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जब स्कर्ट उतारी तो पीछे घूम गये थे तालिबानी, इससे प्रभावित होकर ब्रिटिश पत्रकार मुसलमान बन गयी!

पूरा नाम पुराना : वाननी रिडले
नया इस्लामिक नाम :मरियम रिडले
जन्म : 23 अप्रैल 1958
जन्म स्थान : कॉउंटी डरहम
नागरिकता : बर्तानवी( इंगलैंड)
नस्ल : अंग्रेज़
धर्म : इस्लाम , पहले मसीही धर्म था
पेशा : पत्रकारिता
पेशेवारना ज़बान : इंग्लिश
मरियम रिडले (वनानी रिडले) सन्डे एक्सप्रेस की चीफ रिपोर्टर के साथ सन्डे टाइम्स, आब्ज़रोर, डेली मिरर,इंडीपेंडेंट ऑफ सन्डे, के लिए भी काम किया CNN, BBC, ITN और कार्लटन टीवी के साथ भी काम किया, इसी बीच इराक अफगानिस्तान फ़लस्तीन का दौरा भी किया, महिलाओं के होकूक़ के लिए भी काम करती हैं, जंग के खिलाफ बने ग्रुप की मेम्बर भी हैं, राजनीतिक तौर पर रिस्पेक्ट पार्टि से जुड़ी हैं आज कल ईरानी चैनल प्रेस TV के साथ काम कर रही हैं

इंग्लैंड में पैदा हुई क़ाबिल ब्रिटिश खातून रिपोर्टर “वाननी रिडले” को तालिबानी अफ़ग़ानिस्तान में रिपोर्टिंग के लिए भेजा गया था.वहां वो बुर्के में रहकर गांव गांव रिपोर्टिंग करती थी कि एक दिन तालिबान के बीच उनका हाईटेक कैमरा गिर जाने के कारण वो पकड़ी गईं..!

तालिबान के घेरे में आने के बाद वो अपने इबरत्नाक भयानक अंजाम के बारे में सोच कांप रही थी कि अब ये बर्बर तालिबानी उनके साथ गैंगरेप करेंगे और डरावने अज़ीयत देंगे क्योकि वेस्टर्न मीडिया में ऐसी झूठी खबरें आम थीं..!

तालिबानी मर्दो ने उन्हें छुवा भी नही पर एक खातून ने आकर उनकी तलाशी लेनी चाही,इसपर बिदककर रिडले ने बुर्के समेत नीचे के अपने स्कर्ट को उठाना चाहा जिसपर वो तालिबानी मर्द 180 डिग्री घूम कर नीची नज़रे किये फौरन चले गए..!

तालिबान की हिरासत से आज़ाद होकर और उनके हुस्ने अख़लाक़ से मुतास्सिर होकर वो जब इंग्लैंड लौटी तो क़ुरान की डीप स्टडी की और एक दिन प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने मुसलमान बनने का एलान किया कि इस्लाम वाहिद ‘सच्चा दीन’ है,उन्होंने अपनी किताब “in the hands of Taliban” में लिखा कि तालिबानियों को मारने के लिए बम की ज़रूरत नही,वो इतने हयादार मुसलमान है कि औरत के कपड़े ही उनपर फेंक दो तो शर्म से मर जायेंगे..!

उन्होंने इस्लामोफोबिया ग्रस्त वेस्टर्न मीडिया की जमकर क्लास ली और कहा कि मुस्लिम आमतौर पर बड़े भोले और सीधे सच्चे लोग होते हैं,isis जैसी कोई तंज़ीम इस्लामी है ही नही,बल्कि यहूद नवाज़ मीडिया और इस्लाम दुश्मन सत्ताधारियों की साजिश है कि इस्लाम की अच्छाई और हकपरस्ती बाकी दुनिया तक न पहुँचे और मुस्लिमो को टेररिस्ट कहकर ज़हनी मार मारी जाए..!

अपना नाम मरियम रिडले रखने वाली ये बहादुर नवमुस्लिमा 2013 में जमात-ए-इस्लामी द्वारा आयोजित ‘स्प्रिंग ऑफ इस्लाम’ मे हिस्सा लेने दिल्ली आना चाहती थी पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें वीज़ा ही न दिया..!

 

Zaara Hayat Khan
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जब स्कर्ट उतारी तो पीछे घूम गये थे तालिबानी, इससे प्रभावित होकर अमेरिकी पत्रकार बन गयी मुसलमान!

“बदन से थरथरी जारी थी, दिल उछल रहा था, होंट बुदबुदा रहे थे, पैरों की कंपकपी और घबराहट से बैठ जाना चाहती थी, लेकिन डर की वजह से बैठ नहीं सकती थी, उसको लगा तालिबानी उसकी अस्मत लूटने वाले हैं, क्यों उसने उनके बारे में ऐसा ही सुना था, लेकिन फिर एक चमत्कार हुआ, और उसने राहत की सांस ली”

मरियम रिडले (वनानी रिडले) सन्डे एक्सप्रेस की चीफ रिपोर्टर के साथ सन्डे टाइम्स, आब्ज़रोर, डेली मिरर,इंडीपेंडेंट ऑफ सन्डे, के लिए भी काम किया CNN, BBC, ITN और कार्लटन टीवी के साथ भी काम किया, इसी बीच इराक अफगानिस्तान फ़लस्तीन का दौरा भी किया, महिलाओं के होकूक़ के लिए भी काम करती हैं, जंग के खिलाफ बने ग्रुप की मेम्बर भी हैं, राजनीतिक तौर पर रिस्पेक्ट पार्टि से जुड़ी हैं आज कल ईरानी चैनल प्रेस TV के साथ काम कर रही हैं।

इंग्लैंड में पैदा हुई क़ाबिल ब्रिटिश खातून रिपोर्टर “वाननी रिडले” को तालिबानी अफ़ग़ानिस्तान में रिपोर्टिंग के लिए भेजा गया था.वहां वो बुर्के में रहकर गांव गांव रिपोर्टिंग करती थी कि एक दिन तालिबान के बीच उनका हाईटेक कैमरा गिर जाने के कारण वो पकड़ी गईं। तालिबान के घेरे में आने के बाद वो अपने इबरत्नाक भयानक अंजाम के बारे में सोच कांप रही थी कि अब ये बर्बर तालिबानी उनके साथ गैंगरेप करेंगे और डरावने अज़ीयत देंगे क्योकि वेस्टर्न मीडिया में ऐसी झूठी खबरें आम थीं।

तालिबानी मर्दो ने उन्हें छुवा भी नही पर एक खातून ने आकर उनकी तलाशी लेनी चाही,इसपर बिदककर रिडले ने बुर्के समेत नीचे के अपने स्कर्ट को उठाना चाहा जिसपर वो तालिबानी मर्द 180 डिग्री घूम कर नीची नज़रे किये फौरन चले गए।

तालिबान की हिरासत से आज़ाद होकर और उनके हुस्ने अख़लाक़ से मुतास्सिर होकर वो जब इंग्लैंड लौटी तो क़ुरान की डीप स्टडी की और एक दिन प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने मुसलमान बनने का एलान किया कि इस्लाम वाहिद ‘सच्चा दीन’ है,उन्होंने अपनी किताब “in the hands of Taliban” में लिखा कि तालिबानियों को मारने के लिए बम की ज़रूरत नही,वो इतने हयादार मुसलमान है कि औरत के कपड़े ही उनपर फेंक दो तो शर्म से मर जायेंगे ।

उन्होंने इस्लामोफोबिया ग्रस्त वेस्टर्न मीडिया की जमकर क्लास ली और कहा कि मुस्लिम आमतौर पर बड़े भोले और सीधे सच्चे लोग होते हैं,isis जैसी कोई तंज़ीम इस्लामी है ही नही,बल्कि यहूद नवाज़ मीडिया और इस्लाम दुश्मन सत्ताधारियों की साजिश है कि इस्लाम की अच्छाई और हकपरस्ती बाकी दुनिया तक न पहुँचे और मुस्लिमो को टेररिस्ट कहकर ज़हनी मार मारी जाए..!

अपना नाम मरियम रिडले रखने वाली ये बहादुर नवमुस्लिमा 2013 में जमात-ए-इस्लामी द्वारा आयोजित ‘स्प्रिंग ऑफ इस्लाम’ मे हिस्सा लेने दिल्ली आना चाहती थी पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें वीज़ा ही न दिया..!


kunal kamal
@TheKunalG
अपना नाम मरियम रिडले रखने वाली ये बहादुर नवमुस्लिमा 2013 में जमात-ए-इस्लामी द्वारा आयोजित ‘स्प्रिंग ऑफ इस्लाम’ मे हिस्सा लेने दिल्ली आना चाहती थी पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें वीज़ा ही न दिया..!!

 

Shameem Shikrawa ???? हरयाणवी
@SShikrawa
इंग्लैंड में पैदा हुई क़ाबिल ब्रिटिश खातून रिपोर्टर वाननी रिडले ने In The Hands Of Taliban. में कहा दुनिया का सबसे सच्चा मजहब इस्लाम है

ओर कहा मुस्लिम बड़े सीधे व सच्चे होते है।
ISIS जैसी कोई इस्लामिक तंजीम है ही नही, यहूदी नवाज़ मीडिया व दुश्मने इस्लाम ने इसे बदनाम क्या हुआ है।

kunal kamal
@TheKunalG

???? इंग्लैंड में पैदा हुई क़ाबिल ब्रिटिश खातून रिपोर्टर “वाननी रिडले” को तालिबानी अफ़ग़ानिस्तान में रिपोर्टिंग के लिए भेजा गया था.वहां वो बुर्के में रहकर गांव गांव रिपोर्टिंग करती थी कि एक दिन तालिबान के बीच उनका हाईटेक कैमरा गिर जाने के कारण वो पकड़ी गईं..!

 

Zaara Hayat Khan
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बदलते वक्त के साथ बॉलीवुड भी उनके ऐजेंडे को पूरी तन्मयता से पूरा कर रहा है, पिछले दशक तक छोटे पर्दे तक भी ये ज़हर नहीं पहुंचा था टीपू सुल्तान, अकबर, नूरजहां जैसे सिरीयल्स में मुस्लिम शासकों की बहुत अच्छी छवी को पेश किया जाता रहा, जिसमे टीपू सुल्तान सीरियल ने तो हर वर्ग के भारतीयों के दिलों में देशप्रेम की भावना को बलवंत किया था ये वो दौर था जब ज़हर का स्तर ना के बराबर था,ज़हर था लेकिन ज़ुबान पर नहीं आ रहा था,बात बात पर मुसलमानों को पाकिस्तान जाने की धमकी नहीं दी जाती थी वोट का अधिकार छीनने की बात नहीं की जाती थी लेकिन जैसे जैसे फ़िज़ा जहरीली होती गई, सिनेमा जगत ने अपना रुख़ बदल दिया या कहें की आज जो मुसलमान किरदारो की नकारात्मक छवी दिखाई जा रही है वो एक प्रोपागेंडे का ही हिस्सा है जिसमे बॉलीवुड सफ़े अव्वल में है।

बॉलीवुड द्वारा मुस्लिम किरदारों के इस नकारात्मक प्रचार में एक फ़ायदा भी हुआ है, इतिहास में कई किरदार ऐसे थे जिन्हें हम भूल चुके थे लेकिन बॉलीवुड ने इन्हें ज़िंदा कर दिया भले ही नकारात्मक रूप में, जो की एक विवाद का ज़रिया बनता है और ये इनके प्रोजेक्ट को हिट कराने का प्रोपागेंडा रहता है,उससे हमें ये फायदा होता है की मुस्लिम कैरेक्टर का नाम देखकर हम उसके डिफेंड में आते हैं उसके बारे में जानने और पढ़ने का मौक़ा मिलता है, ज़ाहिर सी बात इंटरनेट का ज़माना है जब नकारात्मक बाते वायरल होती है तो सकारत्मक भी वायरल होती हैं और कई लोगो की भ्रांतियां दूर हो जाती है, हम में से कितने ही लोग अलाउद्दीन ख़िलजी के बारे में नहीं जानते थे लेकिन जब पद्मावत मूवी का विवाद हुआ तो लोगो ने अलाउद्दीन खिलजी को खोजा और पढ़ा तो पता चला की ये वो अज़ीम शख़्सियत थी की अगर ये सरज़मीने हिन्दोस्तान में ना आए होते तो भारत पर भी मंगोल राज कर गए होते, हमें ये भी पता चला की कैसे अलाउद्दीन ख़िलजी ने हज़ारो मंगोल सैनिको की कटी गर्दनो को दिवार में चुनवा दिया गया, तो हम शुक्रिया अदा करते हैं सिनेमा जगत का आप ऐसे ही प्रोपागेंडा करते रहिये मुस्लिम किरदारो को लेकर ताकी हम उसके काउंटर में उनके इतिहास को पढ़ सके और अपनी और आपकी भ्रांतियां दूर कर सकें।

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