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बैंकों में पैसा रखना सुरक्षित नहीं : CAA के ख़िलाफ़ आंदोलन में शामिल होने के लिए हज़ारों सिख भाई-बहन पहुंचे शाहीन बाग़ : वीडियो

‎Mohammad Parvez‎
शाहीन बाग आंदोलन में समर्थन के लिए पंजाब के किसान भी पहुंचे…!!!!

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग इलाके में चल रहे आंदोलन को समर्थन देने के लिए सोमवार को पंजाब किसान यूनियन के कार्यकर्ता भठिंडा के मनसा से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। किसानों का एक दूसरा ग्रुप भी मंगलवार को राजधानी के लिए रवाना होगा। ये लोग 8 फरवरी तक वहां रहेंगे। उनका कहना है कि हमारा विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक कानून वापस नहीं हो जाता है। हम इसके लिए संघर्ष करते रहेगे।

नागरिकता संशोधन बिल (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय आबादी रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए किसान संगठनों ने 16 फरवरी को संगरूर के मालेरकोटला में प्रस्तावित सभा के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। मनसा में 12 फरवरी से अनिश्चितकालीन विरोध भी शुरू होने की संभावना है। पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष रुल्डू सिंह मनसा ने बताया, “हम लोग सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए शाहीनबाग के लिए निकल चुके हैं।”

 

मंगलवार को सैकड़ों किसान संगरूर से बसों में सवार होकर शाहीन बाग के लिए रवाना होंगे। किसान संगठन बीकेयू (एकता उग्रहण) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी ने बताया, “हम 8 फरवरी तक विरोध-प्रदर्शन करने वालों के लिए लंगर आयोजित करने को साथ में राशन भी ले जा रहे हैं। हमें लगता है कि अपने मुस्लिम भाई-बहनों के लिए खड़े होना हमारा नैतिक जिम्मेदारी है।” कहा कि इसमें सबको साथ आना चाहिए।


Pramod Planet

मैं शैतान

लगभग एक महीने पहले उसकी ट्रान्सफर मेरी डिविज़न में हों गई थी । और जैसे ही वह आयीं तभी से मेरे मन में उसके बारे में ग़लत विचार आने लगे थे ।

अब मैं कंपनी में अच्छी पोज़ीशन पर था । गरिब घर से आकर भी पिछले २० साल कठोर परिश्रम से मैं इस पोज़ीशन तक पहुँच गया था । कंपनी में बड़ा रुतबा था मेरा । एक नयी लड़की मुझे मिल नहीं रही इस विचार से मेरे अहंकार को ठेस पहुँचीं थी ।

मैंने बहुत कोशिश की । कभी केबिन में बुला कर, कभी होटल में डिनर का इन्विटेशन देकर, कभी जानबूझकर ज़्यादा काम देकर । मैं कंपनी में उसका अच्छा भी कर सकता था या बुरा भी; यह बात उसे समझ नहीं आ रही थी क्या? पर वो हमेशा हँसते, बहुत संयम के साथ, आदर से मुझे ना करतीं थीं । उससे मेरा ग़ुस्सा और बढ़ रहा था । कौन वो नगण्य लड़की जो मुझे नकारे? मैं डिस्टर्ब होने लगा । घर बीवी ने पुछा । पर मैंने टाल दिया ।

मगर आज उसने मुझे रात को घर खाना खाने बुलाया । मैं रात को उसके घर गया ।

“वेलकम सर.” हँसते हुए उसने मेरा स्वागत किया । जैसे ही मैं सोफ़े पर बैठा वह बोली,” सर, एक सरप्राइज़ हैं । आपको किसी से मिलाना था.” और उसने पुकारा,” अंकल, सर आ गये हैं ।”

उसी समय एक वृद्ध दंपति दरवाज़े से बाहर आयी । उन्हें देखते ही मैंने झट से पानी का गिलास निचे रख दिया । कालेज में जब मेरे पास पैसे नहीं थे तब बहुत प्यारसे उन्होंनेही मेरे कालेज का सब ख़र्चा उठाया था । मैं जो भी पढ़ सका वो सिर्फ़ और सिर्फ़ उनके कारण । मैं उन्हें बाद में कभी मिला नहीं था ।

मैं उनके चरण स्पर्श करने झुक गया । तभी उसके शब्द मैं सुन रहा था,” सर, अंकलने हमेशा आपकी अच्छी बातें मुझे बताई । कैसे ग़रीबी के बावजूद आप मेहनत से इतने बड़े बन गये ये हमेशा मुझे बताते थे । सर, आप तो मेरे रोल मॉडल हो ।”

वह बात कर रहीं थीं और मुझे समझ में आ रहा था की सत्ता और पैसों के कारण मैं कितना बड़ा शैतान हो गया हूँ । मेरे आँसुओं से उनके पैर भीग गये । दोनों ने मुझे उठाकर अपने सीने से लगा लिया…

आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें ????????????

प्रमोद वाघमारे Pramod Waghmare

युसूफ खान उपसरपंच रिंगनोद

ना कामिया छुपाने के लिए हिन्दू मुस्लिम जनता की सेवा की शपथ खा कर जनता के अधिकारों को कुचलना सत्ता सिन को शोभा नही देता किसी से मोहोब्बत करके देखना बोहोत मंहगा शोक है ये हर किसी के बस की बात नही गोलियां तो हिटलर भी चलवाता था आज दुनिया मे धिक्कारियत के सिवाए कुछ नही है


Ruby Arun

पुलवामा हमले को एक साल होने वाले हैं लेकिन उस हमले में मारे गए शहीदों को अब तक सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है. केंद्र सरकार ने सिर्फ वादे किए लेकिन उन्हें अब तक पूरा नहीं किया. शहीदों के परिजन दफ्तरों के चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं.

#AntinationalBJP

बैंकों में पैसा रखना भी सुरक्षित नहीं

पश्चिम बंगाल में NRC, CAA और NPR के खिलाफ जारी है विरोध प्रदर्शनममता बनर्जी ने NPR को बताया NRC पर उठाया गया पहला कदम
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रदर्शन जारी है. ममता बनर्जी ने नदिया में केंद्र सरकार को एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर घेरा.

मंगलवार को भी सीएम ममता ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एनपीआर ही एनआरसी का पहला कदम है, इसलिए हम एनपीआर को प्रदेश में लागू नहीं होने देंगे.

ममता बनर्जी ने कहा कि हमने शरणार्थियों को जमीन का अधिकार दिया है. बीजेपी राज में बैंकों में पैसा रखना सुरक्षित नहीं है. वह एलआईसी बेच रहे हैं. एअर इंडिया, रेलवे, बीएसएनएल भी बेच रहे हैं.

ममता बनर्जी ने कहा कि सरकार जब दस्तावेज मांगे तो एक भी दस्तावेज न दिखाएं. अगर वे आपसे के आधार कार्ड का नंबर सबमिट करने के लिए कहें, या आपके परिवार के आधार कार्ड का विवरण मांगे तो उन्हें न दें . जब तक मैं सीधे तौर पर आपसे यह न करूं.

ANI

@ANI
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee in Nadia: In Assam, more than 100 people died because of the National Register of Citizens (NRC). In West Bengal, 31 or 32 died out of fear of NRC.

ममता बनर्जी ने कहा कि असम में 100 लोग एनआरसी की वजह से मर गए. पश्चिम बंगाल में 31 या 32 लोग एनआरसी के डर से मर गए.

इससे पहले मध्य ग्राम की एक रैली में ममता बनर्जी ने कहा था कि गरीबों को एक बार फिर क्यों सड़कों पर क्यों खड़ा किया जा रहा है. हम सभी पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक मतदान करते हैं और इसी देश के नागरिक हैं.

एनपीआर पर भी हमलावर रही हैं ममता बनर्जी
एनपीआर के मसले पर ममता बनर्जी पहले भी केंद्र को घेर चुकी हैं. ममता बनर्जी ने कहा था कि जनगणना के नाम पर मोदी सरकार लोगों की मां का बर्थ सर्टिफिकेट मांग रही है और एनपीआर में इस्तेमाल करना चाह रही है. जबतक हम हैं तबतक लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने नहीं देंगे. प्रदर्शन में हिंसा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. ममता बोलीं कि अगर आपको एनआरसी करना है तो राज्य सरकार का साथ चाहिए, हमारे बिना ये लागू नहीं हो पाएगा फिर चाहे ऑनलाइन ही हो जाए.

 

डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. लेख सोशल मीडिया पर वायरल है, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

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