विशेष

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के दामाद की बेटी के मुंडन समारोह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री, कई मुख्यमंत्री शामिल हुए!

 

पाकिस्तान प्रेमी लम्पट संघी आतंकवादियों ने अब इस आतंकनी को बुर्क़ा पहना कर भेज दिया : गीता गैरोला

ये पाकिस्तान प्रेमी लम्पट संघी आतंकवादी अपनी तमाम नापाक हरकतों के बाद अब इस हरकत पर उतरे हैं। पहले इन्होंने हिन्दू-मुस्लिम बनाना चाहा, उसमें फेल हुए तो कुछ आतंकवादियों को कट्टा-गोली लेकर भेजा, उसमें फेल हुए तो इस आतंकनी को बुर्क़ा पहना कर भेज दिया।

— गीता गैरोला


Mohd Sharif

दिल्ली की झुग्गियों से महिलाओं को तीन दिन के लिये सुरक्षित स्थान पर भेजना बेहतर होगा।
********************************************
एक कहावत है कि ‘दूध का जला छाछ फूंक फूंक कर पीता है।’
जिसका गर्म दूध से मुंह जल जाए तो वह सावधानी वश उसी जैसी दिखाई देने वाली छाछ को भी इस डर से अनजाने में फूंक मारने लगता है कि कहीं उससे मुंह न जल जाए।
इस कहावत की रोशनी में भगवाईयों की दलितों व मुस्लिमों के प्रति मानसिकता और व्यवहार को देखते हुए सावधानी वश तीन दिन के लिये दिल्ली के झुग्गी वासियों को अपनी महिलाओं को कहीं दूसरे स्थानों पर भेज देना चाहिए क्योंकि चुनाव प्रचार के बहाने भाजपा के 250 सांसद तीन रातें झुग्गियों में बिताने की योजना बना रहे हैं।
इस ख़बर से विधायक सेंगर, पूर्व मन्त्री चिन्मयानंद तो याद आए ही कठुआ में बलात्कारियों के समर्थन में भगवाईयों द्वारा निकाली गई रैली भी याद आ गई।
सावधानी के तौर पर बचाव रखने में कोई हर्ज नहीं है और इससे भाजपाई सांसद भी झूटे आरोपों से बचे रहेंगे क्योंकि भाजपा का समय ख़राब चल रहा है इसलिये यह एहतियात भाजपाइयों के लिए भी लाभदायक होगी।

‎Sagar PaRvez‎
भाजपा राष्ट्रपति शासन का विरोध करती है… 2014 के बाद से जहाँ भाजपा की सरकार ना बन सकी चार राज्यों में लगा है राष्ट्रपति शासन

भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रपति शासन का विरोध करती है। इस साल जून में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष पर गृह मंत्री अमित शाह ने इस संदर्भ में आरोप लगाते हुए कहा था कि लोकतंत्र का गला घोटने का कार्य कांग्रेस ने किया है।

उन्होंने कहा था, “मैं यह कहना चाहूंगा कि देश में अब तक 132 उदाहरण ऐसे हैं, जब संविधान के अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन लगाने का आदेश) का इस्तेमाल किया गया और इनमें से 93 मौकों पर केंद्र में कांग्रेस की सरकार का शासन था।”

लेकिन, यह पहली बार नहीं है जब भाजपा के शासन में किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया हो

हाल ही में जिस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा वह जम्मू एवं कश्मीर था। तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद भाजपा ने पीडीपी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, तब यहां जून 2018 में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसके बाद के घटनाक्रम में अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया और प्रदेश से विशेष राज्य का दर्जा भी वापस ले लिया गया।

इससे पहले 2015 में, विधानसभा चुनावों में एक खंडित फैसले के बाद सरकार गठन में विफलता के चलते जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय शासन राज्य में लागू किया गया था।

अरुणाचल प्रदेश वर्ष 2016 में 26 दिनों के राष्ट्रपति शासन का गवाह बना। कांग्रेस के 21 विधायकों ने 11 भाजपा और दो निर्दलीय विधायकों के साथ हाथ मिलाया, जिससे सरकार अल्पमत में आ गई। हालांकि, मामले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी और न्यायालय ने अपने फैसले में कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया था।

पर्वतीय राज्य उत्तराखंड ने वर्ष 2016 में दो बार राष्ट्रपति शासन देखा। पहले 25 दिन और बाद में 19 दिनों के लिए। पहले कांग्रेस में फूट पड़ने के बाद और दूसरी बार मई में एक बार फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ।

महाराष्ट्र में 2014 में 33 दिनों के लिए राष्ट्रपति शासन रहा था। इस वर्ष चुनाव होने से ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने राज्य में 15 वर्षीय कांग्रेस-राकंपा गठबंधन के टूटने के बाद इस्तीफा दे दिया, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति शासन लगा।

Jitendra Narayan

वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं दिवाकर नाथ मिश्र। उनकी बेटी के मुंडन समारोह में शामिल हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री और कई प्रांतों के मुख्यमंत्री…

संयुक्त सचिव…?
वह भी बेटी की शादी नहीं, मुण्डन…?
देश के सबसे बड़े नेता शामिल हुए…??

क्या आपके मन में ऐसे सवाल आ रहे हैं…???

दिवाकर नाथ मिश्र सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री अरुण कुमार मिश्र के दामाद हैं…
समारोह सथल था ‘ल्युटियन्स डेल्ही’ में स्थित माननीय न्यायधीश महोदय का आवास…

(प्रिंट ने रिपोर्ट छापी है और प्रशांत भूषण ने ट्विट किया है)

 

-Manoj Kumar

4 फ़रवरी 1670 कल ही के दिन पुणे में तानाजी और उदयभान सिंह राठौड़ के बीच सिंहगढ़ का युद्ध लड़ा गया। तानाजी मराठा कमांडर थे जबकि उदयभान मुग़ल कमांडर।

यह एक छोटी जंग थी लेकिन मराठो के लिए यह किला जितना अपने खोए सम्मान और वर्चस्व को फिर से वापस पाने जैसा था सिंहगढ़ का किला शिवाजी ने एक संधि में खोया था। पुरंदर की संधि
के तहत शिवाजी को ये किला औरंगजेब को देना पड़ा और इन समझौते पर हस्ताक्षर किए।

– शिवजी के अधिकार में अब सिर्फ 12 किले ही रहेंगे। बाकी सारे किले मुग़लो के अधीन रहेंगे।
– मुग़लो को जब भी और जहां भी सैन्य मदद की ज़रूरत हो तो समर्थन करेंगे।
– सम्भाजी की 5000 सैनिकों की टुकड़ी मुग़लो को सौपी गईं।
– अगर शिवाजी कोंकण पर दोबारा अधिकार चाहते है तो उन्हें मिल जाएगा लेकिन उसके एवज में 40 लाख देने होंगे।

इस जंग पर हाल में ही एक फ़िल्म भी बनी थी जिसमे कहानी को तोड़ मरोड़ का पेश किया गया है। उदयभान का हुलिया एक अफ़ग़ान की तरह दिखाया गया आंखों में सुरमा, बड़ी दाढी चाल ढाल बिल्कुल अफ़गानों की तरह। बल्कि अफ़ग़ान कहना भी सही नही है अफ़ग़ान औए मुग़ल सैनिक जंग में कभी काले कपड़े नही पहनते थे जबकि उदयभान तो एक राजपूत थे उन्हें बिल्कुल वैसा दिखाया गया है जैसे उनका हिन्दू धर्म से कोई मतलब ही ना हो इतिहास को इतिहास रहने दें ये सत्ता की लड़ाई थी इसे धर्म से ना जोड़ें।

#mughal_saltanat

डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. लेख सोशल मीडिया फेसबुक पर वायरल है, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

  • DEMO PIC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *