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Thank U @NitishKumar : जिन EU सांसदों को मोदी ने कश्मीर बुलाया था वो यूरोपीय संसद में कश्मीर, #CAA NRC पर चर्चा करवा रहे हैं!

जनता दल-यूनाइटेड ने उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और वरिष्ठ नेता पवन वर्मा को पार्टी से निकाल दिया है.

पिछले कई दिनों से दोनों नेता नागरिकता संशोधन क़ानून पर पार्टी के रुख़ की आलोचना कर रहे थे. साथ ही नीतीश कुमार पर भी सवाल उठाए जा रहे थे.

प्रशांत किशोर ने पार्टी से निकाले जाने पर नीतीश कुमार का धन्यवाद किया.

Thank you @NitishKumar. My best wishes to you to retain the chair of Chief Minister of Bihar. God bless you.????????

— Prashant Kishor (@PrashantKishor) 29 जनवरी 2020

एक दिन पहले ही नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं की बैठक के बाद ये संकेत दे दिए थे. उन्होंने कहा था कि जिसको पार्टी में रहना है, रहे और जिसको जाना है, जाए.

नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में यहाँ तक कह दिया था कि उन्होंने अमित शाह के कहने पर प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल किया था.

.@NitishKumar what a fall for you to lie about how and why you made me join JDU!! Poor attempt on your part to try and make my colour same as yours!

And if you are telling the truth who would believe that you still have courage not to listen to someone recommended by @AmitShah?

— Prashant Kishor (@PrashantKishor) 28 जनवरी 2020

इस पर प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के फ़ैसले पर सवाल किए. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नीतीश कुमार झूठ बोल रहे हैं.

जिसके जवाब में प्रशांत किशोर ने एक बार फिर नीतीश कुमार पर सवाल उठाए थे. जबकि पवन वर्मा ने भी नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी.

पार्टी महासचिव केसी त्यागी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निकाला जा रहा है.

प्रशांत किशोर और पवन वर्मा एनडीए के ऐसे नेता थे, जिन्होंने सीएए पर खुलकर सरकार की आलोचना की और अपनी पार्टी के रुख़ को भी ग़लत कहा.

चुनावी रणनीतिकार के रूप में चर्चित प्रशांत किशोर की कंपनी इस समय दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का सहयोग कर रही है.

भारतीय विदेश सेवा से इस्तीफ़ा देकर पवन वर्मा जनता दल-यूनाइटेड में शामिल हुए थे. बाद में वे पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद भी रहे.

जबकि 2015 के विधानसभा चुनाव के समय प्रशांत किशोर चुनावी रणनीतिकार के रूप में नीतीश कुमार से जुड़े. उस समय जनता दल-यू राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही थी.

जबकि भारतीय जनता पार्टी अलग चुनाव लड़ रही थी. 2015 के चुनाव में महागठबंधन को जीत मिली और प्रशांत किशोर का क़द भी बढ़ा.

लेकिन 2017 में नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग हो गए और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई.

माना जाता है कि प्रशांत किशोर इससे ख़ुश नहीं थे. लेकिन अगले ही साल यानी 2018 में नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया और उपाध्यक्ष का पद भी दिया.

जिन ईयू सांसदों को कश्मीर बुलाया, वही करवा रहे हैं संसद में कश्मीर और CAA पर चर्चा

यूरोपीय यूनियन की संसद में भारत के नागरिकता संशोधन क़ानून और जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर कुल 6 प्रस्तावों पर यूनियन और भारत के बीच कूटनीतिक पेंच फंसा हुआ है.

ये प्रस्ताव बुधवार को संसद के पटल पर रखे जा रहे हैं जिन पर 30 जनवरी को मत डाले जाएंगे.

हालांकि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है ना ही इस पर कोई ब्रीफिंग ही की है.

मगर सरकार की तरफ से विदेश मंत्री की बजाय क़ानून मंत्री का बयान आया है जिसमें उन्होंने इस तरह के प्रस्तावों को ‘वाम गठजोड़’ वाले संगठनों की साज़िश क़रार दिया है.

लोक सभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने भी यूरोपीय यूनियन की संसद के अध्यक्ष डेविड ससोली को पत्र लिख कर भारत की आलोचना करने वाले ‘प्रस्तावों पर पुनर्विचार’ करने को कहा है.

अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि ‘एक विधायिका द्वारा दूसरी विधायिका’ के फैसलों पर इस तरह का प्रस्ताव लाना ‘एक अस्वस्थ परंपरा’ की शुरुआत होगी.

भारत के क़ानून मंत्री का कहना है कि नागरिकता संशोधन क़ानून का भारत की संसद से पारित होना ‘भारत का आंतरिक मामला है जो जनतांत्रिक प्रक्रिया’ के तहत ही किया गया है.

751 सदस्यों वाली यूरोपीय संसद में जो प्रस्ताव लाये गए हैं उनमें नागरिकता संशोधन क़ानून और जम्मू कश्मीर से धारा 370 के हटाए जाने के अलावा नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजंस यानी ‘एनआरसी’ भी शामिल है.

प्रस्ताव लाने वाले गुटों में मध्य-दक्षिणपंथी संगठन – यूरोपियन पीपल्स पार्टी (क्रिस्चियन डेमोक्रेट्स) और मध्य मार्गी संगठन – ‘प्रोग्रेसिव अलायन्स ऑफ़ सोशलिस्ट्स एंड डेमोक्रेट्स’ यानी ‘एसएंडडी’ शामिल है. जबकि वाम संगठनों का मोर्चा – यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट नार्डिक ग्रीन लेफ्ट यानी ‘जीयूई/ एनजीएल’ के सांसद भी इसमें शामिल हैं.

इन 6 प्रस्तावों पर कुल 626 सांसदों के हस्ताक्षर हैं जिनमें सात ऐसे सांसद भी शामिल हैं जिन्हें पिछले साल अक्टूबर में भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर का दौरा कराया था.

राजनयिक हलकों में इसी बात पर चर्चा हो रही है कि जब सरकार ने यूरोपीय यूनियन के सांसदों को आमंत्रित कर जम्मू कश्मीर का दौरा करवाया तो फिर यूरोपीय संसद में इस तरह का प्रस्ताव आना कहीं भारत की कूटनीतिक चूक तो नहीं ?

हालांकि यूरोपीय यूनियन या यूरोपीय संघ ने इन प्रस्तावों से ख़ुद को अलग कर लिया है. संघ के विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि उनकी संसद के अंदर जो चल रहा है उसका मतलब ये नहीं है कि वो यूरोपीय यूनियन का भी विचार हो. उन्होंने इसे संसदीय प्रक्रिया बताया है.

लेकिन यूरोपीय संसद में लेबर पार्टी के नेता और सांसद रिचर्ड ग्रेहम कॉर्बेट ने बीबीसी हिंदी को मेल के ज़रिये भेजे बयान में कहा : ”यह सबसे गंभीर बात इसलिए भी है कि यूरोपीय संसद में भारत द्वारा लाए गए नागरिकता क़ानून पर चर्चा हो रही है. भारत के मित्र आशा कर रहे हैं कि मोदी सरकार इस क़ानून पर अपना रुख़ बदलेगी.”

ओम बिरला का कहना है कि इस क़ानून को लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी गयी सरकार ने भारत की संसद के दोनों सदनों से पारित कराया है.

लेकिन इन प्रस्तावों को लाने में अहम भूमिका निभाने वाली ‘जीयूई/ एनजीएल’ की सांसद इडोइया विल्लनुएवा ने बीबीसी को मेल पर भेजे रिकार्ड किये गए बयान में कहा कि पूरे विश्व में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के हनन के मामले बढ़ रहे हैं. वो कहती हैं कि विश्व के विभिन्न देशों में दमन की घटनाएं देखने को मिल रहीं हैं.

उनका कहना था,”इस सम्बन्ध में हम ये सोच रहे हैं कि यूरोपीय यूनियन की क्या भूमिका होनी चाहिए ? हमें लगता है कि यूरोपीय यूनियन को देशों की स्वायत्तता को सम्मान देने के साथ साथ ये भी सुनिश्चित करना होगा कि लोगों के अधिकारों के मुद्दे गौण ना हो जाएँ.”

यूरोपीय यूनियन की संसद में लाये जा रहे प्रस्तावों के बारे में वो कहती हैं : ”मोदी के सत्ता में आने और हिन्दू कट्टर राष्ट्रवाद का उभरना चिंताजनक है. इसमें दो चीज़ें देखने को मिलीं

– जम्मू कश्मीर में संचार साधनों का बंद होना और नए नागरिकता क़ानून का आना. ये भारत की समरसता और विभिन्नता पर सीधा हमला है. यूरोपीय यूनियन भारत के साथ सामरिक समझौतों की तरफ देख रहा है मगर हम मानवाधिकारों की स्थिति को अनदेखा नहीं कर सकते.”

लेकिन ताज़ा जानकारी के अनुसार 66 सदस्यों वाले यूरोपियन कंज़र्वेटिव्ज़ एंड रेफारमिस्ट्स यानी ‘ईसीआर’ ने इन प्रस्तावों से ख़ुद को पीछे कर लिया है. 751 की संख्या वाले यूरोपीय यूनियन की संसद में भारत के ख़िलाफ़ प्रस्ताव लाने वाले सदस्यों की संख्या अब सिर्फ़ 560 रह गयी है. अभी ये भी कहना मुश्किल है कि क्या और भी सांसद प्रस्तावों से किनारा कर लेंगे.

क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने तौर पर यूरोपीय यूनियन और उसके के सांसदों से संपर्क में हैं. वहीं ब्रसेल्स में मौजूद भारत की राजदूत गायत्री इस्सार कुमार प्रस्ताव लाने वाले सांसदों के संमूहों से अलग अलग चर्चा कर रही हैं.

भारत की तरफ़ से कोशिश की जा रही है ताकि इन प्रस्तावों पर मतदान को टाला जा सके.

लेकिन कुछ राजनयिक मानते हैं कि यूरोपीय यूनियन के सांसद पकिस्तान द्वारा भारत के ख़िलाफ़ फैलाये जा रहे दुष्प्रचार का शिकार हुए हैं और इससे रंज़िशें ही बढ़ेंगी.

पूर्व राजनयिक राजीव डोगरा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा : ”ये स्पष्ट है कि यूरोपीय यूनियन के सांसद दुष्प्रचार का शिकार हुए हैं. ऐसा नहीं है की फ़्रांस या इटली में अवैध रूप से रहने वालों को ना निकाला जाता हो या फिर इंग्लैंड में अवैध रूप से रह रहे लोगों को जेल ना भेजा गया हो. ये जो सांसद सिर्फ़ भारत को अलग थलग कर रहे हैं ये सिर्फ पाकिस्तान के बहकावे पर कर रहे हैं.”

इससे पहले मलेशिया ने भी भारत के नागरिकता क़ानून को लेकर टिप्पणी की थी जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार पर असर भी पड़ा जिससे मलेशिया को नुकसान का सामना करना पढ़ रहा है.

राजनयिकों का कहना है कि इस तरह के प्रस्तावों का यूरोपीय देशों और भारत के बीच कैसा असर होगा ये कहना अभी जल्द बाज़ी होगी लेकिन मार्च महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रसेल्स जाना है. उससे पहले इस तरह के प्रस्तावों से राजनयिक संबंधों पर असर पढ़ना लाज़मी भी है.

सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता

CAA पर यूरोपीय संघ की संसद में आज होगी बहस: पाँच बड़ी ख़बरें

यूरोपीय संघ की संसद आज नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर बहस करेगी. इसके बाद गुरुवार को इसपर वोटिंग होगी.

यूरोपीय संसद के कुल 751 सदस्यों में से क़रीब 626 सदस्यों ने नागरिकता संशोधन क़ानून और जम्मू कश्मीर के मसले पर विचार करने के लिए छह प्रस्ताव सदस्यों के सामने रखे थे.

भारत ने इन प्रस्तावों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने यूरोपीय संघ से कहा है कि ‘ये हमारा आंतरिक मामला है’.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इन प्रस्तावों की निंदा की है और कहा है, “इंटर पार्लियामेन्टरी यूनियन के सदस्य होने के नाते हमें क़ानून बनाने की गणतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए.”

माना जा रहा है कि इसी साल मार्च में होने वाले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रसेल्स दौरे से पहले पेश किया गया ये प्रस्ताव यूरोपीय संघ के देशों के साथ भारत के संबंधों पर असर डाल सकता है.

कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 125 हुई
चीन में कोरोना वायरस की वजह से मरने वालों की संख्या 125 हो चुकी है. इसके साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण के 840 नए मामले सामने आए हैं.

चीनी विशेषज्ञों के मुताबिक़ अगले 10 दिनों में यह समस्या अपने चरम पर पहुँच सकती है.

फ़्रांस, जापान, भारत और अमरीका जैसे देशों ने वुहान में फंसे अपने नागरिकों को वहाँ से निकालने के प्रयास शुरू कर दिये हैं.

जापान का एक विमान लगभग 200 जापानी नागरिकों को लेकर वापस अपने देश लौट चुका है.

वहीं अमरीका की ओर से चीन पहुँची एक चार्टर्ड फ़्लाइट भी अमरीका के लिए उड़ान भर चुकी है.

महाराष्ट्र: नासिक में सड़क दुर्घटना में 20 की मौत
महाराष्ट्र के नासिक शहर में एक बस और रिक्शा की टक्कर होने से 20 लोगों की मौत हो चुकी है.

इस हादसे में 30 लोगों को ज़िंदा बचा लिया गया है.

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा है कि इस हादसे में मरने वालों के परिवारों को दस लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा. इसके साथ ही घायलों का इलाज़ मुफ़्त में करवाया जाएगा.

Syed Tashhirul Islam

” एक इन्च भी पीछे नहीं हटूंगा “
एक इंच पीछे नहीं हटने का कारण ये तस्वीर बयां करती है । हिन्दू मुस्लिम की दीवार खड़ी करने के चक्कर में वो कुछ इसी तरह फस गए हैं ।

P. भारद्वाज
@Parvesh04945153
हाउडी बाबा
बिन डिग्री धारी बड़बोलो की विदेश कूटनीति की जिन्हे कश्मीर मे किए जाहिलपन पर वाह वाही के लिए किराये पर बुलाया वो ही आज CAA कश्मीर पर लानत भेज पिछवाड़ा बजायेंगे
जिन ईयू सांसदों को कश्मीर बुलाया वही करवा रहे हैं संसद में कश्मीर और CAA पर चर्चा

Swami Dipankar
@swamidipankar
आंदोलन करो,आवाज़ उठाओ, ये तुम्हारा हक़ भी है, और फ़र्ज़ भी, मगर ये बताओ परेशानी किससे है, सरकार से, या देश से,सरकार से है तो देश को आग क्यों लगा रहे हो… ????

“आख़िर ये दोगलापन हम कब तक सहेंगे “

Jyoti Yadav
@jyotiyadaav
आप शाहीनबाग के साथ हैं या भारत मां के बेटों के साथ?

भाई साहब, भारत मां शाहीनबाग में ही बैठी हैं. पूत कपूत हो जाए, माता कुमाता नहीं होगी, उसे रास्ते पर लाएगी. चाहे रास्ता जाम करे या पूत के कान खींचे या कपड़ों से पहचान ले बेटे को.

Wasim Akram Tyagi
@akramtyagi
दिल्ली चुनाव के मद्देनज़र भाजपा नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई है। इस बौखलाहट में सत्ताधारी भाजपा के नेता पद की गरिमा को ताक पर रखकर लगातार अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, हालांकि भाजपा की संस्कृति ही ऐसी है। ऐसे में यह वीडियो भाजपा को संजीवनी दे सकती है।

 

डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. लेख सोशल मीडिया पर वायरल है, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

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