिया है. मेरी दलील है कि जन्मस्थान कानूनी व्यक्ति नहीं है. दुर्भाग्य से हाई कोर्ट भी जन्मस्थान वाली दलील में कूद पड़ा था. यहां भी जन्मस्थान वाली दलील में सुप्रीम कोर्ट पड़ गया है. इस मामले में हिंदू पक्षकार (राम लला विराजमान) की तरफ से आस्था और विश्वास के साथ-साथ जन्मस्थान और जन्मभूमि को लेकर दलील दी गई है.

25वां दिन
17 सितंबर को मुस्लिम पक्ष की तरफ से वकील राजीव धवन ने बहस की शुरुआत करते हुए विवादित स्थल से मिले खंभों पर पाए गए निशान का जिक्र करते हुए दलील दी कि सिर्फ इस वजह से यह साबित नहीं हो सकता कि वह इस्लामिक नहीं है. धवन ने कहा कि मस्जिदें केवल मुसलमानों द्वारा ही नहीं बनाई गई थीं. ताजमहल का निर्माण अकेले मुसलमानों ने नहीं किया था. इसमें मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदाय के मजदूर शामिल थे.

26वां दिन
18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 18 अक्टूबर तक दलीलें पूरी करें ताकि जजों को फैसला लिखने के लिए 4 हफ्ते का वक्त मिले, इसके लिए सभी को मिलकर सहयोग करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कोर्ट सुनवाई का वक्त एक घंटा बढ़ा सकती है, हम शनिवार को भी सुनवाई के लिए तैयार हैं.

27वां दिन
19 सितंबर को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने विवादित इमारत की मुख्य गुंबद के नीचे गर्भ गृह होने के दावे को बाद में गढ़ा गया बताया. इस पर जजों ने उनसे कुछ सवाल किए. धवन ने सवाल कर रहे जज के लहजे को आक्रामक बता दिया. हालांकि, बाद में उन्होंने अपने बयान के लिए माफी मांगी.

28 वां दिन
20 सितंबर को मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग-अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे. लिहाजा, सीधे तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई. धवन ने कहा कि 1992 में जानबूझकर मस्जिद गिराई गई थी.

29वां दिन
23 सितंबर, सोमवार को मुस्लिम पक्ष के वकील धवन ने कहा कि पौने पांच सौ साल पहले 1528 में मस्जिद बनाई गई थी और 22 दिसंबर 1949 तक लगातार नमाज हुई. तब तक वहां अंदर कोई मूर्ति नहीं थी. एक बार मस्जिद हो गई तो हमेशा मस्जिद ही रहेगी.

30वां दिन
24 सितंबर को मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि रामचरित मानस की रचना मस्जिद बनने के करीब 70 साल बाद हुई लेकिन कहीं ये जिक्र नहीं कि राम जन्मस्थान वहां है, जहां मस्जिद है. यानी जन्मस्थान को लेकर हिंदुओं की आस्था भी बाद में बदल गई.

31वां दिन
25 सितंबर, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष अपने उस बयान से पीछे हट गया कि अयोध्या के विवादित स्थल के बाहरी हिस्से में स्थित ‘‘राम चबूतरा’’ ही भगवान राम का जन्मस्थल है. साथ ही उसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की उस रिपोर्ट पर चोट की, जिसमें संकेत दिया गया है कि यह ढांचा बाबरी मस्जिद से पहले स्थित था.

32वां दिन
26 सितंबर, गुरुवार को मुस्लिम पक्षकारों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 2003 की रिपोर्ट का सारांश लिखने वाले व्यक्ति को लेकर सवाल उठाये जाने के बाद पलटी मारी और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए माफी मांगी. ASI की रिपोर्ट में कहा गया था कि बाबरी मस्जिद के पहले वहां विशाल ढांचा मौजूद था.

33वां दिन
27 सितंबर, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई ‘‘तय कार्यक्रम के अनुसार’’ नहीं हो रही है.

34वां दिन
मुस्लिम पक्षकार के वकील शेखर नाफडे ने कहा कि वहां मस्जिद थी और उस पर कोई विवाद नहीं हो सकता क्योंकि उस पर किसी दूसरे पक्ष का कोई पहले दावा नहीं था. मस्जिद की मौजूदगी को स्वीकारा जा चुका है और उसे साबित करने की जरूरत नहीं है. राम चबूतरे पर छोटी सी मंदिर थी. बाकी पूरा इलाका मस्जिद का था और उस पर दूसरे पक्षकार का दावा नहीं था.

35वां दिन
1 अक्टूबर, सोमवार को रामलला के वकील परासरन ने दलील दी कि जन्म स्थान पर राम का जन्मदिन मनाया जाए. उन्होंने कहा कि रामजन्म भूमि को एक न्यायिक व्यक्ति के तौर पर देखा जाए. मुस्लिम पक्ष के वकील राजिव धवन ने कहा पहले ये साबित करें की वहां मंदिर था और लोग पूजा करते थे.

36वां दिन
3 अक्टूबर, को हिंदू पक्ष की ओर से वकील सीएस वैद्यनाथन ने हाई कोर्ट के पूर्व आदेशों को दोहराते हुए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि अयोध्या में ध्वस्त की गई बाबरी मस्जिद के नीचे विशाल संरचना की मौजूदगी के बारे में साक्ष्य संदेह से परे हैं और वहां खुदाई से निकले अवशेषों से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वहां मंदिर था.

37वां दिन
4 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा कि वो मामले की बहस 17 अक्टूबर तक पूरी करे लें. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था.

38वां दिन
14 अक्टूबर, सोमवार को इस मामले में 38वें दिन की सुनवाई हुई. इस दौरान मुस्लिम पक्षकारों ने आरोप लगाया कि इस मामले में हिन्दू पक्ष से नहीं, बल्कि सिर्फ उनसे ही सवाल किये जा रहे हैं.

39वां दिन
15 अक्टूबर, मंगलवार को हिंदू पक्ष की ओर से पेश पूर्व अटॉर्नी जनरल और सीनियर एडवोकेट के परासरन ने कहा कि मुगल शासक बाबर ने खुद को कानून से ऊपर रखते हुए अयोध्या में राम की जन्मभूमि पर मस्जिद बनाकर ऐतिहासिक गलती की थी.

40वां दिन
सुनवाई के 40वें दिन अखिल भारतीय हिंदू महासभा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने एक किताब व कुछ दस्तावेज के साथ विवादित भगवान राम के जन्म स्थान की पहचान करते हुए एक पिक्टोरियल जमा किया. मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने दस्तावेज के रिकॉर्ड में नहीं होने की बात कहते हुए आपत्ति जताई.

अदालत में दस्तावेज को फाड़ने की पांच न्यायाधीशों की पीठ से अनुमति मांगते हुए धवन ने कहा, “क्या, मुझे इस दस्तावेज को फाड़ने की अनुमति है. यह सुप्रीम कोर्ट कोई मजाक नहीं और इसके बाद उन्होंने दस्तावेज के टुकड़े-टुकड़े कर दिए.”

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद हिंदू महासभा के वकील वरूण सिन्हा ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. उन्होंने कहा कि 23 दिन में फैसला आ सकता है.

Ravita Punia
@ravita4ever
सबसे ज्यादा “नौकरी” छीनने वाले प्रधानमंत्री बने #मोदी, इस अंगूठे छाप अनपढ़ ने 4 करोड़ लोगों का छीना रोजगार!

Ruby Arun
@arunruby08
BJP spent 27000 Crores! Congress spent 820 Crores. The
@timesofindia
a major recipient of the BJP loot & a vital cog in the a la Goebbels Propaganda machinery of BJP India can’t help smirking. They had to annotate the “cash strapped ” jibe. 27000 pales in comparison to 820.

Sharad Pawar
@PawarSpeaks
NDA government’s decision to withdraw SPG security cover provided to the members of the Gandhi family is very unfortunate. It is the Central Government’s deliberate attempt to undermine the security aspect of Gandhi family and ignore their sacrifices for the Nation.

Rishi Saini ???????? 27.5K
@Rishi_INC
वी.पी सिंह की सरकार को BJP समर्थन की शर्त थी राजीव गांधी की SPG हटा दो उसके बाद राजीव की हत्या कराइ गई थी।
फिर वही हो रहा है।

S Rao
@SHCHAUHAN3
इससे बड़ी विडम्बना ओर क्या हो सकती हैं देश में।

पीएफ़ घोटाला: 45,000 कर्मचारियों का पैसा निजी कंपनी के पास कैसे पहुंचा? लोगों का अब पीअफ का पैसा तक सुरक्षित तक नहीं रहा देश में ।
है किसी के पास कोई जवाब,

Mayawati
@Mayawati
बीजेपी की केन्द्र सरकार द्वारा बिना पूरी तैयारी के जल्दबाजी व अपरिपक्व तरीके से किये गये नोटबन्दी का दुष्परिणाम पिछले 3 वर्षों में विभिन्न रूपों में जनता के सामने लगातार आ रहा है बल्कि देश में बड़ती बेरोजगारी व बिगडत़ी आर्थिक स्थिति इसी का मुख्य कारण है जिसपर जनता की पैनी नजर है।

Ashwini Upadhyay
@AshwiniBJP
क्या आप सहमत हैं कि:

सफेदपोश लुटेरों की पेंशन बंद होना चाहिए
चल-अचल संपत्ति 100% जब्त होना चाहिए

सश्रम आजीवन कारावास की सजा
चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध

पार्टी पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबंध
राजनीतिक पार्टी बनाने पर आजीवन प्रतिबंध

देशहित समाजहित जनहित में

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