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IMF, मूडीज़, फ़िंच ने जीडीपी अनुमान पहले ही घटा दिया था, भारत का इकॉनॉमी ग्रोथ 11 साल में सबसे कम रहेगा : रिपोर्ट

Milind Khandekar
@milindkhandekar

क्या कहा था और क्या हो गया

2014: अच्छे दिन आने वाले है

2020: इकॉनॉमी ग्रोथ 11 साल में सबसे कम

भारत सरकार ने आज आँकड़े जारी किए है कि 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ 5% रहेगी. 2018-19 में 6.8% थी

सार
बजट से पहले केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 की विकास दर का पहला अनुमान जारी कर दिया है।

विस्तार
इसके मुताबिक चालू वित्त वर्ष में जीडीपी पांच फीसदी रहेगी, जो पिछले एक दशक में सबसे कम है। सरकार बजट के बाद फरवरी महीने में वित्त वर्ष का दूसरा अनुमान जारी करेगी।

ANI

@ANI
Government of India: The growth in real GDP during 2019-20 is estimated at 5.0 per cent as compared to the growth rate of 6.8 per cent in 2018-19.

2018-19 में थी 6.8 फीसदी
2018-19 में विकास दर 6.8 फीसदी रही थी। इस हिसाब से देखा जाए तो फिर इसमें करीब 1.8 फीसदी की गिरावट है। विश्व की सभी रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी भारत के जीडीपी अनुमान को काफी घटा दिया है। मूडीज ने मार्च 2020 में समाप्त हो रहे वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुमान 5.8 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया है। फिच ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विकास दर के 4.6 फीसदी रहने की संभावना जताई है। वहीं 2020-21 के लिए 5.6 फीसदी और 2021-22 के लिए 6.5 फीसदी का अनुमान जताया है।

‘इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने वित्त वर्ष 20 के लिए अपने विकास अनुमान को संशोधित करके 5.6 फीसदी कर दिय है। यह उसके द्वारा चौथा संशोधन है और एक महीने पहले ही वित्त वर्ष 20 के लिए जीडीपी अनुमान घटाकर 6.1 फीसदी किया गया था।’

एजेंसी ने कहा, ‘ऐसा करना जरूरी हो गया था, क्योंकि डाटा से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में 5 फीसदी से ज्यादा का पिछला अनुमान हासिल होने की उम्मीद कम ही है। नए अनुमान से संकेत मिलते हैं कि वित्त वर्ष 20 की दूसरी तिमाही में विकास दर 4.7 फीसदी रह सकती है।’ दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े शुक्रवार को जारी होने का अनुमान है।

जुलाई-सितंबर, 2019 की तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर घटकर महज 4.5 फीसदी रह गई, जो लगभग साढ़े छह साल का निचला स्तर है। यह लगातार छठी तिमाही है जब जीडीपी में सुस्ती दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी-मार्च, 2013 तिमाही में जीडीपी विकास दर 4.3 फीसदी रही थी, वहीं एक साल पहले की समान अवधि यानी जुलाई-सितंबर, 2018 तिमाही में यह सात फीसदी रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी।

आरबीआई ने भी घटाया था जीडीपी का अनुमान
इससे पहले पांच दिसंबर 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी जीडीपी का अनुमान घटाया था। केंद्रीय बैंक के अनुसार, साल 2019-20 के दौरान जीडीपी में और गिरावट आएगी और यह 6.1 फीसदी से गिरकर पांच फीसदी पर आ सकती है। इससे अर्थव्यवस्था को झटका लगा है।

Congress
@INCIndia

जैसा कि आर्थिक संकट के बीच जीडीपी 6 साल के निचले स्तर पर है, विदेशी निवेशक अपने शेयरों को बेच रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में विश्वास गिर रहा है और निवेशक भारतीय बाजार से दूर भाग रहे हैं।

ANI_HindiNews
@AHindinews

भारत सरकार: 2018-19 में 6.8 प्रतिशत की विकास दर की तुलना में 2019-20 के दौरान वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 5.0 प्रतिशत अनुमानित है।

Live Jharkhand Breaking
@jharkhand_live

कुछ ही दिनों में आएगा मोदी सरकार का चुनौतीपूर्ण बजट, वित्त मंत्री की होगी कठिन परीक्षा.

वित्त वर्ष 2020-21 का बजट ऐसे समय में पेश होगा जब मोदी सरकार इकोनॉमी के मोर्चे पर कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है. जीडीपी ग्रोथ छह साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है.


KALPESH RAVAL 6.3K
@kalpeshravals
ना नोटबंदी होती
ना जीएसटी आता
ना CAA, NRC लाते
तो ना महेन्गाइ इतनी बढ़ी होती,
ना इतने लोगोकी जान जाती,
ना व्यापारियोका व्यापार चौपट होता,
ना ग्रुहीणीओका बजेट बिगड़ता,
ना जीडीपी इतनी नीचे आती,
ना जनता सरकारके विरोधमें रास्ते पर होती,
ना शिक्षा महेन्गि होती.
तो सब ठीक होता

Manoj Yadav
@rowdymannu
जनता की समस्या:
गरीबी/भुखमरी
रेप/हत्या
बेरोज़गारी
महंगाई/विकास दर
बिजली,सड़क,शिक्षा
मंदी/जीडीपी
आर्थिक संकट

सरकार का समाधान
हिन्दू-मुस्लिम
नोटबन्दी,GST
एयर स्ट्राइक
पकौड़े योजना,बालाकोट
धारा 370,राम मंदिर
पाकिस्तान,पुलवामा
नागरिकता बिल


Indian economy expected to grow at 11-year low of 5% in 2019-20

National Statistical Office predicts growth to be 1.8 percentage points lower than the actual 2018-19 mark of 6.8%, led by a fall in investment and consumption.

New Delhi: The Indian economy is expected to grow at an 11-year low of 5 per cent in 2019-20, the National Statistical Office (NSO) said Tuesday, indicating the major economic challenge confronting the Narendra Modi government in its second term.

The economy had grown at 6.8 per cent in 2018-19.

Finance Minister Nirmala Sitharaman’s Union Budget, due to be presented next month, is expected to focus on measures to address the third consecutive year of slowdown, led by a fall in investment and consumption.

Manufacturing, agriculture to grow
Data released by the NSO showed that while manufacturing is expected to grow by 2 per cent, agriculture is expected to grow at 2.8 per cent and electricity, gas and water supply at 5.4 per cent. Gross fixed capital formation — a key measure of investment demand in the economy — is estimated to grow at 1 per cent.

Reflecting the slump in consumption, private final consumption expenditure is estimated to grow at 5.7 per cent as against 8 per cent in 2018-19. Government final consumption expenditure, meanwhile, is estimated to grow at 10.5 per cent as against 9.2 per cent in the previous year — an indication that government spending has helped prop up the economy.

The Reserve Bank of India, in its December monetary policy review, had lowered India’s growth forecast to 5 per cent for the full year, as against its initial forecast of 7.4 per cent for the full year.

This followed a lower-than-anticipated GDP growth in the first two quarters of 2019-20. The Indian economy grew at 5 per cent in the quarter ended June, and at 4.5 per cent in the quarter ended September.

But more worryingly for Sitharaman, the nominal GDP growth — or growth in the economy including the price effect — is estimated at 7.5 per cent to Rs 204 lakh crore. Nominal growth numbers form the basis for estimating tax collections and the fiscal deficit as a percentage of GDP. The 2019-20 budget had estimated India’s nominal GDP at Rs 211 lakh crore, a growth of 12 per cent over the estimated Rs 188 lakh crore in 2018-19.

This means that even without taking into account the fiscal slippage on account of a slowdown in tax collections and a shortfall in disinvestment receipts, India’s fiscal deficit as a percentage of the GDP is expected to be higher than the 3.3 per cent estimated in the budget.

Ratings agencies’ response
Care Ratings, in a note, pointed out that according to the revised base of nominal GDP, the fiscal deficit as a percentage of GDP should come in at 3.44 per cent. Adding the shortfall expected in tax collections, the fiscal deficit could be in the range of 3.92 per cent to 4.13 per cent in 2019-20, it said.

It added that the investment rate is at its lowest since since 2001-02. The share of gross fixed capital formation as a percentage of the GDP has fallen to 28.1 per cent from 29.3 per cent the previous year.

“There is a notable decline in the growth of gross fixed capital formation… which is reflective of subdued investment activity in the economy,” it said.

Aditi Nayar, principal economist at rating agency ICRA, said the various economic indicators point to an improvement in growth in the second half of the fiscal.

“Moreover, the YoY rise in rabi sowing amid healthy groundwater and reservoir levels, bodes well for agricultural growth and rural sentiment, particularly in the ongoing quarter. However, the momentum of spending by the central government dipped in October-November 2019, and we are apprehensive that revenue concerns may necessitate an expenditure squeeze by the central and state governments in the ongoing quarter, which has emerged as a key risk to the pace of economic growth,” Nayar said.

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