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क्या है बैतुलमुक़द्दस या यरुश्लम का इतिहास, इस नगर के लिए 5000 साल से हो रही है लड़ाई …!

मरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की ओर से पेश की जाने वाली सेंचुरी डील आज का पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। अमरीका के व्यापारी राष्ट्रपति ट्रम्प, अपनी अन्यायपूर्ण योजना के बल पर दशकों से चले आ रहे फिलिस्तीनी मुद्दे के समाधान का प्रयास कर रहे हैं।

इस सेंचुरी डील में, यरुश्लम या बैतुल मुक़द्दस,नगर पर किसका अधिकार हो यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। ट्रम्प ने इस नगर को इस्राईल को दे दिया है। यूं तो फिलिस्तीनियों और इस्लामी जगत के लिए पूरा फिलिस्तीन महत्वपूर्ण है लेकिन बैतुल मुक़द्दस की बात अलग है। बैतुलमुक़द्दस, फिलिस्तीन का एक प्राचीन नगर है जो मुसलमानों का पुरान क़िब्ला है अर्थात पहले मुसलान, उसी नगर में मौजूद मस्जिदुल अक़्सा की ओर मुंह करके नमाज़ पढ़ते थे। यह नगर हमेशा ईश्वरीय धर्मों के मध्य सम्मान का पात्र रहा है।

बैतुल मुक़द्दस, फिलिस्तीन का केन्द्रीय नगर है और इसे पश्चिमी तट का सब से बड़ा नगर कहा जाता है। यह पश्चिम एशिया के ” यहूदिया” पठार में स्थित है। इसके एक तरफ भूमध्य सागर और दूसरी तरफ मृत सागर है। सब से पहले इस नगर को ” योबूस” के नाम से जाना जाता था क्योंकि ” कनआन ” क्षेत्र के अरब इस नगर के सब से पुराने निवासी है। कनआन के अरबों का सब से अधिक प्रसिद्ध क़बीला ” यबूसान ” था जो इस क्षेत्र में बसा था।

बैतुलमुक़द्दस, येरुश्लम, कादिश, सालिम, सालीम, सहयून, कुद्स, ईलिया जैसे नामों से भी प्रसिद्ध रहा है क्योंकि इस नगर की नींव, ईश्वरीय दूत हज़रत नूह के पोते इरम के बेटे ईलिया ने रखा था।

यह सारे नाम, इस इलाक़े पर मुसलमानों के क़ब्ज़े तक प्रसिद्ध थे। इसी तरह यरुश्लम को न्याय नगर , सुन्दर नगर, सुरक्षित नगर , पवित्र नगर, उपासना पर्वत, ईश्वर नगर या उपासना स्थल और केवल ” नगर ” भी कहा जाता था।

धर्म ग्रंथों में इस नगर के लिए 20 नाम मिलते हैं। पवित्र ग्रंथ कुरआने मजीद में यरुश्लम को ” गांव” ” मुबारक ज़मीन ” ” ज़ैतून” और ” अस्साहिरा” जैसे नामों से याद किया गया है। यह नगर इस लिए पवित्र समझा जाता है क्योंकि इसका निर्माण ईश्वरीय दूतों ने किया है। ईश्वरीय दूत हज़रत दाऊद और हज़रत सुलैमान का इस नगर में रोब व दबदबा था और हजरत सुलैमान का विशाल साम्राज्य इसी नगर से चलता था।

ईश्वरीय दूत हज़रत इब्राहीम की पत्नी हज़रत हाजेरा, ” कूता” नामक क्षेत्र से इसी नगर में गयी थीं। हज़रत मरयम का स्वर्गवास इसी नगर में हुआ, हज़रत ईसा इसी नगर में पैदा हुए और पैग़म्बरे इस्लाम ने बहुत दिनों तक इसी नगर की ओर मुख करके नमाज़ पढ़ते थे। कहते हैं कि पृथ्वी की रचना इसी नगर से आरंभ हुई।

पुरातन विदों के अनुसार बैतुलमुक़द्दस में इन्सानों ने जब रहना आरंभ किया तो वह चतुर्थ कल्प था। कहते हैं कि यह नगर एक क़िले की तरह था जहां सामी जाति के कनआनी घूमंतू अरब जाकर रहने लगे थे। इन्ही लोगों ने लगभग 3000 ईसापूर्व कनआनी क़बीले से यरुश्लम को छीन लिया। यहूद की सरकार लगभग 1020 ईसापूर्व बनी थी और हज़रत दाऊद और हज़रत सुलैमानी के काल में 80 बरस तक इस नगर में राजनीतिक व्यवस्था रही। हज़रत सुलैमान ने अपनी सत्ता के चौथे साल और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के निधन के 539 साल बाद अपने पिता की वसीयत के अनुसार बैतुलमुक़द्दस का निर्माण आरंभ किया। हज़रत मूसा के स्वर्गवास के 979 साल बाद, बैबिलोन के राजा नबूकदनेस्सर द्वतीय ने इस नगर पर हमला किया और उसे तबाह कर दिया। 70 बरस तक यह नगर खंडहर के रूप में पड़ा रहा। यह यरुश्लम की पहली तबाही थी। फिर बैबिलोन और ईरान के बीच युद्ध हुआ जिसमें ईरान के हखामनी राजा साइरस को विजय हुई और ईरान के इस राजा ने यरुश्लम और वहां के उपासना स्थलों को दोबारा बनाने की अनुमति दी।


यरुश्लम के निकट इस स्थल में 9 हज़ार पहले मानव जीवन के चिन्ह मिले हैं

इस नगर पर लगभग 200 वर्षों तक ईरानियों का क़ब्ज़ा रहा फिर हखामनी शासन श्रंखला के पतन के बाद यह नगर सिकंदर महान के हाथ लगा और फिर रोमियों और ईरानियों का उस पर क़ब्ज़ा रहा। हज़रत ईसा मसीह जन्म इसी काल में इस नगर में हुआ।

सन 132 और 66 ईसवी में इस इलाके में बड़े बड़े विद्रोह हुए जिनका रोमियों ने दमन कर दिया। रोम के राजा टाइटस ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के जाने के 40 साल बाद इस नगर पर हमला कर दिया, सुलैमान उपासना स्थल को आग लगा दी, सभी किताबों को जला दिया , यरुश्लम से इस्राईल की संतान को निकाल बाहर किया। यहीं से यहूदी पूरी दुनिया में फैलना आंरभ हुए। मुसलमानों के क़ब्ज़े यरुश्लम में निरंतर अशांति रही।

मुसलमानों के पहले खलीफा, अबूबक्र के काल के अंतिम चरण में मुसलमानों ने प्राचीन सीरिया पर विजय प्राप्त कर ली। इस्लामी जनरल अबू उबैदा जर्राह ने दूसरे खलीफा हज़रत उमर को पत्र लिखा कि वह यरुश्लम और रोम साम्राज्य के क्षेत्र पर चढ़ाई के बारे में असंमजस का शिकार हैं तो हज़रत उमर ने हज़रत अली की सलाह के अनुसार यरुश्लम पर हमले का आदेश दिया और सन 16 हिजरी क़मरी में यरुश्लम पर मुसलमानों का अधिकार हो गया। मुसलमानों ने यहूदियो के साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया जिसकी वजह से बहुत जल्द यह नगर एक बड़ा धार्मिक केन्द्र बन गया। बाद में यह नगर मुसलमानों और ईसाइयों के बीच कई और लबीं लड़ाइयों का कारण बना जिसे इतिहास में क्रूसेड युद्ध कहा जाता है। ईसाइयों ने मुसलमानों से यह नगर छीन लिया और 91 वर्षों तक इस पर ईसाइयों का अधिकार रहा फिर सलाहुद्दीन अय्यूबी ने ईसाइयों से यह नगर छीना और सन 583 हिजरी क़मरी के बाद से बीसवीं ईसवी सदी के आरंभ तक यह नगर हमेशा मुसलमानों के हाथ में रहा।

तुर्क साम्राज्य ओटोमन काल में पश्चिमी एशिया विशेष कर यरुश्लम में बड़े परिवर्तन हुए जो 4 सदियों तक जारी रहे । इस नगर के लिए कई विकास योजनाएं चलायी गयीं और इस नगर की आबादी बढ़ती गयी। ओटोमन साम्राज्य के पतन के साथ ही इस नगर में विकास कार्य रुक गया और फिर पूरे फिलिस्तीन पर ब्रिटेन का कब्ज़ा हो गया जिसने एक साज़िश के अंतर्गत, इस्राईल की नींव रखी और फिर इस्राईल ने सन 1967 में गैर कानूनी तौर पर यरुश्लम पर क़ब्ज़ा कर लिया जो अब तक जारी है। संयुक्त राष्ट्र संघ इस क़ब्ज़े को अवैध घोषित कर चुका है मगर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सेंचुरी डील में यह नगर इस्राईल को दे दिया है।

बैतुल मुक़द्दस के पास मिला 9 हज़ार साल पुराना आवास स्थल

पुरातात्विक विशेषज्ञों ने बैतुल मुक़द्दस के पास 9 हज़ार साल पुराने आवासीय क्षेत्र का पता लगाया है।

समाचार एजेंसी इर्ना ने “अरब-21” नामक न्यूज चैनल के हवाले से ख़बर दी है कि पुरातात्विक विशेषज्ञयों ने बैतुल मुक़द्दस के पास खुदाई के दौरान एक ऐसे आवासीय क्षेत्र की खोज की है जहां लगभग तीन हज़ार लोग रहते थे। इस रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में पत्थर से बने उपकरण, मानव सिर की प्रतिमा, युद्ध और मछली पकड़ने के उपकरण और पत्थर से बनी हुईं चूड़ियाँ मिली हैं। याद रहे कि इससे पहले पुरातात्विक विशेषज्ञययों को इसी क्षेत्र से सात हज़ार साल पुराना शहर खोजा था।

उल्लेखनीय है कि बैतुल मुक़द्दस, फ़िलिस्तीन के मध्य क्षेत्र में स्थित दुनिया का सबसे पुराना शहर गिना जाता है। बैतुल मुक़द्दस मुसलमानों का पहला क़िबला और मक्का और मदीना के बाद तीसरा पवित्र शहर माना जाता है।

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