विशेष

हैदराबाद एनकाउंटर को यदि आप न्याय मानकर ख़ुश हो रहे तो तैयार रहिये जंगलराज के लिए..!!

Jitendra Narayan
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हैदराबाद एनकाउंटर को यदि आप न्याय मानकर ख़ुश हो रहे तो तैयार रहिये जंगलराज के लिए..जिसमें भीड़ (जनता,पुलिस प्रशासन भी) ही न्याय करेगी..न कोई सुनवाई, न जांच,न सजा..बस गोली-गाली…

होना यह चाहिए था कि फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट तेजी से सुनवाई कर कड़ी से कड़ी सज़ा सुनाती..पुलिस अधिक मानवीय होकर जाँच करती..यह हमारे गुस्से और डर को भुनाकर अपनी अकर्मण्यता छुपाना हुआ..

जहाँ मीडिया,जनता,पुलिस,प्रशासन, सरकार को अधिक सम्वेदनशील अधिक मानवीय,अधिक न्यायप्रिय, अधिक पारदर्शी होने की ज़रुरत है वहां इस तरह के एनकाउंटर जनता को मीठी गोली देने की तरह है..

मुझे उन चारों से सहानुभूति नहीं पर अपने देश की न्याय व्यवस्था की हत्या पर दुख है…

और हाँ बलात्कारियों के लिए इतना गुस्सा था पुलिस में तो वह थानों में होने वाले रेप पर अपने साथियों को भी गोली से उड़ाए..

 

-Mamta Singh

Syed Asdar Ali
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हैदराबाद पुलिस की जितनी तारीफ की जाए कम है,

हैदराबाद पुलिस ज़िन्दाबाद

गैंगरेप के चारों आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए.. मानवाधिकार इन्सानो के होते हैं…हैवानो के नही… अब हुआ न्याय

जिस दिन वर्दी का इस तरह सुदुपयोग होने लगा उस दिन हर तरह का अपराध बंद हो जायेगा….

जैसे बलात्कार के बाद जली हुई लाशें देख कर लड़कियां सहम जाती हैं…

वैसे ही बलात्कारी मानसिकता वाले पुरूष सहमने चाहियें…

बधाई हैदराबाद पुलिस

Asaduddin Owaisi
@asadowaisi
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7h
On Dec 6, 1992 a masjid was razed in Ayodhya

I remember watching its fall as a young man & I’ll make sure that every child in the next generation remembers it too

A masjid stood there for four centuries & those who destroyed it are yet to face justice

Pramod Planet
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वह लड़की

स्कूल के सामने बहुत ट्रैफ़िक थी । इसलिये एक अस्पताल के सामने रोड पर उसने अपनी आटोरिक्शा लगायी और जल्दी जल्दी वह स्कूल के तरफ़ चलने लगा । स्कूल से लगातार फ़ोन आ रहें थे उसे ।

उसकी बेटी अब सातवीं कक्षा में पढ़ रही थी । वह खुद कम पढ़ा था पर अपनी इकलौती बेटी खुब पढ़े, बहुत बड़ी बन जाये यहीं उसकी इच्छा थी । इसलिये शहर के एक बड़े स्कूल में उसने अपनी बेटी का एडमिशन लिया था । बहुत श्रम कष्ट कर वह उसके सब ख़र्च उठा रहा था ।

बेटी भी प्रतिभाशाली थी, खुब पढ़ाई कर रहीं थीं । क्लास में हमेशा फ़र्स्ट आती थी ।

कल रात उसके बेटी ने बताया । ग़र फ़ी नहीं भरीं तों उसे स्कूल से निकाला जायेगा । बढ़ी फ़ी और बिमारी के कारण इस साल वह फ़ी भर नहीं पाया । सुबह से कुछ उधार लेकर उसने २५ हज़ार रूपये जमा किए और वहीं पैसे लिए वह स्कूल के तरफ़ जाने लगा ।

जातें जातें अस्पताल के दरवाज़े के सामने उसके बेटी के उम्र की एक लड़की डाक्टर को विनती करते बोल रही थी, “डाक्टर प्लीज़ मुझे मदद किजीए । मेरे पास इतने पैसे नहीं । मेरे माँ को बचाइये ।”
उसके आँखों से आँसू बह रहे थे । डाक्टर उसे बोले, “मैं
कुछ नहीं कर सकता । आपरेशन के २५,००० भर दो, हम फ़ौरन आपरेशन कर देंगे ।”

न जाने क्यों पर वह वहीं ठहर गया । उस लड़की के पास जाकर उसने उससे सब पुँछ लिया । बिना कुछ सोचे उस ने पॉकेट से पैसे निकाले और आपरेशन के लिए भर दिए । लड़की ने हाथ जोड़कर उसके आभार मान लिये ।

स्कूल में प्रवेश करते वक्त उसकी धड़कनें तेज़ हो गयीं थी । अब क्या होगा? मैंने ये क्या किया? मेरी बेटी को स्कूल से निकाल तो नहीं देंगे? सोचते सोचते वो स्कूल में गया । उसे स्कूल के संचालिका ने ऑफ़िस बुलाया था ।

ऑफ़िस में प्रवेश करते ही संचालिका ने पुछा, “ सुबह से आप को फ़ोन कर रहे हैं हम । फ़ोन क्यों नहीं उठाया?”

“मुझे माफ़ कीजिए ।” बोलते बोलते उसकी नज़र नीचे झुक गयी । वह पसीने से पुरी तरह से भीग गया था। अब इन्हें मैं क्या बताऊँ ?

तभी संचालिका बोलीं, “आपके लिए एक अच्छी ख़बर है । एक बड़ी कंपनीने एक प्रतियोगिता लियी थी और आपके बेटी के साथ और दो लड़कियाँ सिलेक्ट हो गयीं । इन लड़कियों का ग्रैजुएशन तक का सब ख़र्चा कंपनी उठायेगी और साथ ही हर महीने एक हज़ार स्कॉलरशिप भी उसे मिलेगी ।”

हाथ जोड़ते खुशीसे उसने आँखें बंद कर दी और उसी क्षण उसे हाथ जोड़े उसके आभार मानतीं वह लड़की याद आयी ।

प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare

आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें ????????????

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#pramodplanet

‎Lavanya Naidu‎
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चुप्पी अब अौर नहीं

मोहन को आज प्रमोशन मिला था और कंपनी की तरफ से २ साल के लिए एक प्रोजेक्ट पर उसे यूएस भेजा जा रहा था। बॉस ने मीटिंग में उसके प्रमोशन की घोषणा की पर उस मीटिंग में कोई खुश नहीं था तो वो थी छाया। वीकेंड पर मोहन ने पब में पार्टी रखी। सब पार्टी में आ गए सिवाय छाया के। पब में वीकेंड होने की वजह से भीड़ भी बहुत थी। मोहन पास बैठे अपने दोस्त रवि से बोला “यार वो नीली ड्रेस वाली लड़की क्या डांस कर रही है! पर चेहरा ठीक से नजर नहीं आ रहा। जी कर रहा है अभी उसे पकड़ लूं।”

रवि बोला “मोहन तुझे बहुत चढ गई है, चुपचाप एक जगह बैठ नहीं तो घर चल।”

मोहन ने रवि की नहीं सुनी और वो उस लड़की के पास चला गया। मोहन उस लड़की को पीछे से कस के पकड़ा और डांस करने लगा। लड़की ने बहुत छुड़ाने की कोशिश की पर तेज म्यूजिक‌ अौर नशे में मोहन को कुछ सुनाई नहीं दिया। मोहन ने उस लड़की को एक हाथ से पकडा अौर दुसरे हाथ से उसके शरीर को‌ हर जगह छु रहा था। आखिर लड़की की कोशिश कामयाब हुई और उस लड़की ने पलटकर एक ज़ोर का झापड़ मोहन के गाल पर दे मारा। झापड़ इतना जोरदार था कि मोहन दूसरे लड़के से टकरा गया। उसके साथ आए दोस्त मोहन से भिड गये। झगडा बहुत बड गया। ये सारी आवाजें एक साथ होने से पब का म्यूजिक अचानक बंद कर दिया गया और लाइट ऑन हुई। लाइट चालू होते ही मोहन उस लड़की को, लड़की मोहन को देखते रह गए। वो लड़की मोहन की बहन शीतल थी। शीतल बोली “भैया तुम” अौर हीन भावना से छी बोल कर रोते हुए वहां से चली गई। मोहन का भी सारा नशा पल में उतर गया।

इस वाकिये को छाया ने भी देखा जो अपने दोस्तों के साथ पब आई थी। छाया को मोहन से नफरत थी। उसके पीछे एक वजह थी, कुछ महीनों पहले ऑफिस की एक पार्टी में मोहन ने छाया से ऐसे ही बदतमीजी की थी। छाया बड़ी मुश्किल से अपने आप को बचाकर पार्टी से भागी थी। अगले दिन मोहन ने माफी मांगने की जगह छाया को अजिब नजरों से देखने लगा अौर बेशर्म हंसी हंसता। छाया ने मोहन को कई बार समझाया, शिकायत करने की धमकी भी दी पर मोहन ने कहा “तुम ऐसे कपड़े पहनती ही क्यों हो कि तुम्हें कोई छेड़े।”

छाया कभी कंप्लेंट भी नहीं कर पाई क्योंकि वो अभी नयी थी, उसे डर था कि कोई उसकी बात मानेगा या नहीं क्योंकि मोहन कंपनी का बेस्ट एंप्लॉय में से था, पर आज छाया को पछतावा था कि अगर वो मोहन को‌ तभी ‌सबक सिखा देती तो‌ वो‌ किसी अौर के साथ ऐसा करने‌ की हिम्मत नहीं करता। छाया ने‌ ठान लिया कि वो हिम्मत करके शिकायत करेगी ताकि अब ‌अौर कोई लड़की मोहन के गंदी हरकतों का‌ शिकार ना बने।

अगले दिन छाया ने मैनेजमेंट से मोहन की लिखित शिकायत कर दी। मैनेजमेंट ने तुरंत मोहन को‌ यूएस के प्रोजेक्ट से हटा दिया। कमिटी बैठी अौर जांच मे दुसरी महिला कर्मचारियों से भी मोहन द्वारा छेड किए जाने का पता चला।साथ मे ये भी पता चला कि वो अपने सीनियर पद पर होने का उन सबको धौंस देता था की मैनेजमेंट उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती उलटा उन लड़कीयों‌ को ही नौकरी से निकाला जायेगा। सारी जांच के बाद मैनेजमेंट ने मोहन को‌ नौकरी से निकाल दिया।

स्वरचित
लावण्या नायडू
धन्यवाद।

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