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यमन में सऊदी अरब और यूएई में बढ़ा टकराव!

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि यूएई 16 अरब और सऊदी अरब, बीस करोड़ डालर सालाना यमन में खर्च कर चुके हैं, कहा कि यमन के खिलाफ हमले में सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद गहरे होते जा रहे हैं। याद रहे यह दोनों देश, यमन पर हमला करने वाले गठजोड़ के मुख्य सदस्य हैं।

अली असगर हाजीज़ादे ने कहा कि यमन के मैदान में सऊदी अरब और यूएई की हालत बेहद खराब है।

उन्होंने कहा कि यमन की जनता ने खाली हाथों से, भुखमरी के दौरान संघर्ष किया और आज मैदान उनके हाथ में है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार ने इसी प्रकार कहा कि सऊदी अरब ने स्टॅाकहोम समझौते को लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व समुदाय और विश्व के अन्य देशों ने इस संदर्भ में अंसारुल्लाह की पहल का स्वागत किया लेकिन दूसरे पक्ष ने सहयोग नहीं दिया।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार हाजीज़ादे ने यमन में शांति के लिए ईरान के सुझाव का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध विराम के लिए ईरान का प्रस्ताव, घेराबंदी के अंत, मानवप्रेमी सहायता देने, यमनी गुटों में वार्ता के आंरभ और व्यापक सरकार के गठन पर आधारित है।

सऊदी अरब और यूएई ने अमरीका और अन्य देशों के सहयोग से मार्च सन 2015 से यमन पर हमले आंरभ किये हैं जो अब तक जारी हैं। हमले के साथ ही सऊदी अरब ने यमन की जल, थल, और वायु से घेराबंदी कर रखी है जिसकी वजह से इस देश में बीमारी और भुखमरी फैल चुकी है।

सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के आक्रमण की वजह से अब तक 16 हज़ार से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं जबकि दसियों हज़ार घायल हैं।

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