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ओआईसी ने भारत में सीएए और बाबरी मस्जिद मामले पर चिंता जताई : कहा, ”अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जाए”

इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी ने भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे बर्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर और अन्य अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांत, बिना भेदभाव अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गैरेंटी देते हैं।

जेद्दा से जारी बयान में ओआईसी का कहना था कि ओआईसी का जनरल सेक्रेट्रीयेट भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाली हालिया कार्यवाहियों को निकट से देख रहा है।

भारत में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून और अन्य कार्यवाहियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बयान में कहा गया है कि नागरिकता के अधिकार और बाबरी मस्जिद केस दोनों कार्यवाहियों पर चिंता है।

ओआईसी ने अपने बयान में भारत सरकार पर बल देते हुए कहा है कि भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों की रक्षा और इस्लामी पवित्र स्थलों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने पर बल दिया जाता है।

भारत में पैदा होने वाली हालिया स्थिति पर ओआईसी ने कहा कि जनरल सेक्रेट्रियेट संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर और इस हवाले से अन्य अंतर्राष्ट्रीय समझौतों की ओर से अल्पसंखस्यकों के किसी भेदभाव के बिना अधिकारों की गैरेंटी देने वाले सिद्धांतों के महत्व पर बल देता है।

ओआईसी ने सचेत करते हुए कहा है कि इस संबंध में यदि कोई कार्यवाही इन सिद्धांतों और समझौतों के विरुद्ध की गयी तो और भी तनाव बढ़ सकता है और पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता के हवाले से ख़तरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं।

ज्ञात रहे कि भारत में विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून के संसद में पास होने के बाद मुसलमानों और अन्य संगठनों की ओर से प्रदर्शन जारी हैं जिनमें अब तक कम से कम 23 लोग हताहत और दर्जनों घायल हो चुके हैं।

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