उत्तर प्रदेश राज्य

बीएचयू के 51 प्रोफ़ेसरों ने सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ शुरू किया अभियान

उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और उससे संबद्ध कॉलेजों के 50 से ज्यादा संकाय सदस्यों ने एक बयान जारी करके विवादित संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) एवं प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की निंदा की है.

संकाय सदस्यों के हस्ताक्षर वाले इस बयान में कहा गया है, ‘हम बीएचयू, आईआईटी बीएचयू और संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक संसद द्वारा हाल में पारित संशोधित नागरिकता कानून और इसके बाद एनआरसी को लागू करने की घोषणा से बेहद दुखी और अचंभित हैं.’

इस बयान पर विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों के प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों समेत 51 संकाय सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं. इनमें बीएचयू में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एनके मिश्रा, भूगोल के प्रोफेसर सरफराज आलम, आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर पी. शुक्ला, प्रोफेसर आरके मंडल और प्रोफेसर एके मुखर्जी आदि प्रमुख हैं.

इसमें कहा गया है, ‘यह स्वतंत्रता के संघर्ष की भावना और बहुलवादी लोकतंत्र के विचार के खिलाफ है. यह गांधी और टैगोर की भूमि पर कतई स्वीकार्य नहीं है. यह सांप्रदायिक आधार पर समाज को बांटने की साफ कोशिश है. इससे आम आदमी की रोज़मर्रा की जिंदगी से जुड़े असल मुद्दे पीछे चले गए हैं.’

संकाय सदस्यों ने एनआरसी और सीएए के खिलाफ बुधवार को हस्ताक्षर अभियान चलाया था और सरकार से अपील की है कि वह इन कवायदों के दीर्घकालिक निहितार्थों पर पुन: विचार करे.

बयान में कहा गया है कि एक आधुनिक राष्ट्र में ‘प्रतिगामी और बिना जानकारी के बनाई गई नीतियां’ अस्वीकार्य हैं जिनमें ऐतिहासिक और सामाजिक समझ पर विचार नहीं किया गया है.

इसमें कहा गया है कि सरकार का नागरिकता को लेकर कदम भारतीय समावेशी परंपरा के खिलाफ है जिसका समर्थन भारतीय दर्शन में किया गया है.

बयान में कहा गया है, ‘हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस अधिनियम के दीर्घकालिक निहितार्थों के बारे में पुनर्विचार करे और उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रीय हित दलगत राजनीतिक से ऊपर रहेंगे. हम प्रदर्शनकारियों से भी आग्रह करते हैं कि वे हिंसा में शामिल नहीं हों और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति जताएं. हम जामिया मिलिया इस्लामिया समेत कई विश्वविद्यालयों के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की भी निंदा करते हैं.’

कुछ दिन पहले बीएचयू के कुछ छात्रों को एनआरसी और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए गिरफ्तार किया गया और जेल भेज दिया गया है.

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