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करोना से चीन में एक भी मुसलमान की मौत नहीं हुई है : चीन में अब लोगों के हुजूम नमाज़ पढ़ने आ रहे हैं : रिपोर्ट_video

 

भारत के मशहूर गायक मुकेश ने एक फ़िल्म का निर्माण किया था, जिसमे उनके बेहतरीन दोस्त राज कपूर साहब हीरो थे और फिल्म में अदाकारा थीं वहीदा रहमान, इस फिल्म का नाम है ”तीसरी कसम’, ये फिल्म क़ामयाब नहीं हुई थी लेकिन इसके गाने बड़े मशहूर हुए थे, एक गाना था जिसे मुकेश ने खुद गाया था, सजन रे झूठ मत बोलो ख़ुदा के पास जाना है, न हाथी है, न घोडा है वहां पैदल ही जाना है,,,

इंसानी समाज में जितनी भी परेशानियां/मुश्किलें हैं वो ”झूठ” बोलने की वजह से हैं, हम अगर अपने घरों, आसपास और खुद पर नज़र डालें तो अपने आप समझ में आ जायेगा कि हमने अपना समाज किस हद तक ख़राब बनाया है, जो हमारा समाज है वो इंसानों का मालूम नहीं होता है, हर तरफ आपाधापी मची हुई है, जिसे देखो वो भागे चला जा रहा है, पता नहीं ये इंसान हासिल क्या करना चाहता है, हम अपने बच्चों को बड़ा आदमी बनाने की शिक्षा देते हैं चाहते हैं कि वो बड़ा होकर बड़ा ओहदा हासिल करे, ताकि ज़यादा से ज़यादा कमाई करे, बात बात पर हम कहते हैं ”नाम रोशन’ करना है जबकि आधे से ज़यादा लोगों को आपने दादा के बाद परदादा का भी नाम मालूम नहीं होता है, तो हम नाम रौशन करके क्या आसमान पर ”लालटेन” कोई सितारा अपने नाम का चमकाते हैं

ये तमाम बातें ‘बे-सर पैर’ की इसलिए हम करते हैं क्यूंकि हमारी बेसिक तालीम से लेकर आला तालीम हासिल करने तक तालीम का निज़ाम गड़बड़ है, अगर हम अपने बच्चों को बचपन में सिर्फ इतना भी बताने समझाने में कामयाब हो जाएं कि ‘बेटा, देखो जीवनभर सच बोलना और हमेशा ईमानदार’ रहना तो बच्चे का जीवन बहुत खूबसूरत हो जायेगा,


हज़रत अब्दुल क़ादिर जीलानी र.अ का बचपन का वाक़िया आप को याद ही होगा जब डाकू उनके काफिले को लुटलेते हैं, उन से जिस वक़्त डाकुओं ने पूंछा कि बताओ तुम्हारे पास क्या है तो वो डाकुओं को बताते हैं ‘मेरे पास अशर्फियाँ’ हैं, डाकू तलाशी लेते हैं मगर उन्हें उनके पास से कुछ भी नहीं मिलता है, डाकू दुबारा तलाशी लेते हैं, फिर भी कुछ नहीं मिलता है, डाकू हज़रत को अपने सरदार के पास लेकर पहुँचते हैं, सरदार ने भी आप हज़रत अब्दुल क़ादिर जीलानी से मालूम किया, बताओ बच्चे तुम्हारे पास क्या है, आप बताते हैं, ‘मेरे पास अशर्फियाँ हैं”, डाकुओं सरदार अब खुद उनकी तलाशी लेती है, उसे भी कुछ नहीं मिलता है, हार कर सरदार कहता है बताओ कहाँ हैं वो अशर्फियाँ, अब हज़रत अपनी ‘सदरी उतारते हैं और उसमें जो अशर्फियाँ थीं वो निकाल कर उन्होंने सरदार के सामने रख दिया,,,ये देख कर डाकुओं का सरदार और उसके साथी हैरान रह गए, सरदार ने आप हज़रत से कहा, ‘बच्चे जब ये अशर्फियाँ हमें नहीं मिल रही थीं तो तुमने हमारे मालूम करने पर इनके बारे में क्यों बताया, जवाब में छोटे बच्चे हज़रत अब्दुल क़ादिर जीलानी ने कहा ”मेरी माँ ने कहा है, कभी झूठ मत बोलना’, जवाब सुनना था कि सारे डाकुओं ने उसी वक़्त कभी डाका न डालने और कोई बुरा काम न करने का अहद ले लिया

एक और किस्सा बाबा भारती का भी हमने पढ़ा ही है, जब तक सच न बोला जाये, इंसान का किरदार, व्यक्तित्व अच्छा नहीं बन सकता है

इस वक़्त पूरी दुनियां में करोना ने तबाही और हड़कंप मचा रखा है, चीन में तक़रीबन 8000 लोगों की मौतें हुईं हैं, ईरान में लगभग एक हज़ार लोगों की मौत चुकी है, भारत में तीन लोगों की जान जा चुकी है, अमेरिका में 100 से ज़यादा की मौतें हो चुकी हैं, इटली में तक़रीबन तीन हज़ार लोगों की मौतें हो चुकी हैं, हर तरफ तबाही मची हुई है, इबादतख़ाने बंद, बाजार बंद, गलियां सूनी, सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, लोगों में ख़ौफ़ है


ग़ालिब का एक शेर यूँ है,,,

मौत का एक दिन मुअय्यन है,,,नींद रात भर कियूं नहीं आती,,,,

हम जिस जहां में हैं वो एक दिन नहीं रहेगा, यहाँ जो कुछ है वो एक ख़ास मुद्दत तक के लिए है, कोई भी चीज़ यहाँ हमेशा के लिए नहीं है,,,हर ‘जान’ को ”मौत” का मज़ा चखना है,,,इसलिए अपने रब को याद करो और इन्साफ के दिन, जिस दिन तमाम मुर्दों को ज़िंदा कर उनसे उनके आमाल का हिसाब लिया जायेगा, उसकी तैयारी कर लो,,,मौत ईमान का एक हिस्सा है

हमारा दीन और हमारी इबादतें आख़िर में काम आएंगे,हमारे नेक काम ‘आमाल’ ही हमारा भला करेंगे, तो इन्साफ करो और न इंसाफ़ी कभी मत करो,,,कोई भी अमल नइंसाफ़ी से ज़यादा ”हौलनाक” नहीं होता,,,अल्लाह सब की हिफ़ाज़त करने वाला है, आप सब की हिफाज़त करे,,

चीन के झियांग राज्य में मुसलामनों पर वहां की हुकूमत ने अत्याचार के पहाड़ तोड़ रखे हैं, उन पर नमाज़, रोज़ा, अज़ान की पाबंदियां लगाई हुई हैं, हज़ारों लोगों को बेकसूर डिटेंशन सेंटरों में क़ैद किया हुआ है, चीन में फैली इस बवा में वजहें से किसी एक भी मुस्लमान के मारने की खबर नहीं है, हज़ारों चीनी अपने आप मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने आ रहे हैं, फिलहाल वहां हुकूमत ने मस्जिदों के दरवाज़े खोल दिए हैं और नमाज़ पर लगी पाबन्दी को हल्का कर रखा है

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के हाथों ”पूरी दुनियां’ की शिकस्त और चीन में फैला कोरोना अकल वालों के लिए खुदा की तरफ से नसीहतें हैं, वो इसी तरह अपने बन्दों में अपनी निशानियां ज़ाहिर करता है ताकि सूझबूझ रखने वाले लोग हिदायत पा सकें

अल्लाह हम सब की मदद करे,,,अमीन,,,,परवेज़ ख़ान

 

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Coronavirus in Italy.

Cases: 35,713

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चीन की ऐसी ‘जेल’ जहां बंद हैं दस लाख मुसलमान?

इन दिनों देश के पश्चिमी प्रांत शिनजिंयाग में अल्पसंख्यक मुसलमानों के प्रति अपने रवैये की वजह से चीन की भारी आलोचना हो रही है. आलोचकों का कहना है कि चीन ने इस राज्य में बड़ी संख्या में मुसलमानों को ख़ास तरह के कैंपों में रखा है.

अगस्त में एक संयुक्त राष्ट्र की कमेटी को बताया गया था कि शिनजियांग में क़रीब दस लाख मुसलमानों को एक तरह की हिरासत में रखा गया है, जहां उन्हें ‘दोबारा शिक्षा’ दी जा रही है.

चीन इन ख़बरों का खंडन करता है. लेकिन इस दौरान शिनजियांग में लोगों पर निगरानी के कई सबूत सामने आए हैं.

आइए समझते हैं कि इस कहानी के अलग-अलग पहलू क्या हैं.

 

कौन हैं वीगर?
चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में रहने वाले एक करोड़ से अधिक वीगर समुदाय के अधिकतर लोग मुसलमान हैं. ये लोग ख़ुद को सांस्कृतिक नज़र से मध्य एशिया के देशों के क़रीब मानते हैं. उनकी भाषा भी तुर्की से मिलती-जुलती है.

लेकिन हाल के वर्षों में भारी संख्या में चीन के बहुसंख्यक नस्लीय समूह ‘हान’ चीनियों का शिनजियांग में बसना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है. वीगर लोगों को लगता है कि अब उनकी रोज़ी-रोटी और संस्कृति ख़तरे में पड़ रही है.

 

कहां है शिनजियांग?
शिनजियांग चीन के पश्चिम में देश का सबसे बड़ा प्रांत है. इसकी सीमाएं भारत, अफ़ग़ानिस्तान और मंगोलिया जैसे कई देशों से मिलती हैं. कहने को तो ये भी तिब्बत की ही तरह एक स्वायत्त क्षेत्र है लेकिन दरअसल यहां की सरकार की डोर बीजिंग के ही हाथ में है.

सदियों से इस प्रांत की अर्थव्यवस्था खेती और व्यापार पर केंद्रित रही है. ऐतिहासिक सिल्क रूट की वजह से यहां ख़ुशहाली रही है.

बीसवीं सदी की शुरुआत में वीगर समुदाय ने थोड़े वक्त के लिए ही सही, शिनजियांग को आज़ाद घोषित कर दिया था. लेकिन 1949 की कम्यूनिस्ट क्रांति के बाद ये प्रांत चीन का हिस्सा बन गया.

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फैक्ट चेक: क्या चीन में कोरोना वायरस से नहीं हुई एक भी मुसलमान की मौत? (ABP news)

https://www.aajtak.in/fact-check/story/fact-check-due-to-corona-virus-not-killed-single-muslim-in-china-viral-post-1041544-2020-03-20

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इस वक़्त शिनजियांग में क्या हो रहा है?
अगस्त 2018 में संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार कमेटी को बताया गया था कि ‘पूरा वीगर स्वायत्त क्षेत्र नज़रबंदी में है.’

इस कमेटी को बताया गया था कि क़रीब 10 लाख लोग हिरासती ज़िंदगी बिता रहे हैं. ऐसी रिपोर्टों की पुष्टि ह्यूमन राइट्स वॉच भी करता है.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि एक तरह के हिरासती कैंपों में रखे गए लोगों को चीनी भाषा सिखाई जाती हैं और उन्हें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति वफ़ादारी की कसम खानी होती है.

साथ ही लोगों से उनके धर्म और संस्कृति की आलोचना करने को कहा जाता है.

ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक वीगर समुदाय को बेहद सख़्त निगरानी का सामना करना पड़ता है. लोगों के घरों के दरवाज़े पर QR कोड्स लगे हुए हैं और चेहरे को पहचानने के लिए कैमरे फ़िट हैं. अधिकारी जब चाहें तब ये पता लगा सकते हैं कि घर अंदर कौन है.

बीबीसी को क्या पता चला है?

शिनजियांग से सीधी ख़बरें आना बहुत मुश्किल है. वहां मीडिया पर पाबंदी है. लेकिन बीबीसी ने कई बार इस क्षेत्र से रिपोर्ट्स जुटाई हैं और ख़ुद इन कैंपों के सबूत देखे हैं.

बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़नाइट ने कई ऐसे लोगों से भी बात की है जो इन जेलों में रह चुके हैं. ऐसे ही एक शख़्स हैं आमिर.

आमिर ने बीबीसी को बताया – ”वो मुझे सोने नहीं देते थे. मुझे कई घंटों तक लटका कर रखा जाता था. मेरी चमड़ी में सूइयां चुभाई जाती थीं. प्लास से मेरे नाख़ून नोचे जाते थे. टॉर्चर का सारा सामान मेरे सामने टेबल पर रखा जाता था ताकि में ख़ौफ़ज़दा रहूं. मुझे दूसरे लोगों के चीखने की आवाज़ सुनाई देती थी.”

अज़ात नाम के अन्य पूर्व क़ैदी ने बताया – ” जहां मैं क़ैद था, वहां डिनर के वक़्त करीब 1,200 लोग हाथों में प्लास्टिक की कटोरियां लेकर चीन समर्थक गीत गाते थे. वो सब रोबोट की तरह दिखते थे. उनकी तो आत्मा ही मर गई थी. मैं उनमें से कई लोगों को जानता हूं. वो सब ऐसे व्यवहार करते थे कि जैसे कि कार दुर्घटना में अपनी यादाश्त खो चुके हों.”

वीगर समुदाय की हिंसा?
चीन का कहना है कि उसे अलगाववादी इस्लामी गुटों से ख़तरा है क्योंकि कुछ वीगर लोगों ने इस्लामिक स्टेट समूह के साथ हथियार उठा लिए हैं.

साल 2009 में शिनजियांग की राजधानी ऊरूमची में हुए दंगों में हान समुदाय के 200 लोग मारे गए थे. उसके बाद से यहां हिंसा बढ़ी है. जुलाई 2014 में पुलिस स्टेशन और सरकारी दफ़्तरों पर हुए हमलों में 96 लोग मारे गए थे.

अक्तूबर 2013 में बीजिंग के तियाननमेन स्क्वायर में एक कार भीड़ में घुसी और कई लोगों के कुचल दिया. चीनी प्रशासन ने इसके लिए भी शिनजियांग के अलगाववादियों को ज़िम्मेदार बताया गया था.

सरकार की ताज़ा कार्रवाई के पीछे फ़रवरी 2017 में शिनजियांग के ऊरूमची में हुई छुरेबाज़ी की घटनाएं हैं.

चीन का क्या कहता है?
चीन का कहना है कि शिनजियांग में ‘हिंसक आतंकवादी गतिविधियों’ से निपट रहा है.

जिनेवा में एक संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में चीनी अधिकारी हू लियानहे ने कहा था कि दस लाख लोगों को हिरासत में रखे जाने की बात ‘कोरा झूठ’ है.

हाल ही में चीन के मानवाधिकार विभाग के एक अधिकारी ने कहा है, “आप कह सकते हैं कि ये तरीका सबसे उपयुक्त नहीं है लेकिन धार्मिक चरमपंथ से निपटने के लिए ऐसा किया जाना ज़रूरी है. क्योंकि पश्चिम के देश इस्लामी चरमपंथ से लड़ने में असफल हो गए हैं. बेल्जियम और पेरिस में हुए हमले, इसका सबूत हैं. पश्चिम इस विषय में असफल रहा है.”

चीन अक्सर शिनजियांग पर कोई सार्वजनिक राय नहीं देता. साथ ही शिनजियांग में बाहरी लोगों और मीडिया के प्रवेश की पूरी तरह से नियंत्रित करता है.

दुनिया क्या कर रही है?

दुनिया भर में वीगर समुदाय के प्रति चीनी रवैया की आलोचना बढ़ती जा रही है. लेकिन अब तक किसी भी मुल्क़ ने आलोचना भरे शब्दों से आगे कोई क़दम नहीं उठाया है.

अमरीका में कांग्रेस की चीनी मामलों की कमेटी ने ट्रंप प्रशासन से शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़ी कंपनियों और अधिकारियों पर पाबंदी लगाने की गुहार की है.

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है – “अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय को हिरासत में रखा जा रहा है. उनका टॉर्चर हो रहा है. उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर पाबंदी लगी हुई है. उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हर पहलू निगरानी में है.”

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन की नई प्रमुख मिशेल बेशलेट ने भी शिनजियांग में पर्यवेक्षकों को शिनजियांग में जाने देने की अनुमति मांगी है. चीन ने इस मांग को सिरे से ख़ारिज करते हुए ग़ुस्से का इज़हार किया है.

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रोलैंड ह्यूज
बीबीसी न्यूज़

चीन के वीगरों पर चुप क्यों हैं मुसलमानों के हिमायती देश

”चीन एक ऐसी जगह बनता जा रहा है जहां हर जगह आप पर नज़र रखी जाती है, जहां ग़लत सोचने भर से आप सलाख़ों के पीछे पहुंच सकते हैं. ये एक ऐसी जगह है जहां विदेशी पत्रकारों को पसंद नहीं किया जाता.”

ये अनुभव है बीबीसी के एक पत्रकार का, जिन्होंने इसी साल चीन के शिनजियांग प्रांत जाकर ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया था.

ज़िंदा लोग मुर्दा बनकर निकले’
”मुझे डर इस बात का है कि लोगों को बड़े पैमाने पर मारा गया है. लाखों लोगों का कहीं अता-पता नहीं है. ये वो जगह है जहां लोगों के पास कोई अधिकार नहीं हैं. आपको कोई अदालत कोई वकील नहीं मिलेगा. बीमार के लिए कोई दवा नहीं, यही वजह है कि ज़िंदा लोग कैंप्स से मुर्दा बनकर निकल रहे हैं.”

वीगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट के नूरी टकेल ने ये दावा बीबीसी के हार्ड टॉक कार्यक्रम में किया था.

‘इससे बेहतर तो गोली मार दो’
”मेरी मां और पत्नी को कैंप्स में ले गए. उन्हें लकड़ी की सख़्त कुर्सी पर बिठाया जाता है. मेरी बदनसीब मां को हर दिन ये सज़ा भुगतनी होती है. मेरी पत्नी का गुनाह बस इतना है कि वो वीगर है. इसकी वजह से उसे अलग कैंप में रखा गया है जहां ज़मीन पर सोना पड़ता है. मुझे नहीं मालूम वो आज ज़िंदा हैं भी या नहीं. मुझसे ये बर्दाश्त नहीं होता कि मेरी मां और पत्नी को चीन की सरकार तड़पा-तड़पाकर मारे. इससे तो बेहतर है उन्हें गोली मार दो, बुलेट के लिए पैसे मैं दे दूंगा.”

ये आपबीती है अब्दुर्रहमान हसन की जो उन हज़ारों वीगर मुसलमानों में से एक हैं जिन्होंने तुर्की जाकर अपनी जान बचाई है.

‘मैंने एक लीवर और दो किडनी निकाली’

”ये साल 1995 की बात है. मुझे बुलाया गया और एक टीम बनाने के लिए कहा गया. फिर वो हमें वहां ले गए जहां लोगों को सज़ा के तौर पर गोली मारी गई थी. वहां मैंने एक लिवर और दो किडनी निकाली. लेकिन उस क़ैदी की मौत नहीं हुई थी, क्योंकि क़ैदी के सीने पर दाहिनी ओर जानबूझकर गोली इस तरह मारी गई थी कि वो फौरन मरे नहीं. उस समय मुझे इसमें कुछ ग़लत नहीं लगा क्योंकि मैं उस समाज में पैदा हुआ था जहां लोगों के दिमाग में बहुत सी चीज़ें ठूंस दी गई थीं और मैं भी ये मानता था कि देश के दुश्मन को ख़त्म कर देना हमारा कर्तव्य है.”

बीबीसी से बातचीत में ये दावा किया है अनवर तोहती ने जो एक निर्वासित वीगर हैं और लंदन में रहते हैं.

ये तमाम अनुभव और दावे चीन के शिनजियांग प्रांत के बारे में हैं जहां एक करोड़ से ज़्यादा वीगर मुसलमान रहते हैं.

चीन पर ये आरोप लगे हैं कि उसने अल्पसंख्यक मुसलमानों को बड़ी संख्या में हिरासत या बंदीगृहों में रखा है.

इसी साल अगस्त में संयुक्त राष्ट्र की एक समिति को बताया गया कि ‘क़रीब दस लाख लोग हिरासत में ज़िंदगी बिता रहे हैं.’ ह्यूमन राइट्स वॉच भी इन रिपोर्टों की पुष्टि की है.

लेकिन जिनेवा में हुई संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में चीन ने दस लाख लोगों को हिरासत में रखे जाने की बात को ‘सरासर झूठ’ बताया है.

‘अलगाववादी इस्लामी गुटों से ख़तरा’

ब्रिटेन अमरीका और यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं भी वीगर मुसलमानों की दशा पर चिंता जताती रही हैं. लेकिन चीन उन्हें ये कहकर ख़ारिज कर देता है कि उसे अलगाववादी इस्लामी गुटों से ख़तरा है.

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में चीन मामलों के जानकार प्रोफेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, ”पिछले एक दशक में पूरे अंतरराष्ट्रीय माहौल में बदलाव आया है. दुनियाभर में एक ख़ास समुदाय को चरमपंथ के साथ जोड़कर देखा जा रहा है जो अपने आप में ग़लत है. लेकिन ये सच है कि बाकी दुनिया की तरह चीन में भी यही धारणा है.”

वो कहते हैं, ”वीगर मुसलमानों के प्रति चीन की सरकार की जो नीति है, उसमें इस सोच की झलक हो सकती है. ख़बरें तो यही कहती हैं कि चीन ने लगभग दस लाख मुसलमानों को यातनागृहों में रखा है, जिन्हें चीन की सरकार री-एजुकेशन कैंप मानती है.”

शिनचियांग के वीगर मुसलमान ख़ुद को सांस्कृतिक रूप से मध्य एशियाई देशों के क़रीब मानते हैं. उनकी भाषा भी तुर्की से मिलती-जुलती है.

प्रोफेसर स्वर्ण सिंह मानते हैं कि वीगर मुसलमान अपनी पहचान को संकट में पाते हैं, ”उन्हें लगता है कि हमारी भाषा-संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है. उनके रीति-रिवाज़ों को दबाया जा रहा है. ईस्ट तुर्कमेनिस्तान इंडिपेंडेंस मूवमेंट एक अलग मुद्दा है जो चीन को नाग़वार गुजरता है. लेकिन वहां रहने वालों को चीन की सरकार अल्पसंख्यक नज़रिए से देखती है. शिनजियांग सीमावर्ती प्रांत है जो सेंट्रल एशिया देशों से जुड़ा रहा है.”

वीगर मुसलमानों की अनदेखी!

ब्रिटेन और अमरीका जैसी ताक़तें वीगर मुसलमानों के मामले में चीन के ख़िलाफ़ अपनी बात बड़ी सतर्कता से रखती हैं. ये बातें अक्सर आलोचना करने से आगे नहीं बढ़ती. क्या वजह है कि पश्चिम की ताक़तें इस मामले में चीन के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करतीं?

प्रोफेसर स्वर्ण सिंह चीन की सत्ता के स्वरूप और निवेश करने की उसकी ताक़त को इसकी बड़ी वजह मानते हैं, ”पिछले तीन दशकों में चीन जिस तरह एक बड़ी शक्ति बनकर उभरा है, उसकी वजह से सारी दुनिया का व्यवहार चीन के प्रति बदल गया है. एक पार्टी का शासन चीन को अलग तरह से ताक़त देता है. निवेश करने की चीन की क्षमता भी ज़बरदस्त है. इन तमाम वजहों से कोई चीन के भीतर इस मामले में दख़ल नहीं देना चाहेगा.”

कश्मीर में भी रह चुके हैं वीगर मुसलमान
बीसवीं सदी की शुरुआत में वीगर मुसलमान कश्मीर और लद्दाख के इलाकों में बसे, लेकिन बाद में पलायन कर गए. कश्मीर में आज भी कुछ गलियां ऐसी हैं जहां के नाम बताते हैं कि वीगर मुसलमान कभी यहां भी रहा करते थे.

आज दुनिया में क़रीब 24 ऐसे देश हैं जहां वीगर मुसलमान रहते हैं जो चीन से बाहर होने की वजह से ख़ुद को अपेक्षाकृत अधिक महफ़ूज़ महसूस करते हैं.

क्या भारत और मुस्लिम आबादी वाले अन्य देश वीगर मुसलमानों के लिए कभी अपनी चिंता जताते हैं.

इस सवाल पर प्रोफेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, ”भारत को इसके बारे में ज़रूर बात करना चाहिए, क्योंकि भारत इंडोनेशिया के बाद ऐसा दूसरा देश है जहां मुस्लिम आबादी सबसे अधिक है.”

वो कहते हैं, ”पर दूसरे देश जो इस्लाम के नाम पर हमेशा आगे बढ़-चढ़कर बात करते हैं, वो चाहे पाकिस्तान, सऊदी अरब या ईरान हों, ये सभी वीगर मुसलमानों के मुद्दों पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रहते हैं. ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कंट्रीज़ की तरफ़ से जब कोई इस बात नहीं उठाता, तो बाक़ी देशों से क्या उम्मीद की जाए.”

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संदीप कुमार सोनी
बीबीसी संवाददाता

कहां है शिनजियांग?

शिनजियांग चीन के पश्चिम में देश का सबसे बड़ा प्रांत है. इसकी सीमाएं भारत, अफ़ग़ानिस्तान और मंगोलिया जैसे कई देशों से मिलती हैं. कहने को तो ये भी तिब्बत की ही तरह एक स्वायत्त क्षेत्र है लेकिन यहां की सरकार की डोर बीजिंग के हाथ में ही है.

सदियों से इस प्रांत की अर्थव्यवस्था खेती और व्यापार पर केंद्रित रही है. ऐतिहासिक सिल्क रूट की वजह से यहां ख़ुशहाली रही है.

बीसवीं सदी की शुरुआत में वीगर समुदाय ने थोड़े वक्त के लिए ही सही, शिनजियांग को आज़ाद घोषित कर दिया था. लेकिन 1949 की कम्यूनिस्ट क्रांति के बाद ये प्रांत चीन का हिस्सा बन गया.

चीन ने शिनजियांग में हलाल के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा

चीन ने मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में हलाल उत्पादों के ख़िलाफ़ एक अभियान शुरू किया है. इसे देश के पश्चिम भाग में रहने वाले वीगर समुदाय के मुसलमानों की ज़िंदगी को बदलने की कोशिशों का हिस्सा बताया जा रहा है.

साथ ही चीन ने पहली स्वीकार किया है कि वो शिनजियांग प्रांत में लोगों की ‘शिक्षित’ करने के लिए कैंप खोल रहा है. इन कैंपों का मकसद इस प्रांत के लोगों की विचारधारा बदलना है. चीन के मुताबिक वो यहां इस्लामी चरमपंथ से लड़ रहा है.

शिनजियांग की राजधानी ऊरूम्ची में अधिकारियों का कहना है कि वो हलाल चीज़ों के इस्तेमाल में कमी लाना चाहते हैं क्योंकि हलाल से धार्मिक और सेक्यूलर ज़िदंगी के बीच फ़ासला धूमिल हो जाता है.

सोमवार को हुई एक मीटिंग के बाद प्रांत के कम्यूनिस्ट नेतृत्व ने ये शपथ ली कि वो शिनजियांग में हलाल के ख़िलाफ़ जंग छेड़ेंगे.

इस शपथ की जानकारी ऊरूमची प्रशासन ने अपने वीचैट अकाउंट पर दी है.

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने बुधवार को लिखा, “हलाल उत्पादों की मांग की वजह से दिक्कतें पेश आ रही हैं जिसके चलते इस्लाम का सेक्यूलर जीवन में दख़ल बढ़ रहा है.”

प्रांत के एक स्थानीय अधिकारी इलशात ओसमान ने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है, “दोस्तों आपको हमेशा हलाल रेस्तरां खोजने की ज़रूरत नहीं है.”

हलाल की परवाह न करें
सरकार के मुताबिक अधिकारियों को हलाल की परवाह किए बगैर हर किस्म के व्यंजन चखने चाहिए.

स्थानीय कम्यूनिस्ट नेतृत्व ने ये साफ़ किया है कि वो चाहते हैं कि शिनजियांग में सभी मार्क्सवाद-लेनिनवाद पर यक़ीन करें, न कि किसी धर्म पर. और सभी लोग सार्वजनिक स्थानों पर चीनी भाषा बोलें.

वैसे तो चीन में सभी लोगों को अपने धर्म के पालन की अनुमति है लेकिन हाल के महीनों में लोगों की धार्मिक आस्थाओं पर सरकारी निगरानी बढ़ी है.

Sakil Hasan

করোনা ভাইরাস (কভিড ১৯) মোকাবেলায় চীন বাংলাদেশকে সাহায্যের হাত বাড়িয়ে দিয়েছে।

চীনা দূতাবাস জানিয়েছে যে আমাদের বন্ধুত্বপূর্ণ বাংলাদেশিদের জন্য বিপুল সংখ্যক টেস্ট কিট সহ জরুরি রোগ-মহামারী চিকিত্সা সরবরাহ করার সিদ্ধান্ত নিয়েছে।
অতপর, মুমিনগণ, তোমরা যেই দেশের মহাদুর্যোগে আল্লাহর গজব বইলা দিনরাত গালি দিস, তারাই সবার আগে আগায়া আসছে তোমাদের পাশে দাঁড়াতে

चीन ने कोरोना वायरस (kabhiḍa 19) से लड़ने के लिए बांग्लादेश की मदद बढ़ाई है ।

चीनी दूतावास ने हमारे दोस्ताना बांग्लादेशियों के लिए एक बड़ी संख्या में परीक्षण किट के साथ आपातकालीन बीमारी-प्लेग उपचार प्रदान करने का फैसला किया है ।
तो (ऐ रसूल) तुम (इन) लोगों को (ख़ुदा की) लानत है जो तुम रात और रात को (ख़ुदा की राह में) लानत करते हो

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