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कोई शाहीन बाग़ की फ़ंडिंग पर सवाल करे तो बताना एक सिख भाई ने अपना फ़्लैट तक बेच दिया है, ये सिर्फ़ मुस्लिमों का धरना नहीं है!

‎Mohammad Parvez‎
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#शाहीन_बाग: सभी धर्म के लोगों ने की प्रार्थना, हिंदू संत बोले- ये सिर्फ मुस्लिमों का धरना नहीं…!!!!

दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच सभी धर्म के लोगों ने पूजा-पाठ और प्रार्थना की. हिंदू धर्म के संत युवराज ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए हम लोग ये कार्यक्रम कर रहे हैं.

दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बीते 54 दिनों से प्रदर्शन जारी है. इस बीच 6 जनवरी को वहां एक अलग ही नजारा देखने को मिला. यहां सभी संप्रदाय के लोगों ने अपने-अपने धर्म के मुताबिक पूजा-पाठ और प्रार्थना की. इसमें सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के लोगों ने हिस्सा लिया.

इस कार्यक्रम का मकसद हाल में देश में फैले डर और हिंसा के माहौल को खत्म कर एकजुटता का संदेश देना था. प्रदर्शन में शामिल हुए लोगों ने कहा कि देश को बांटने की कोशिश करने वालों के खिलाफ हम सभी एक साथ खड़े हैं.

कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम धर्म के सुल्तान, सरदार की पोशाक में नजर आए. इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कपड़ों से पहचानने की बात करते हैं, तो मैं उनको ये बताना चाहता हूं कि मुझे पहचानें कि मैं किस धर्म से हूं. उन्होंने कहा कि हमारे देश को बांटने की कोशिश ना करें, हम सब एक हैं और एक साथ रहेंगे.

ईसाई धर्म के अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने कहा, ‘इस आयोजन का किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. सरकार द्वारा लाया गया नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) मुस्लिम समाज के लोगों के खिलाफ है.’

Satyendra PS
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अमेरिका की एक कम्पनी है मिंत्रा। पत्नी जी बता रही हैं कि कपड़ा कॉस्मेटिक बेचती है। मेरे मोबाइल पर अलर्ट आता रहता था कम्पनी का। आज उसका राज पता चला कि उससे खरीदारी करने में मेरा मोबाइल नम्बर दे दिया गया था।

बहरहाल यह भी सूचना मिली कि लम्बे समय से उससे खरीदारी नहीं हुई है। बच्चों की फीस देने और आलू प्याज खरीदने में ही तबाही मची हो तो कोई मिंत्रा से क्या खाक खरीदेगा!

यह सब राष्ट्रद्रोही बाते हैं।

असल मामला यह है जी कि कम्पनी के गुड़गांव ऑफिस में 3000 लोग काम करते हैं। कम्पनी ने 80 लोगों को निकाल दिया। कम्पनी ने निकाले गए सहकर्मियों के प्रति पूरी सहानुभूति दिखाते हुए लिखा है कि उसे बहुत मजबूरी में ऐसा करना पड़ रहा है। हाल के आर्थिक बदलाव को देखते हुए कम्पनी को बचाने के लिए यह जरूरी था।
बजट के बाद यह पहली खबर राष्ट्रहित में दिखी। जो निकाले गए हैं, वो पता नहीं राष्ट्रविरोधी हैं या राष्ट्रप्रेमी।


जान अब्दुल्लाह
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आप पूछते हैं शाहीनबाग की फंडिंग कहाँ से आ रही है. कौन बिरयानी खिला रहा है, कौन पानी के पैसे दे रहा है. पहले इस आदमी को देखिए. इनका नाम D.S. बिंद्रा है..

ज़ूम करिए, इनके चेहरे को पढ़िए. एक सब्र जैसा कुछ तो दिख होगा!..अब ठहरिए, पता है आपको! इस इंसान ने शाहीनबाग के लिए चलने वाले लंगर के लिए अपना फ्लैट बेच दिया है. ताकि उस पैसे से लंगर चालू रख सके, जहां दोनों मजहबों के आदमी-औरतों के पेट तक रोटी-चावल पहुंच सकें.

बीस दिन पहले सिख भाई पंजाब से शाहीनबाग पहुंचें, अब तक 17 बसें शाहीनबाग में डेरा जमाए हुए हैं. एक खास जगह पर तो मुसलमानों से ज्यादा सिख दिखाई दे रहे हैं. बीस दिन पहले एक लंगर शुरू हुआ. करीब 50 हजार से अधिक लोगों का भोजन इंतजाम वहां होता था. सिख धर्म में परम्परा में है एकबार जो लंगर शुरू हुआ तो खत्म नहीं होता, रुकता नहीं है, उसकी कीमत चाहे जो हो. धीरे धीरे सब पैसे बीत गए, लंगर चलाने के लिए पैसों की जरूरत हुई, इस आदमी के पास 3 फ्लैट थे. तुरंत ही बिना ज्यादा सोचे बिचारे अपना एक फ्लैट बेच दिया. घर वालों ने शुरू में विरोध किया. लेकिन अब सब साथ आ गए हैं, बेटा कह रहा है पापा प्राउड ऑफ यु, आपने वो काम किया है जिसपर गर्व हो रहा है. आज बीबी साथ है, भाई-बेटा साथ हैं.

ये आदमी कह रहा है यदि जरूरत पड़ी तो बाकी दो फ्लैट भी बेच दूंगा, लेकिन लंगर नहीं रुकेगा. इस कहानी को जानने के बाद भामाशाह की याद आ रही है, जिन्होंने अपने पूरे जीवन की संपत्ति महाराणा प्रताप को सौंप दी थी, ताकि महाराणा वतन की रक्षा कर सकें, ताकि सम्मान की लड़ाई रुकने न पाए, स्वशासन की लड़ाई रुकने न पाए… यहां भी स्वाभिमान, संविधान और वतन की लड़ाई इस मुल्क की औरतें लड़ रही हैं. जिसे रुकने न देने की जिम्मेदारी कुछ लोगों ने अपने कंधों पर ले रखी है.

इसी मुल्क में कितने गुरुओं, बाबाओं के भंडारे चलते हैं, स्कूल, अस्पताल चलते हैं. कोई प्रश्न नहीं करता पैसे कहाँ से आते हैं. कोई प्रश्न नहीं पूछता कि आरएसएस द्वारा देशभर में महीनों चलने वाले ट्रेनिंग कैम्पों के लिए पैसे कहां से आते हैं? लेकिन जब भी मजदूर या किसान दिल्ली की सड़कों पर आते हैं, पत्रकार उनसे टोपी-पानी, झंडों के पैसे पूछने लगते हैं. ताकि लोगों को इनपर एक डाउट सा क्रिएट हो, ताकि लड़ाई जनसमर्थन थोड़ा कमजोर हो, इन पत्रकारों के सवाल नेताओं, मंत्रियों की होने वाली रैलियों से नहीं होते, लेकिन मजदूर, किसानों, आंदोलनकारियों से होते हैं.

लेकिन इन्हें खबर नहीं, आज भी भामाशाह जिंदा हैं, आज भी गुरुगोविंद जिंदा हैं। ये औरतें महाराणा की तरह ही लड़ने वाली वीर यौद्धाएं हैं, इनके स्वाभिमान को खरीद सकें इतनी औकात इस देश के प्रधानमंत्री या गृहमंत्री में नहीं है…

यदि अगली बार कोई आपसे शाहीनबाग की फंडिंग पर सवाल करे तो बताना एक सिख भाई ने अपना फ्लैट तक बेच दिया है, ऐसे ही अनगिनत ईमान रखने लोग शाहीनबाग के लिए खड़े हुए हैं. जो जितना सक्षम है उतनी मदद के लिए आगे बढ़ा हुआ है, कोई घी दे जा रहा है, कोई चावल, कोई गेहूं…. कोई गैस सिलेंडर.

कुछ तो बात है न है इस मुल्क में कि हस्ती मिटती नहीं हमारी…

(सिख कौम अपने किए की गाती नहीं है, लंगर के लिए फ्लैट बेचने वाली बात सरदार जी के मुंह से बातचीत में अनायास ही निकल गई थी,.)

~. Shyam Meera singh

मुगलों के राज में ठाकुरों-ब्राह्मणों को कौन सी दिक्कत थी? अकबर के नवरत्नों में तानसेन और राजा बीरबल ब्राह्मण और राजा टोडरमल और राजा मानसिंह ठाकुर थे. पूरे राजपूताने में मुगलों के बनाए जमींदार ही राजा हुआ करते थे.

जजिया भी हर जाति के लोग नहीं देते थे.

मुगलों ने कभी हिंदू समाज व्यवस्था को नहीं छेड़ा. मुगलों के खिलाफ कभी बगावत नहीं हुई. Tejasvi Surya

मुगलों के खिलाफ अकेली बगावत किसान राजा शिवाजी महाराज और उनके पुत्र संभाजी राजे ने की. उनके विरोध का आधार धर्म नहीं था. सभी धर्मों के लोग शिवाजी राजे की सेना में थे.

हिंदू जाति और समाज व्यवस्था को अंग्रेजों ने छेड़ा. सती प्रथा बंद करा दी. विधवा विवाह को मान्यता दे दी. सभी जातियों के लिए स्कूल खोल दिए. फौज में महारों और दलितों को रख लिया.

अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह हो गया. ऐसा विद्रोह मुगलों के खिलाफ कभी नहीं हुआ.

मुगल कभी गांव में घुसे ही नहीं. वहां जो चल रहा था, उसे उन्होंने चलने दिया.

बाबरनामा में बाबर अपने बेटे हुमायूं को बताता है कि – भारत के रीति-रिवाजों में हमें नहीं पड़ना है. इनको अपने ढंग से जीने दो. ये हमें राज करने देंगे.

दिलीप मंडल

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