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#CAA के विरोध में आंदोलन करना जनता का अधिकार है लेकिन इसके पक्ष में आंदोलन करना हरामज़दगी है!

Mohd Sharif

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कोई भी शासक जैसे जैसे निरंकुश होता है उसी के अनुसार वह जन विरोधी कार्य करके ज़ुल्म की तरफ़ कदम बढ़ाता जाता है। हालांकि इस देश में लोकतान्त्रिक व्यवस्था है लेकिन बहुदलीय चुनावी भागीदारी के कारण एक तिहाई से भी कम वोटों के ज़रीये बहुमत की सरकार वजूद में आ जाती है। इस प्रकार शासक यदि निम्न स्तर के और आपराधिक प्रवृत्ति के हों तो वह भविष्य के लिए वोटों का ध्रुवीकरण करने के मक़सद से बाक़ी दो तिहाई जनता से शत्रु की तरह व्यवहार करते हुए ज़ुल्म का रास्ता अपना लेते हैं ताकि ज़ुल्म से बचने के उपाय के तौर पर विपक्षी विचारधारा के लोग भी उनका समर्थन करने के लिए मजबूर हो जाएं।

भारत में भाजपा सरकार इसका जीता जागता उदाहरण है। चूंकि साम्प्रदायिकता को हथियार बना कर इस पार्टी का उदय हुआ है और जैसे जैसे यह पार्टी मुसलमानों की जान माल और इज़्ज़त से खिलवाड़ करती है उसी के अनुसार हैवानी मानसिकता वाले लोग इस पार्टी के समर्थन में ध्रुवीकृत होते जाते हैं इसके लिये लालच व दबाव की नीति अपना कर लोकतन्त्र के बाक़ी तीनों स्तम्भ कठपुतली बना लिये गए हैं और उनके ज़रीये मुसलमानों पर हर तरह के ज़ुल्म किये जा रहे हैं। इस तरह जो लोग मुस्लिम विरोधी विचारधारा के हैं उनका तो मुस्लिम मुक्त भारत के निर्माण का सपना दिखा कर समर्थन प्राप्त किया जाता है इसके अलावा हिन्दुत्त्व का नशा पिलाए गए लोगों को हिन्दू राष्ट्र बनाने के वादे से प्रलोभित किया हुआ है और लोकतन्त्र के बाक़ी तीनों स्तम्भों को कठपुतली की तरह नाचने पर मजबूर होते देख कर गुण्डा तत्त्व इनका सहयोग प्राप्त करके अपना भविष्य सुरक्षित समझ कर इनसे जुड़े हुए हैं और यही गुण्डा तत्त्व इस पार्टी की ताक़त बने हुए हैं। इस प्रकार लगभग एक तिहाई वोटर इनके गिर्द जमा हैं जिनकी बदौलत इस पार्टी को सत्ता प्राप्त करने का अवसर मिला है जो देश का दुर्भाग्य साबित हो रहा है।

इसी राह पर आगे बढ़ते हुए हमेशा राज करने की योजना के तहत सी ए ए अर्थात नागरिकता संशोधन क़ानून बनाया गया है जिसको पूर्णता प्रदान करने के लिए अपने पक्ष के लोगों से एन आर सी लागू करने का वादा और विपक्षियों से एन आर सी लागू करने की धमकी दी गई है जिसके तहत एन आर सी में नाम आने से जो लोग वंचित रह जाएंगे उनमें से मुसलमानों को नागरिकता विहीन करके शेष ग़ैरमुस्लिमों को कुछ शर्तों के साथ नागरिकता दिये जाने की बात कही गई है और उन शर्तों में वोट देने के अधिकार से वंचित किया जाना भी हो सकता है।

सी ए ए के अन्तर्गत नागरिकता देने का जो प्रावधान है उसके तहत केवल ग़ैरमुस्लिमों को ही नागरिकता दिया जाना तय किया गया है जो धार्मिक भेदभाव ग्रस्त होने के कारण संविधान का उल्लंघन करता है और जन विरोधी भी है। जागरूक जनता इस क़ानून के दुष्परिणाम को भांप कर इसके विरोध में आंदोलन रत है जिसको दबाने के लिए सरकार पुलिस बल व गुण्डा बल का प्रयोग करके शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों को दबा रही है और इस तरह बड़ी तादाद में लोग क़त्ल किये जा रहे हैं।

जनता द्वारा इस जन विरोधी क़ानून के ख़िलाफ़ आंदोलन करना उसका अधिकार ही नहीं कर्तव्य भी है ताकि इस क़ानून की चपेट में आने वाले करोड़ों लोगों को बर्बाद होने से बचाया जा सके। सरकार बल प्रयोग से जब जनता का मनोबल न तोड़ सकी तो उसने अपने गुण्डा तत्त्वों को क़ानून के समर्थन में सड़कों पर उतार कर गुण्डागर्दी के ज़रीये क़ानून के विरोध में पहले से हो रहे आंदोलन में सम्मिलित लोगों पर हमले कराने शुरू कर दिये और पुलिस बल को उनके सहयोग का आदेश दे दिया गया। इन सब हालात को देखते हुए इस क़ानून के समर्थन में आंदोलन करने के इस कार्य को हरामज़दगी कहना अनुचित न होगा।

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