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तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान की अब तक की सबसे बड़ी धमकी : रिपोर्ट

तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान ने धमकी दी है कि अगर सीरिया के इदलिब प्रांत में संघर्ष विराम को तोड़ा गया तो तुर्की निर्णायक कार्यवाही करेगा।

अर्दोगान का कहना था कि इदलिब में हम केवल जवाबी कार्यवाही नहीं करेंगे, बल्कि छोटे से हमले का भी मुंह तोड़ जवाब देंगे।

तुर्क राष्ट्रपति ने यह धमकी ऐसे वक़्त में दी है, जब अमरीका उत्तर पश्चिमी सीरिया में जारी लड़ाई में हस्तक्षेप करने पर विचार कर रहा है।

सीरिया के लिए वाशिंगटन के विशेष दूत जेम्स जेफ़री ने सीरिया में नाटो के हस्तक्षेप का विचार पेश किया है।

तुर्की राष्ट्रपति ने मंगलवार को कहा था कि वॉशिंगटन ने पहले ही इदलिब में ख़ुफ़िया जानकारी उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

ग़ौरतलब है कि इदलिब सीरिया में आतंकवादी गुटों का अंतिम गढ़ है। सीरियाई सेना ने रूस की वायु सेना की मदद से तुर्की समर्थित आतंकवादियों के सफ़ाए के लिए सैन्य अभियान शुरू किया तो उसकी चपेट में वहां मौजूद तुर्क सैनिक भी आए।

50 से भी ज़्यादा तुर्क सैनिकों की मौत के बाद, इलाक़े में बड़ा युद्ध भड़कने की संभावना थी, लेकिन पिछले हफ़्ते अर्दोगान की मास्को यात्रा के दौरान, इदलिब में युद्ध विराम पर सहमति बन गई।

हालांकि सीरिया और तुर्की इदलिब में एक दूसरे पर युद्ध विराम का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन सीरिया अपनी सीमा में तुर्क सैनिकों को ग़ैर क़ानूनी और आक्रमणकारी मानता है, इसलिए उन्हें बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

तुर्की ने 2018 से उत्तरी सीरिया में 12 चौकियां क़ायम कर रखी हैं और उसके हज़ारों सैनिक हैयते तहरीर शाम जैसे आतंकवादी गुटों के आतंकवादियों के लाथ मिलकर सीरियाई सेना से लड़ रहे हैं।

तुर्की की यूरोप को सख़्त धमकी, जल्द ही जारी होगी नई नीति

तुर्क विदेशमंत्री ने कहा है कि यूरोपीय संघ में तुर्की की सदस्यता के मामले में समय को लंबा करने का दौर गुज़र चुका है।

सरकारी समाचार एजेन्सी के अनुसार तुर्क विदेशमंत्री मौलूद चावूश ओग़लू ने यह बात बल देकर कही कि उनका देश 26 मार्च तक यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए नयी नीति जारी कर सकता है।

उन्होंने शरणार्थियों के मामले में भी यूरोपीय संघ के दृष्टिकोणों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ यह मांग तो करता है कि शरणार्थियों को यूरोप न आने दिया जाए लेकिन वह इस क्षेत्र में शरणार्थियों को आवश्यक जीवन की महत्वपूर्ण सुविधाएं देने में कोई मदद नहीं कर करता।

चावूश ओग़लू ने तुर्की और यूनान की सीमाओं से शरणार्थियों के सैलाब की ओर संकेत करते हुए कहा कि यूरोप को स्थिति की संवेदनशीलता पूरी तरह समझ लेना चाहिए।

ज्ञात रहे कि यूरोपीय संघ में तुर्की की सदस्यता का मामला 2005 में शुरु हुआ था जो अभी तक पूरा नहीं हो सका।

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