दुनिया

रोहिंग्या मुसलमानों की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील, आईसीसी में आंग सान सूची का सफ़ेद झूठ!!!वीडियो

रोहिंग्या मुसलमानों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह म्यांमार की विदेश मंत्री व सत्ताधारी दल की प्रमुख आंग सान सूची के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में दिए गए बयान पर यक़ीन न करें।

सूची ने बुधवार को हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में रोहिंग्या मुसलमानों के दमन की म्यांमार सरकार की कार्यवाही का समर्थन किया। उन्होंने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार का खंडन किया और दावा किया कि लाखों रोहिंग्या मुसलमान विद्रोहियों के साथ लड़ाई के नतीजे में बाहर गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय आईसीसी ने 57 इस्लामी देशों के प्रतिनिधि के तौर पर गांबिया की सरकार की म्यांमार के सैनिकों द्वारा 2017 में रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार के मामले की शिकायत पर, मंगलवार को इस मामले की सुनवाई शुरु की।

सूची का यह झूठा बयान कि म्यांमार के राख़ीन राज्य में रोहिंग्या मुसलमान, विद्रोहियों के ख़िलाफ़ इस देश की सेना की लड़ाई के नतीजे में अपना वतन छोड़ कर बंग्लादेश गए हैं, उस सच्चाई का इंकार है जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय जानता है।

म्यांमार सरकार की ओर से राख़ीन राज्य में मुसलमानों की सही स्थिति के समाने आने से रोकने के लिए मीडिया कार्यकर्ताओं और जांच कमेटियों के प्रवेश पर रोक के बावजूद मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र संघ की अनेक रिपोर्टों में रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ म्यांमार सेना के अपराध का पर्दाफ़ाश हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा है कि म्यांमार की सेना इस देश में जातीय सफ़ाए के लिए ज़िम्मेदार है और यह दुनिया की सबसे बुरी सेना है।

म्यांमार सरकार के विरोध के बावजूद, रोहिंग्या मुसलमानों के म्यांमार की सेना द्वारा जनसंहार के मामले का आईसीसी में पहुंचना इस मामले के अंतर्राष्ट्रीय बनने और राख़ीन की जनता के ख़िलाफ़ अपराध करने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही में निर्णायक हो सकता है। जैसा कि विश्व जनमत भी इस अदालत से म्यांमार के मुसलमानों के ख़िलाफ़ इस देश के सैनिकों के अपराधों के विभिन्न आयामों की जांच की मांग करता है।

विश्व जनमत को आशा है कि आईसीसी रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार के मामले की सटीक जांच करने और इस अपराध के ज़िम्मेदारों को कड़ा से कड़ा दंड सुनाने के साथ साथ बंग्लादेश में रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यांमार वापसी का मार्ग समतल करने के लिए इस देश की सरकार पर दबाव डालेगा। अलबत्ता इस बात की भी चिंता मौजूद है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की संभावित वापसी शुरु होते ही उनके ख़िलाफ़ फिर से हिंसा आरंभ हो सकती है इसलिए म्यांमार सरकार से रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षा की गैरंटी लेना एक अंतर्राष्ट्रीय ज़रूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *