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video : अमित शाह ने दिल्ली दंगों को लेकर पुलिस की तारीफ़ की : दिल्ली में मुसलमानों के साथ हुई हिंसा एक सुनियोजित साजिश थी : रिपोर्ट

 

दिल्ली हिंसा में पुलिस की भूमिका की अमित शाह ने की तारीफ़, संसद में हंगामा

दिल्ली हिंसा को लेकर जहां पूरी दुनिया दिल्ली पुलिस और कट्टरपंथी हिन्दुओं गुटों को इस हिंसा का ज़िम्मेदार मान रही है वहीं भारत के गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली पुलिस की पीठ थपथपा रहे हैं।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत की संसद में नियम-193 के तहत बुधवार को दिल्ली में हुई हिंसा पर चर्चा हुई जिसके बाद भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी सरकार पर उठे तमाम सवालों के जवाब दिए और अपनी सरकार का पक्ष रखा। बहस के दौरान कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। अमित शाह ने बहस के अंत में अपने जवाब की शुरुआत दंगा पीड़ितों के परिवार वालों के प्रति सहानुभूति जताते हुए की और कहा कि दिल्ली हिंसा को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि होली पर किसी की भी भावना ना भड़के, इसलिए हमने दंगों पर अब चर्चा की है। अमित शाह ने यह भी दावा किया कि, 25 फ़रवरी की रात 11 बजे के बाद से कोई हिंसा नहीं हुई है।

भारतीय गृह मंत्री ने दिल्ली पुलिस की तारीफ़ करते हुए कहा कि, दिल्ली पुलिस ने दंगे को दिल्ली के चार प्रतिशत क्षेत्र और 13 प्रतिशत आबादी के बीच ही सीमित रखा। उन्होंने कहा कि, दिल्ली पुलिस ने अच्छा काम किया है। दिल्ली पुलिस ने पहली सूचना मिलने के बाद केवल 36 घंटे में पूरी स्थिति पर क़ाबू पा लिया। उन्होंने कहा कि, दिल्ली पुलिस ने अब तक 700 से ज़्यादा एफ़आईआर दर्ज की हैं, 2647 लोग हिरासत में लिए गए हैं, फ़ोन कॉल के डिटेल निकाली जा रही हैं, लोगों से दंगों से जुड़ी फुटेज मांगी जा रही है ताकि जांच बेहतर ढंग से की जा सके। अमित शाह ने कहा कि, 1100 से ज़्यादा लोगों की पहचान की जा चुकी है जिनमें से 300 से ज़्यादा लोग यूपी से आए थे।

भारत के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के संसद में नेता अधीर रंजन ने कहा, “काफ़ी समय से इस चर्चा की माँग थी, होली का त्योहार ख़त्म हुआ, पर दिल्ली की ख़ून की होली हमारा पीछा नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि, सारा हिंदुस्ताना बैचेन है और जानना चाहता है कि कैसे यह घटना हुई और सरकार क्या कार्रवाई कर रही है कि दोबारा ऐसी घटना ना हो।” उन्होंने कहा कि ‘हिंसा में किसी की जय नहीं होती, पराजय सिर्फ़ इंसानियत की होती है।’ अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए अधीर रंजन ने कहा कि ‘सरकार कोशिश करती तो दिल्ली में हिंसा रोकी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि, यह देश की राजधानी है, यहां की पुलिस को हम मॉर्डन मानते हैं, हथियार की कोई कमी नहीं है, फिर यह घटना क्यों घटी? रंजन ने कहा कि, तीन दिन लगातार यह घटना कैसे घटी, सरकार को जवाब देना होगा, गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन तक कहां थे, दिल्ली के क़ानून की ज़िम्मेदारी उनके पास है।’

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में इसी वर्ष फ़रवरी के अंत में उस समय हिंसा भड़क गई जब इस देश की मोदी सरकार द्वारा बनाए गए विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून का दो महीनों से अधिक से समय से शांतिपूर्ण तरीक़े से जारी विरोध-प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर कट्टरपंथी हिन्दू गुटों ने पुलिस के साथ मिलकर उनपर हमला कर दिया था। विशेष बात यह है कि इन्हीं दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प भारत के दौरे पर आए हुए थे।

दिल्ली हिंसा में मारे गए अज्ञात लोगों के शवों का अब होगा अंतिम संस्कार, हाई कोर्ट ने दी इजाज़त

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली में हुई हिंसा में मारे गए लोगों के अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करने की इजाज़त दे दी है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्हीं अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार होगा, जिनके नाम समाचार पत्रों में दो सप्ताह पहले प्रकाशित किए गए थे।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में हाई कोर्ट ने मारे गए लोगों के अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करने की इजाज़त दे दी है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्हीं अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार होगा, जिनके नाम समाचार पत्रों में दो सप्ताह पहले प्रकाशित किए गए थे। इससे पहले हाई कोर्ट ने दिल्ली के सरकारी अस्पतालों को 11 मार्च तक अज्ञात शवों का निपटान नहीं करने और मारे गए शवों के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने को कहा था। अदालत का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंसा के लगभग तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी कई ऐसे लोग हैं जो अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले कहा था कि सरकारी अस्पतालों के शवगृहों में लाए गए अज्ञात शवों के बारे में अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर पूरी जानकारी प्रकाशित करें। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति आई एस मेहता की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया था। बता दें कि दिल्ली में हाल में हुए दंगों के बाद से लापता अपने एक रिश्तेदार के बारे में जानकारी को लेकर एक व्यक्ति ने यह याचिका दायर की थी।

उल्लेखनीय है कि भारत की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को कहा कि हाल में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के सिलसिले में उसने 600 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। पुलिस ने अपना बयान जारी कर कहा कि 654 दर्ज मामलों में से 47 शस्त्र क़ानून से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने कहा कि कुल 1820 लोगों को सांप्रदायिक दंगों के मामले में या तो हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है।

ज्ञात रहे कि, विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून सीएए, एनआरसी और एनपीआर का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर भारत के कट्टरपंथी हिन्दू गुटों ने उनपर हमला कर दिया था। इस हमले के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 50 से अधिक लोगों की जान गई थी जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा एक सुनियोजित साजिश थी : रिपोर्ट

नई दिल्ली | एजेंसी।बुद्धिजीवियों के एक समूह द्वारा दिल्ली हिंसा पर तैयार की गई तथ्यान्वेषी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा ‘सुनियोजित साजिश’ थी। इस समूह ने अपनी रिपोर्ट में इन हिंसा की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराए जाने की बात भी कही है। इस रिपोर्ट में पीड़ितों के पुनर्वास की सिफारिश की गई है और केन्द्र सरकार से लोगों में विश्वास बहाली के कदम उठाने का भी आग्रह किया गया है।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल एंड एकेडेमीज (जीआईए) की रिपोर्ट ‘दिल्ली रॉयट्स, 2020 – रिपोर्ट फ्रॉम ग्राउंड जीरो’ में कहा गया है कि ये हिंसा एक शहरी नक्सल-जिहादी नेटवर्क का सबूत था, जिसने दंगों की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया।

“दिल्ली हिंसा, 2020 पूर्व नियोजित थी। ‘क्रांति के वामपंथी-जिहादी मॉडल’ के सबूत मिले हैं, जिन्हें दिल्ली में अंजाम दिया गया है और इसे अन्य स्थानों पर दोहराए जाने की भी कोशिश है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली हिंसा नरसंहार नहीं था। यह दिल्ली के विश्वविद्यालयों में काम कर रहे वामपंथी अर्बन नक्सल नेटवर्क द्वारा अल्पसंख्यकों के सुनियोजित और व्यवस्थित कट्टरपंथी विचारधारा का एक दुखद परिणाम है। इससे दोनों समुदायों को बहुत नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि धरना स्थलों पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) जैसे जिहादी संगठनों की मौजूदगी देखी गई है। जीआईए, 2015 में बनाया गया एक ऐसा समूह है, जिसमें पेशेवर महिलाओं, उद्यमियों, मीडिया के लोगों और सामाजिक न्याय और राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रतिबद्ध शिक्षाविद शामिल हैं।

इसके सदस्यों में एडवोकेट मोनिका अरोड़ा, दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर प्रेरणा मल्होत्रा (रामलाल आनंद कॉलेज), सोनाली चितलकर (मिरांडा हाउस), श्रुति मिश्रा (पीजी डीएवी कॉलेज – ईवनिंग) और दिव्यांशा शमार् (इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स) शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मुसलमानों की कट्टरपंथी सोच के कारण भी हिंसा हुई। इसमें कहा गया, “सभी धरना स्थलों पर महिलाओं को सबसे आगे रखा गया, जबकि पुरुषों ने इस ढाल के पीछे से काम किया।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएसआईएस इस प्रकार की क्रूर हत्याएं करता है, लिहाजा इस हिंसा का संबंध राष्ट्रीय सीमा के पार से भी हो सकता है। इसके अलावा हर गली में यह कहा गया कि दंगाई बाहरी थे।

रिपोर्ट में कहा है, “हम दृढ़ता से सिफारिश करते हैं कि हिंसा की तीव्रता को देखते हुए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी जानी चाहिए। दिल्ली में 15 दिसंबर, 2019 से अब तक हुई सभी घटनाओं की जांच होनी चाहिए।”


अमित शाह ने बताया क्यों नहीं गए दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में

गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली दंगा को लेकर बुधवार को लोकसभा में जवाब देते हुए कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दंगा रोकने में दिल्ली पुलिस की भूमिका का जिक्र करते हुए शाबाशी दी। गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली दंगा को फैलने न देना एक बड़ी चुनौती थी और दिल्ली पुलिस ने इसे बखूबी अंजाम दिया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में 36 घंटे तक दंगे हुए। लेकिन, पुलिस ने इस दंगे को 36 घंटे बाद काबू पा लिया था। अमित शाह ने कहा कि दिल्ली दंगा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डिनर कार्यक्रम में भी वह शरीक नहीं हुए थे, बल्कि वह दिल्ली पुलिस के साथ बैठकर इस पूरी घटना निगरानी कर रहे थे।

गृह मंत्री ने कहा कि 25 और 26 को उनकी ही अध्यक्षता में दिल्ली दंगा रोकने को लेकर बैठकें हुई। अमित शाह ने कहा कि दंगे के वक्त किसकी क्या जिम्मेदारी होती है ये नहीं देखा जाता है, लिहाजा उन्होंने ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार प्रमुख से कहा था कि वे दंगा प्रभावित इलाकों में जाए।

अमित शाह ने कहा- मैं इसलिए दंगा में नहीं गया क्योंकि उसके चलते पुलिस मेरे पीछे रहती, जबकि पुलिस वहां पर लोगों को शांत करने में लगी थी।

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HM Amit Shah on Delhi violence: I did not go there myself as I didn’t want the police to divert resources towards my security arrangements
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HM Amit Shah: US Pres’s program was pre-scheduled, it was in my constituency, my visit there was also pre-scheduled. The next day, when US Pres visited Delhi, I wasn’t present at any event. The whole time I was sitting with Police officials. I only requested NSA to visit the area

अमित शाह ने कहा कि दंगे में 2647 लोग पकड़े गए हैं और 700 एफआईआर दर्ज की गई। सॉफ्टवेयर के जरिए लोगों की पहचान की जा रही है। सॉफ्टवेयर की जरिए 1100 लोगों की पहचान की गई है। सीसीटीवी और मीडिया से इस बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। 40 टीमें इन लोगों की गिरफ्तारी को लेकर बनाई गई है।

गृह मंत्री ने कहा कि 2 एसआईटी टीमें बनाई गई हैं जो सीरियस टाइम के केस की जांच करेगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान ऐसे 60 एकाउंट सक्रिय थे जो दंगे के बाद बंद हो गए।

दंगों में 52 भारतीय की मौत
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अमित शाह ने कहा कि दंगों में 52 भारतीय की मौत हो गई, 526 घायल हुए और 371 दुकानें जलाई गई। उन्होंने कहा कि वे इसे हिन्दू-मुसलमानों में नहीं बाटेंगे।

उन्होंने कहा कि दिल्ली दंगा पर 2 मार्च को चर्चा की मांग की गई थी लेकिन मैंने कहा था कि इस पर चर्चा होली के बाद की जाए। उसकी वजह ये थी कि होली के दौरान भी कुछ जगहों पर दंगा भड़क सकती थी। उन्होंने कहा कि कुछ नेता चाहते थे कि होली से पहले ही इस पर चर्चा कराई जाए।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दो समूह में हिंसक झड़प ने दंगा का रूप ले लिया और देखते ही देखते कई जिंदगियां तबाह हो गई।

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