विशेष

नौक़री बंद, कॉलेज बंद, इंटेरनट बंद, कारख़ाने बंद, नेता नज़र बंद,,, काम धंधा बंद, लड़कीं-महिलायें घर में रहे बंद, जो बोले उसका भारतीय होना बंद!!

NDTV India
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जब जेएनयू में नक़ाबपोश आ सकते हैं तो वो अब कहीं भी आ सकते हैं. उनके चेहरे पर नकाब तो चढ़ा था मगर आप दर्शकों के चेहरे पर तो नकाब नहीं है. रात के अंधेरे में लाठी डंडे और लोहे के रॉड के साथ जब अपराधी नकाब ओढ़ लें तो आप अपना टॉर्च निकाल कर रखिए. अपराधी तो नहीं ढूंढ पाएंगे कम से कम रात के अंधेरे में पलंग के भीतर कहीं कोने में दुबके उस लोकतंत्र को ढूंढ पाएंगे जिसे हिंसा की इन तस्वीरों के ज़रिए ख़त्म किया जा रहा है. आपके भीतर से जेएनयू को खत्म किया जा रहा है ताकि आप नकाबपोश गुंडों को भी देश भक्त समझने लगें. पांच साल के दौरान गोदी मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए आपके भीतर एक अच्छी यूनिवर्सिटी को इस कदर खत्म कर दिया गया है कि बहुत से लोग नकाब पोश गुंडों को देखते हुए नहीं देख पा रहे हैं. कोई 90 साल पहले भी लोग इसी तरह नहीं देख पाए थे जब प्रोपेगैंडा की सनक उन पर हावी हो गई थी. वो देश कुछ और था, ये देश भारत है.

विशेष आभार संजय विघ्ने
कुछ बुर्ज गिराये जायेंगे
कुछ ताज उछाले जायेंगे
कुछ सर कटवाये जायेंगे
कुछ सूली लटकाये जायेंगे
कुछ चीखेंगे, चिल्लायेंगे
कुछ दम घुटने से मर जायेंगे
कुछ दरमियाँ में रह जायेंगे
कुछ लहरों में खो जायेंगे
ऐसा ही होता है, ऐसा ही होगा
कुछ बच जायेंगे, पार कर जायेंगे
जो बच जायेंगे, फिर आग लगाएंगे
ऐसा ही होता है, ऐसा ही होगा
फिर बिगुल बजाये जायेंगे
सोये हुए भड़काये जायेंगे
फिर गरजेंगे, धर्म संकट में है बताएँगे
लोग मरते हैं ऐसे ही और मर जायेंगे
ऐसा ही होता है, ऐसा ही होगा…..
आदमी का जीवन
धरती का आकार
सभ्यताओं की श्रेष्ठता
नस्लवाद की पवित्रता
दरिद्र की दरिद्रता
ग़रीब की भूख
निर्बल की उम्मीद
आँखों की नींद
रेत की प्यास
शबनम की आग
चिलम का धुंआ
बादल की गरज
बिजली की चमक
हर आदमी का जीवन…..ऐसा ही होता है, ऐसा ही होगा…..parvez

बेबाक पत्रकार
@VoiceofmyBharat
यह बहुत भयानक है. मैं हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई हो सकता हूं. मैं बीजेपी, कांग्रेस या दूसरे राजनैतिक दलों से हो सकता हूं. लेकिन मेरा कोई अधिकार नहीं है कि मैं शिक्षा के मंदिर में जाऊं और वहां के छात्रों को पीटूं. मास्क पहनकर आते हो और अपने आपको मर्द कहते हो : सुनील शेट्टी, अभिनेता

Hansraj Meena
@ihansraj
नौकरी बंद। कॉलेज बंद। इंटेरनट बंद। कारखाने बंद। नेता नज़र बंद। काम धंधा बंद। फैक्टरियां बंद। खेती बाड़ी बंद। धरना-प्रदर्शन बंद। विश्वविद्यालय बंद। लड़कीं और महिलायें घर में रहे बंद। जो बोले उसका भारतीय होना बंद। इन सबके विरोध में आज भारत बंद का समर्थन करते हैं। #BharatBandh2020

Hansraj Meena
@ihansraj
राष्ट्रवाद की लड़ाई को संकीर्ण न बनायें।
@deepikapadukone
की छपाक अवश्य देखें। क्योंकि यह फ़िल्म मानवीय क्रूरता के कारण जीवन संघर्ष, स्वाबलंबन और जिजीविषा की सत्य घटना है। लखनऊ के शीरोज उनके संघर्ष और जिंदादिली की गाथा गाता हैं। भक्तों को ऐसे विरोध से बचना चाहिए। #ISupportDeepika

Amiti Pande
@Amiti14
Boycotting someone or their movie because the stand they take is beyond your understanding or contrary to it, is indeed a shame in a country where pluralism lies at the core of it’s being. Petty, intolerant and rotting minds are just revealing themselves. #IStandwithDeepika

SHILPI SINGH
@ShilpiSinghINC
तुम भक्त लोग छपाक का विरोध कर रहे है इसका भी अंजाम पता ही होगा,
असल मे तुम्हारे विरोध या समर्थन से
कुछ फर्क नही पड़ेगा!
तुम्हारी हैसियत ही नही है फ़िल्म देखने की अगर होती ना तो तुमाए पप्पा की बॉयोपिक सुपर फ्लॉप नही होती!
समझे भक्तों?

#ChhapakDekhoTapaakSe

Nенr_wно™
@Nehr_who
The morning News statrs with

– GDP fell to 5%
– Rupee fell below 72
– Petrol price hiked again
– Stock market down
– Onion Price soars again
– Traded Union on Strike
– Protest across the Nation
– Students getting beaten

Meanwhile Modiji: Sab Changa Si

Satyendra PS
जेएनयू के आजादी आजादी वाले नारे की थीम बेहद अच्छी है। लेकिन जमीनी स्तर पर देखें तो पब्लिक उसे समझ नहीं पाई और उसे खारिज कर दिया।
क्या इस तरह के नारे को रिकॉल नहीं किया जा सकता? अगर उससे जनता में नकारात्मक संदेश जा रहा है तो उसे धीरे धीरे करके छोड़ दें। दूसरा कोई नारा ढूंढें। क्या मतलब है उस नारे को ढोने का?
पब्लिक अगर चूतिया है तो आप कहीं से पब्लिक आयात नहीं कर सकते। देश, राष्ट्र, भौगोलिक क्षेत्र, संविधान, स्वतन्त्रता की समझ अगर पब्लिक को नहीं है तो आजादी वह क्या समझेगी? भेंड़ को भेंड़ की तरह ही हांका जाए। समाजवाद बबुआ धीरे धीरे आई।

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