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आवारा भेड़ें हैं,,,,भेड़िये हैं,,,,ख़ालिद नहीं हैं, जिन्ना नहीं हैं,,,,NRC को लेकर जनता के अंदर ख़ौफ़ है!

परवेज़ ख़ान
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देखते ही देखते,,,,आसिम बिन उमरो के तीरअंदाज़ तमाम दीवार पर फैल गये, वो अन्दर भी देख रहे थे बाहर भी,,,ख़ालिद बिन वलीद र. दीवार के उपर गये और सारे षहर के गिर्द धूम आये,,,षहर में इन्हें अपने दस्तों के सिवा कोई और नज़र नहीं आ रहा था,,,बाहर ऐदी बिन हातिम के दस्ते थे,,, ख़ालिद बिन वलीद र. की नज़र जहां तक काम कर रही थी उन्हें दुष्मन के लष्कर का कोई खरा खोज नहीं मिल रहा था,,,इन्हें धुड़सवारों की दो तीन टोलियां दिखाई दीं, वो मिस्ना बिन हारिस के सवार थे, ख़ालिद बिन वलीद र. नीचे आ गये, उन्हें बताया गया कि एक ज़ईफ़ आदमी एक मकान में चारपाई पर पड़ा है,,,ख़ालिद बिन वलीद र. उस मकान में गये, एक बूढ़ा जिसकी आॅखें अध खुली थीं और मुंह भी खुला हुआ था, चारपाई पर पड़ा लाष लग रहा था,,,उसकी आवाज़ पस्त थी, वो कुछ कह रहा था, ख़ालिद बिन वलीद र. ने अपने एक सिपाही से कहा कि वह उस बूढे आदमी के मुंह से कान लगा के सुने,,,‘‘क्या तुम वही हो जिन के डर से षहर ख़ाली हो गया है’’,,,बूढ़े ने पूंछा,,,,
‘‘हम मुसलमान हैं’’-ख़ालिद र. के सिपाही ने कहा।
‘‘मदीना के मुसलमान,,,बॅढ़े ने पूंछा,,,और जवाब का इंतिज़ार किऐ बग़ैर कहने लगा,,,‘‘मैं यहां का ईसाई हूं’’, वो मुइे मरने के लिऐ छोड़ कर चाले गयें हैं’’,,,
कहां चले गये,,, ख़ालिद र. के सिपाही ने कहा।
भाग गयें हैं,,,बूढ़े ने कहा,,,सालार भाग जाये तो लोग क्यों नहीं भागेंगे,,,बूढ़े ने पूंछा,,,,क्या, ख़ालिद तुम्हारा सालार है!!! यहां सब उसे जिन और देव कहते हैं,,,हां,,,,हां,,,जिसने किसरा की फ़ौज को भगा दिया हो वो इंसान नहीं हो सकता,,,
ख़ालिद र. ने उस बूढ़े आदमी को नहीं बताया कि वो देव और जिन उसके सामने खढ़ा है,,,उन्होंने हुक्म दिया कि बूढ़े के मुंह में दू़ध ड़ाला जाये,,,
उस बूड़े को दूध पिलाकर उटनी के उपर बैठा कर छोड़ दिया गया,,,
ज्ब ख़ालिद र. ने अमनीषियां ष्हर को जीत लिया तो वहां से मिला सारा माल, सामान एक जगह जमा किया गया,,,तो,,,ख़ालिद ने हुक्म दिया,,,आग लगा दो इस सामान को,,,ये ऐष ओ इषरत का वो सामान है जिसने इस का़ैम को बुज़दिल बना दिया है,,,इन लोगों का इन्जाम देख लो,,,इनके महल और मकान देख लो,,,,खु़दा की कसम खु़दा जिसे तबाह करना चाहता है उसे ऐष ओ इषरत में ड़ाल देता है,,,,,हमें आगे जाना है,,,,,जला दो इसे,,,,आग लगा दो इस दौलत को,,,आगे बढ़ो,,,,
ये एक ऐतिहासक वाक्या है जो बयान किया है,

अब आतें हैं क़ायदे आज़म मुहम्मह अली जिन्ना पर,,,

अल्लाह ने इंसान को आखें दीं हैं,,,इन आखें से हर इंसान आगे की तरफ़ देखता है कोई चाहे तो भी बिना पीछे धूमे पीधे नहीं देख सकता है मगर बाद वाले यानी पीछे चलने वाले आगे चलने वाले के ,जो वाक्या बयान किया, को देख सकते हैं और इसी को नसीहत, इबरत कहते हैं,,,

मुहम्मद अली जिन्ना र. को मैं भारत के विभाजन के लिऐ ज़िम्मेदार नहीं मानता हूं,,,, मुहम्मद अली जिन्ना र. गुजराती पटेल थे, उनके पिता मुसलमान हो गये थे,,,अमीर परिवार से थे, क़ाबिल और लायक़ इंसान थे,,,जिन्ना धर्म की रजनीति को कभी सही नहीं मानते थे, 1906 में अंग्रेज़ौ ने धर्म के आधार पर बंगाल का विभाजन किया था, जिन्ना अकेले नेता थे जिन्होंने उसका विरोध किया था, वह कांग्रेस के बड़े लीडर थे, बाल गंगाधर तिलक और जिन्ना में आपस में अच्छे सम्बन्ध थे, जिन्ना ने भगत सिंह का बचाव अदालत में किया था वह तिलक के वकील थे, राजनैतिक रुप से जिन्ना और गाॅधी में मतभेद थे मगर ये लोग आपस में मिलते थे, नेहरु, पटेल से जिन्ना के राजनैतिक मतभेद थे मगर वह जब मिलते थे तब सिर्फ़ दोस्तों की तरह, कांग्रेस नेत्री सरोजनी नायडू बंगाल की राज्यपाल रहीं मुहम्मद अली जिन्ना को ‘‘हिन्दू – मुस्लिम’’ एकत का प्रतीक मानती थीं,,,इतिहास में बहुत अन्दर न जाकर,,,भारत का बटवारा ब्रिटिष सरकार का कार्यकृम था जिसे न कांग्रेस रोक सकती थी न जिन्ना,,,सैकेंड़ वल्र्ड वार के बाद के जो हालत थे वह अंग्रेज़ों के खि़ालाफ़ थे, उस समय उन्होंने भारत से जाने का फैसला कर लिया था, भारत से जाने से पहले ब्रिटिष सरकार ने विभाजन की रुप रेखा तैयार कर ली थी, जिन्ना का टकराव उस समय कांग्रेस से था, वह था अंग्रेज़ों के यहां से चले जाने के बाद पावर षेयरिग और मयनौरटी के आधिकारों को लेकर, जिन्ना और कांग्रेस की लड़ाई बटवारा रोकने के लिऐ नहीं थी, और बटवारे को रोकना इनकी ताकत में था भी नहीं, वह अंग्रेज़ों का फैसला था,,,बंटवारे को लेकर जो आज तक तथ्य, कहानियां, किस्से बताये जाते रहे हैं वह सियासी नफ़ा नुक्सान को देख कर बताये गये हैं,,,,

 भारत के बटवारे के समय के 6 से 8 हज़ार अंग्रेज़े भारत में थे और भारत की आबादी उस समय 33 करोड़ थी, इतने ही देवी देवता भी थे,,,मगर फिर भी भारतवासी उन्हें मार कर नहीं भगा सके,,,अंग्रेज़ों ने भारत पर 300 साल राज किया था, इन 300 साल के राज में यहां कभी भी 50 हज़ार से ज़्यादा अंग्रेज़ नहीं रहे,,,अब समझ लें कि उन्होने जो राज किया था वह किस के दम पर किया था और अंग्रेज़ों की सेना में तलवार थाम कर वह कौन लोग थे जो सबसे आगे होते थे,,,

 भारत की जनता को भोलाी और मूर्ख दोंनों ब्दों से सम्बोधित कर सकते हैं, भोली इसलिऐ कि यह सच में आज भी किसी गुज़री हुई सदी में जी रही है, यह जनता भावनाओं में बह जाती है इसलिए मूर्ख भी है, यहां आसाराम, झाांसाराम, गुरमीत सिंह, रामदेव, भीमानन्द,,,जैसे बाबा करोड़ों का सामराज्य खड़ा कर लेते हैं और गरीब, मजदूर, बेरोज़गार, किसान को जिन्ना की कहानी सुना कर उसकी सभी परेषानियों से मुक्ति दे दी जाती है,,,,

 जिस दिन 1905 में ढाका में मुस्लिम लीग पार्टी बनी थी जिन्ना ढ़ाका ही में थे मगर मुस्लिम लीग के कार्यकृम में नहीं गये थे, वह धर्म/पंथ की राजनीति के विरोधी थे

 1905 में जब जिन्ना की षादी हुई थी तब उन्होंने अपनी पत्नि के लिए 50 हज़ार से ज़्यादा की रक़म से ‘बाथरुम’/षौचालय बनवाया था, पत्नी को छोड़ कर नहीं भागे थे।

 जिन्ना के बारे में ज़्यादा लिखने से भी कोई फ़ायदा नहीं, उन्हें सिर्फ़ समझा जाना जुरुरी है, और समझना जुरुरी है उन लोगों की हरकतों को जो जिन्ना का बहाना कर अब देष को तोड़ना चाहते हैं,,,

 संध ‘परिवार’,,,ऐसे लोगों का संगठन है जिनके ‘परिवार’ ही नहीं हैं,,,संध के लोग सत्ता में हैं, देष की हर संस्था पर इनका कब्ज़ा हो चुका है, इनका अन्तिम ल़क्ष्य भारत पर कब्ज़ा करना है,

 जिन्ना संध परिवार को अन्तिम ल़क्ष्य की पूर्ति तक पंहुचा सकते हैं

इसमें काई क या मतभेद षायद नहीं होना चाहिये कि क़ायदे आज़म मुहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम समाज के तीन दष्कों के इतिहास में भारतीय उप महाद्धीप के सबसे बड़े नेता हैं
 

जिन्ना को लेकर संध व अन्य कट्टरपंथी संगठनों के लोगों को कोई आपत्ति नहीं है बल्कि कुन्ठा है, संध के पास कोई एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिस का कोई योगदान देष अथवा समाज के लिए रहा हो, संध के कई महापुरुश अंग्रेज़ों के वफ़ादार थे, मुख़बिर थे, इसलिए संध के लोगों, नेताओं के अन्दर नकारात्मक विचार पाया जाता है और फिर यह लोग हर किसी को अपने जैसा समझने लगते हैं, जैसा कि कहावत है ‘‘चोर को हर कोई चोर ही नज़र आता है’’,,,

 मुसलमानों ने अपना बहुत नुक्सान ख़ुद किया है, इस वक्त क़ौम के अन्दर अगर समाजी ऐतबार से गिरावट को देखा जाये तो अहसाास होता है कि क़ौम तबाही की उची पहाड़ी की गहरी खाई के किनारे खड़ी है

 कुदरत हालात पैदा करती है और कुदरत ही असबाब पैदा करती है, ‘‘जब कोई चीज़ बढ़ती है तो उसकी एक उम्र होती है, उस उम्र को पंहुचने के बाद फिर वह अपनी बढवार से रुक जाती है और ढलान षुरु हो जाता है, संध/आरएसएस इस समय बहुत ताक़त में है, जिसका मुकाबला मुसलमान नहीं कर सकते हैं, क्यों कि,,,,अब जो मुसलमानों में ख़ालिद हैं भी वह बदक़ार और बेकार है,,,,
 

जीतने के लिऐ जबानें नहीं दिमाग़ की ज़रुरत होती है, हिम्मत और जंगी हुनर चाहिऐ होता है, वह है कहां मुसलमानों में,,,,दो रक़अत पढ़ने और सलाम के बाद ‘‘तितर-बितर‘‘ हो जाते है जैसे आवारा भेड़ें,,,,
 

कोई भी का़म्याबी उस वक्त तक नहीं मिल सकती है जब तक आप ‘‘झुंड़’’ में रह कर एकता और अनुसाषन के साथ काम नहीं करेंगे।

 भारत विभाजन को 1947 में होना ही था वह हो चुका है, ज़िम्मेदार मुसलमान नहीं थे, ज़िम्मेदार थे 33 करोड़ में से अल्पसंखिकों को छोड़कर बाकी़ के देष भक्त,,,,
 महाभारत काल में इंटरनैट भारत में था, मिसाईलें थीं,,,विमान थे,,,मानना पड़ेगाए नहीं मानोगे तो देष द्रोही,,,ये भी कह ही दो कि तब षौचालय भी थे,,,जो आज नहीं हैं,,,

 संध ने प्रचार के माध्यमों से देकी ‘‘भोली-भाली’’ जनता को मुस्लिम समाज के बारे में गुमराह करकर कर ‘ज़हरीला’ बना दिया है, ऐसा मनगढ़त/काल्पिनक इतिहास बताया है कि लोग मुसलमानों के दुष्मन हो गये, उनके सामने जिन्ना हों या वसीम या बाबर या कोई भी, वह बाहरी आक्रमणकारी, लुटेरा, हिन्दुओं का हत्यारा, देष द्रोही है
 भारत का मुसलमान कमज़ोर नहीं है, बुज़दिल नहीं है, बस बे तरतीब है, मुसलमानों के अधिकतर नेता ‘पालिटिकली imatuare हैं, राजनीति के मैनेजर भी नहीं हैं, और ठग बिरादरी से भी हैं, जो केवल ‘‘जुमलों’’ से लोगों को भड़का कर काम चलाते हैं,

parvez

-पुराना लेख 

इस वक़्त नागरिकता कानून और NRC को लेकर देश में जनता के अंदर खौफ है, ये खौफ ऐसे ही नहीं है, हकीकत ये है कि NRC की वजह से लाखों, करोड़ों मुसलमान या तो डिटेंशन सेंटरों में भर दिए जायेंगे या फिर वो कन्वर्ट होकर हिन्दू या कोई और मज़हब अपना लेंगे, इस तरह से ‘मुस्लिम मुक्त’ भारत का अभियान अपने अंतिम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है

अब कोई राह नहीं बची है जो करोड़ों मुसलमानों के सर पर आने वाली तबाही को टाल सके, सरकार इस मसले पर समझती है कि जनता कुछ सप्ताह, महिने प्रदर्शन कर थक हार कर खामोश हो जाएगी, NRC के ज़रिये भारत को दूसरा स्पेन बनाने की तैयारी है, ये इस्राईल की शै, सलाह से शुरू होने वाला कार्यक्रम है, भारत मीडिया जनता के मुद्दों से बहुत दूर पहले ही से रहता है, आज के वक़्त भी प्राइम टाइम के शो में पाकिस्तान, इमरान खान, फ़क़ीर खान, कंगाल पाकिस्तान, तानाशाह किम के बेड रूम की रिपोर्ट, उत्तर कोरिया की दादागिरी, दुनियां को आग में झोंकना चाहता है कुख्यात तानाशाह’,, इस तरह के प्रोग्राम चल रहे हैं बाकी मोदी -शाह-संघ के मिजाज़ के मुताबिक, या विपक्ष, विरोध प्रदर्शन करने वालों को गालियां, देश द्रोही, दंगाई, आतंकवादी, पाकिस्तान एजेंट,,,हालात किधर जा रहे हैं, इसको समझना अब किसी के लिए मुश्किल नहीं है

– इन हालात में विरोध प्रदर्शन लम्बे वक़्त तक जारी रखना होंगे
– प्रदर्शन के वक़्त नारे लगाने से बचें, या प्रदर्शन की जगह पर पहुँच कर लगाएं
– जितना मुमकिन हो सके, बिना नारे के ”मौन” प्रदर्शन करें, दरख्तों की तरह कहीं भी खड़े हो जाएं, एक सन्देश लिख कर आपने हाथों में थामें रहे
– सरकार, पुलिस, एजेंसियां प्रदर्शनों को दबाने के लिए ताकात का इस्तेमाल कर रहे हैं, कई जगहों पर विरोध करने वालों के साथ पुलिस ने भयानक अत्याचार किए हैं, इन से बचने के लिए हर कार्यक्रम के समय जगह जगह लोगों को मोबाइल से वीडियो बनाने के काम पर लगा कर रखें
– प्रदर्शनों में धार्मिक नारे बिलकुल न लगाएं
– जहाँ कहीं भी विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम हो उसमे भाषणबाज़ी न हो बल्कि सिर्फ देश को बचाने की बात की जाये

  • 68 चैनल हैं मुकेश अम्बानी के, 122 में इसकी हिस्सेदारी है,,,

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