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“हर ज़ोर, ज़ुल्म की टक्कर में जेहाद ‘संघर्ष’ हमारा नारा है”

Mohammad Imran Ansari
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“जेहाद (संघर्ष)” का मतलब है मेहनत और मशक़्क़त करना, अपने परिवार का हलाल (शुद्ध) कमायी से पालन-पोषण करना। इस्लाम में इसकी बहुत बड़ी अहमियत है, जेहाद इस्लाम का बहुत ही पवित्र शब्द है, जो इस्लाम के अन्तिम नबी मुहम्मद (स०) के सृष्टि में अवतरित होने से पूर्व से ही अरबी भाषा की उत्पत्ति के समय से ही बोलचाल में और अरब के बुद्धिजीवियों द्वारा सत्य, अहिंसा और न्याय को स्थापित करने में प्रयुक्त होता रहा है। दो तरह के जेहाद बताए गए हैं। एक है जेहाद अल अकबर यानी बड़ा जेहाद और दूसरा है जेहाद अल असग़र यानी छोटा जेहाद। जेहाद अल अकबर, अहिंसात्मक संघर्ष है जिसमें व्यक्ति अपने सुधार के लिए प्रयास करता है अपनी बुराइयों से संघर्ष करता है, ये शरीर और आत्मा के बीच का जेहाद (संघर्ष) है, जैसे, किसी भी परिस्थिति में सत्य बोलना जेहाद (संघर्ष) है। स्वयं के क्रोध का दमन जेहाद (संघर्ष) है। भ्रष्टाचार समाप्त करना जेहाद (संघर्ष) है। यदि शरीर अनैतिक तरीक़े से किसी के साथ व्यभिचार करना चाहता है और आत्मा उसे रोकती है और वो व्यभिचार (कुकर्म) नहीं करता और सामने वाले को भी व्यभिचार (कुकर्म) से रोकता है तो ये शरीर और आत्मा के बीच का जेहाद (संघर्ष) है। इसी प्रकार, अपनी वासना की तृप्ति हेतु हस्तमैथुन ना करना भी जेहाद (संघर्ष) है। कोई व्यक्ति, यदि नमाज़ नहीं पढ़ता है, तो प्रतिदिन पाँच वक़्त नमाज़ पढ़ना उसका जेहाद (संघर्ष) है। रोज़े ना रखने ना रखने वाला यदि रोज़े रखने लग जाये तो वह स्वयं से जेहाद (संघर्ष) करता है। जेहाद (संघर्ष) का उद्देश्य है बुरी सोच या बुरी ख़्वाहिशों को दबाना और कुचलना। इसी प्रकार, यदि किसी निर्धन व्यक्ति को अपने परिवार का पालन पोषण करना है, उसके पास पैसे नहीं हैं यदि वह काम की तलाश में जाता है, रास्ते में उसे कुछ रुपये गिरे हुये दिखते हैं। उसको लालच तो आता है किन्तु वो उनको अपने लिये नहीं उठाता है और कार्य की तलाश में आगे बढ़ जाता है और मेहनत की कमाई से बच्चों की परवरिश करता है, चोरी भी नहीं करता है, तो वो अपने लालची विचारों के साथ जेहाद(संघर्ष) करता है। इसीप्रकार, कोई विधवा महिला अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिये वैश्यावृत्ति ना कर किसी नैतिक कार्य की मेहनत की कमायी धनराशि से अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है तो वो महिला जेहाद (संघर्ष) करती है। यदि किसी मुसलमान को किसी ग़ैर मुसलमान जो नास्तिक अथवा ईश्वर के अलावा ईश्वर और मानव द्वारा बनायी गयी वस्तुओं की इबादत करती/करता है, से प्रेम हो जाता है, तो उस प्रेम को पाने के स्थान पर उसका त्याग करता है और दूसरों को भी ऐसा त्याग करने के लिये प्रेरित करता है है तो जेहाद(संघर्ष) करता है, जिससे कि दो समुदाय शांतिपूर्वक और प्रेम और भाईचारे के साथ रह सकें। यदि कोई मुसलमान ग़लत तरीक़े से किसी अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति या ज़मीन इत्यादि क़ब्ज़ाना चाहता है और उसका ज़मीर(अंतर्मन) इसकी इजाज़त नहीं देता है और वो उसकी सम्पत्ति या ज़मीन नहीं क़ब्ज़ाता है और ऐसा करने से दूसरों को भी रोकता है तो वह जेहाद (संघर्ष) करता है। जेहाद अल असग़र का उद्देश्य लोगों को न्याय दिलवाने के लिये अन्यायी राजा के समक्ष लोगों संरक्षण के लिए जेहाद (संघर्ष) करना होता है। अन्यायी राजा के सामने हिम्मत कर उसे न्याय करने हेतु बोलना और बाध्य करना जेहाद (संघर्ष) है। जब सत्य, अहिंसा और न्याय के अनुपालन की आज़ादी न दी जाए, उसमें रुकावट डाली जाए, या उनपर उनकी हमला हो, लोगों का शोषण किया जाए, उनपर अत्याचार किया जाए तो उसको रोकने की कोशिश करना जेहाद(संघर्ष) अल असग़र(छोटा) है। अर्थात मुसलमान(वह व्यक्ति जिसकी जीभ और हाथ से लोग सुरक्षित हैं) द्वारा स्वयं की आध्यात्मिक शान्ति, विश्व प्रेम, विश्व शांति, वैश्विक भाई-चारे हेतु अल्लाह (ईश्वर) के बताये गये, सत्य, न्याय और अहिंसा के मार्ग पर चलना और लोगों को उसपर चलने के लिये प्रेरित करना, लोगों को, काफ़िरों (असुरों) के अन्याय, दुष्कर्म, शोषण इत्यादि से बचाना और अपना बलिदान करना ही जेहाद (संघर्ष), कहलाता है। जैसा मुहर्रम के महीने में हसन-हुसैन और उनके साथियों ने करबला में अपने जीवन का बलिदान दिया। जिसे अरबी भाषा में “जेहाद फ़ी सबिलिल्लाह” कहते हैं।
जैसे:-

“हर ज़ोर, ज़ुल्म की टक्कर में जेहाद (संघर्ष) हमारा नारा है”


Prince Soni
@PrinceAAP
प्रेसवार्ता लखनऊ।

भाजपा मित्रों द्वारा 10 लाख 50 हज़ार करोड़ की लूट, चरमराई अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी जैसे मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए NPR-NRC में उलझा रही भाजपा सरकार –
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Wasim Akram Tyagi
@akramtyagi
कोरोना से बचने के लिए दिल्ली में हिन्दूहसभा के सदस्यों ने गौ मूत्र का सेवन किया और कहा कि दुनियाभर के लोग इसी पर अमल करें तो ये बीमारी पास नहीं आएगी। वीडियो
@razashoaib87

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