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मुस्लिम_औरते_मुँह_क्यो_ढकती_है…कोरोना से बचने के लिए आप सब मुँह क्यो ढक रहे है…वो भी पढ़े लिखे और शिक्षित लोग भी?

Noori Khan
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#एक_सवाल_अक्सर_किया_जाता_था_कि_मुस्लिम_औरते_मुँह_क्यो_ढकती_है…
आज मैं पूछना चाहती हूँ कि कोरोना से बचने के लिए आप सब मुँह क्यो ढक रहे है…वो भी पढ़े लिखे और शिक्षित लोग भी…???
#इस्लाम_साइंस_है
मुस्लिम औरते प्रदूषण बीमारी डस्ट सांस से फैलने वाली बीमारी गन्दी नज़रों से बचने के लिए ही ढकती थी..और .ढकती है साथ ही ग्रामीण हिन्दू महिलाएं और बहने संस्कारी बहु और बेटी के रूप में घूँघट लेती है..
आज WHO भी मास्क पहनने के लिए बोल रहा है…
वज़ू का तरीका सुनियेगा नाक की नर्म हड्डी तक पानी का जाना…
हाथ मुँह दिन में 5 बार धोना…
सर के बालों को सिर्फ मुस्लिम टोपी से नही ग्रामीण पगड़ी से ढक कर रखते है..
ये कुदरत का निज़ाम है वक़्त वक़्त पर हिदायत और जब हम प्रकृति से सिर्फ लेते है उसे देना बंद कर देते है तो फिर वो खुद हिसाब बराबर करती है
काम वाली बाई जी आराम पर है महारानियां काम पर
प्रदूषण कम हुआ (सुना है उड़ीसा तट पर 8 लाख से अधिक कछुए आये है..)
क्राइम कम हुआ
आज घरों में हम पूजा और इबादत कर रहे है..
हमे लगता है हम स्वर्ग में है
क्या मालूम सड़क पर चलने वाले मजदूर असली स्वर्ग में रहेंगे
हम ये फैसला नही कर सकते कि दान देने वाला ही नेक है
हम भागती दौड़ती ज़िन्दगी में संस्कारों से दूर होते जा रहे थे उसने खुद हमे फिर से जानमाज़ पर और एक जाजम पर खड़ा कर दिया..
सब फैसले ऊपर वाले के हाथ मे है ये प्रकृति का निज़ाम है साहब …समझ सकते है तो इशारा समझ जाइये…जब ज़ुल्म हद से बढ़ता है तो फिर खुद ही खत्म होने लगता है अब भी हिन्दू और मुसलमान की बातों में मत पढ़िए इंसानियत से बढ़कर कुछ नही समझ लीजिए वरना उसे देना भी आता है वो कभी देकर इम्तिहान लेता है कभी छीनकर…
चाइना का बहिष्कार करने वाले 3000 करोड़ की मूर्ति भी चाइना से ही बनवाते है इस राशि से अस्पताल बनाते तो बात थी..
और हा ये मत सोच लेना कि हम किसी को दे रहे या मदद कर रहे हम ज़रिया मात्र है दाने- दाने पर खाने वाले का नाम लिखा होता है ..
#noorikhan
#File_Photo_Umrah_2016

Jitendra Narayan
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चाहे मुसलमानों को कोस लो, चाहे दलित आदिवासी को कोस लो, किसी शूदर को कोस लो, पंडित-ब्राहमण को कोस लो, आर्यों को कोस लो, द्रविड़ों को कोस लो, नॉर्थ ईस्ट को कोस लो, बिहार को कोस लो, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।

ये तीन फैक्ट किसी भी सूरत में नहीं बदलने वाले, कि,

1. इंडिया में कोरोना का नामनिशान तक भी नहीं था।

2. विदेशों से हवाई यात्रा पर आने वाले रईस और मिडल क्लास के लोग इस कोरोना वाइरस को इंडिया में लेकर आए।

3. इन कोरोना कैरियर्स को प्रशासन ने हवाई अड्डे पर नहीं रोका, बल्कि इंडिया भर में कोरोना फैलाने के लिए इनको खुल्ला छोड़ दिया।

और, हमारे मौजूदा लीडरों की यह दो बातें आईंदा किताबों में पढ़ाई जाएगी कि,

1. कोरोना के लिए घरों में बंद रहने को मजबूर लोगों को राहत देने के लिए सरकारों ने धार्मिक सीरिअलों की तीस साल पुरानी कैसटों को झाड़पूंछ कर फिर से चलाया।

2. चार पुड़ी और तीन चम्मच दाल वाले राहत पैकट पर भी प्रधानमंत्री साहब की तस्वीरें छापने पर पैसे ख़र्च किए गए।

-Balraj Kataria

 

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