दुनिया

सीरिया और इराक़ में अमेरिका, इस्राईल के बनाये कुख्यात आतंकी संगठन दाइश के 27000 आतंकवादी अब भी मौजूद हैं : रिपोर्ट

राष्ट्रसंघ का कहना है कि सीरिया और इराक़ में अबभी 27000 आतंकवादी मौजदू हैं। बता दें कि अमेरिका, इस्राईल, ब्रिटेन, सऊदी अरब ने मिल कर दाइश जैसे कुख्यात आतंकी संगठन का गठन किया था, इस संगठन के ज़रिये इनका मकसद सीरिया, इराक, आदि देशों की सरकारों को पलट कर वहां के ऑइल पर कब्ज़ा करना था,

संयुक्त राष्ट्रसंघ में आतंकवाद विरोधी कार्यालय के प्रमुख ने बताया है कि वर्तमान समय में सीरिया और इराक़ में लगभग 27000 विदेशी आतंकवादी मौजूद हैं।

विलादिमीर वोरोनकोफ ने एक भाषण में कहा कि इराक़ और सीरिया में मौजूद सत्ताइस हज़ार आतंकवादी भविष्य में इन देशों के साथ ही क्षेत्र के लिए भी गंभीर ख़तरा हैं। उन्होंने कहा कि दाइश अब भी अपनेआप को मज़बूत करन में लगा हुआ है। वोरोनकोफ ने बताया कि दाइश के आतंकवादी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ बड़ी कार्यवाहियां अंजाम देने के प्रयास में हैं। उन्होंने कहा कि दाइश की रणनीति यह है कि संकटग्रस्त देशों की स्थिति का दुरूपयोग करते हुए वह वहां पर पहले अपनी पैठ बनाए और फिर वहीं पर संकट को अधिक बढ़ाकर वहीं पर बना रहे।

ईरान, ट्रम्प के ख़िलाफ़ शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या का केस दायर करेगा: जवाद ज़रीफ़

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ राजकीय और आर्थिक आतंकवाद के आरोप में अंतर्राष्ट्रीय अदालत में केस दर्ज करेगा।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने अलमयादीन टीवी चैनल को एक इंटर्व्यू देते हुए इस बात पर बल देते हुए कहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या करके क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को समाप्त कर लिया है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ईरान अंतर्राष्ट्रीय अदालत में इस मामले में ट्रम्प के ख़िलाफ़ मुक़द्दामा दर्ज करेगा। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी की शव यात्रा में लाखों लोगों की उपस्थिति अमेरिकी सरकार के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा थी। उन्होंने कहा कि इसके प्रभाव अमेरिकी सेना के पश्चिमी एशिया से बाहर निकलने तक जारी रहेंगे।

मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ अमेरिकी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, तुम्हे एक सैन्य कमांडर का मुक़ाबला युद्ध के मैदान में करना चाहिए था, कायराना कार्यवाही के ज़रिए उनकी हत्या नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि, वैसे अमेरिका और ज़ायोनी शासन हमेशा से इसी तरह की कायराना कार्यवाही करते आए हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने सेंचुरी डील नामक योजना का एलान करके यह सिद्ध कर दिया कि, इतिहास में उसकी महत्वाकांक्षाएं ज़ायोनियों से कहीं अधिक रही है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने इस योजना के माध्यम से यह भी सिद्ध कर दिया कि, वह किसी भी मामले के हल के लिए मध्यस्थता नहीं कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *