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अमरीका के लिए मदद लेकर रूसी सैन्य विमान रवाना, ट्रम्प के झूठ अमेरिका के लिए बने मुसीबत : रिपोर्ट

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सहायता की पेशकश स्वीकार किए जाने के बाद, कोरोना वायरस से निपटने के लिए चिकित्सा सामग्री लेकर एक रूसी सैन्य मालवाहक विमान अमरीका के लिए रवाना हो गया है।

बुधवार को रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान जारी करके बताया कि यह विमान मास्क और चिकित्सा उपकरण लेकर अमरीका के लिए रवाना हो गया है।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मदद के लिए मॉस्को की प्रशंसा करते हुए कहा है कि काफ़ी बड़ा विमान भर कर मदद भेजी गई है, तथा चीन और अन्य देशों ने भी ऐसा ही किया है।

ट्रम्प का कहना था कि चीन ने हमें कुछ सामान भेजा है जो काफ़ी अच्छा था। रूस ने हमें बहुत बड़े विमान में ज़रूरी चीज़ें और चिकित्सा उपकरण भेजे हैं, जो एक बहुत अच्छा क़दम है।

रूस ने यह मदद मंगलवार को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत के बाद भेजी है, जिसमें उन्होंने तेज़ी से महामारी के फैलने और अमरीका में सुरक्षात्मक विस्तुओं की कमी पर चर्चा की थी।

रूसी विमान के सहायता सामग्री लेकर अमरीका के लिए रवाना होने से पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह एलान कर दिया था कि यह मदद एक काफ़ी बड़े विमान द्वारा पहुंचने वाली है, मास्को ने इस बात की पुष्टि कर दी थी कि रूस मदद के लिए तैयार हो गया है, इसलिए कि महामारी सभी को प्रभावित कर रही है और दुनिया में इससे कोई भी अछूता नहीं है।

हालांकि अमरीका में कुछ लोग रूस की इस सहायता से ख़ुश नहीं हैं और उनका मानना है कि रूस को इस बहाने दुष्प्रचार और जासूली का मौक़ा मिल जाएगा। जबकि रूस ने यह मदद ऐसे वक़्त में की है कि जब अमरीका बुरी तरह कोरोना महामारी से जूझ रहा है और फ़्रंटलाइन पर इससे लड़ने वाले चिकित्सकों और नर्सों के पास ज़रूरी सुरक्षात्मक वस्तुओं की भारी कमी है।

पिछले हफ़्ते भी मास्को ने 600 वेंटिलेटर, मास्क और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम इटली के लिए भेजी थी, जहां किसी भी देश से अधिक कोविड-19 ने तबाही मचाई है

अमेरिका ऐसे बना कोरोना का सबसे बड़ा गढ़

अमेरिका में कोरोना वायरस का पहला मामला जनवरी के आखिरी दिनों में सामने आया. लेकिन अब वहां इस वायरस से संक्रमण के केसों की तादाद दो लाख की तरफ बढ़ रही है. आखिर ऐसा हुआ कैसे?

गंभीर स्थिति
अमेरिका में कोरोना विस्फोट की कई वजहें हैं, हालांकि कई जानकार आशंका जता रहे हैं कि सबसे बदतर स्थिति अभी आनी बाकी है. इस वक्त अमेरिका में इस वायरस के सबसे ज्यादा मामले हैं.

ट्रंप की चूक
जब अमेरिका में वायरस फैलना शुरू हुआ तो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर इसे गंभीरता से ना लेने के आरोप लगे. उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि ये वायरस ज्यादा लोगों में फैले.

सुस्त टेस्टिंग
अमेरिका में सबसे पहले कोविड19 बीमारी पश्चिमी तट पर स्थित वॉशिंगटन और कैलीफोर्निया जैसे राज्यों में शुरू हुई. टेस्टिंग की रफ्तार धीमी होने की वजह से सभी संक्रमित लोगों का पता लगाने में देरी हुई.

सुस्त टेस्टिंग
अमेरिका में सबसे पहले कोविड19 बीमारी पश्चिमी तट पर स्थित वॉशिंगटन और कैलीफोर्निया जैसे राज्यों में शुरू हुई. टेस्टिंग की रफ्तार धीमी होने की वजह से सभी संक्रमित लोगों का पता लगाने में देरी हुई.

कानूनी अड़चनें
सरकार ने शुरू में नियामक अड़चनों में ढील देने से इनकार कर दिया. इसके चलते अमेरिकी राज्य और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों के मुताबिक अपनी खुद की टेस्टिंग किट तैयार नहीं कर पाए.

खराब किटें
सभी शुरुआत सैंपलों को टेस्ट के लिए अटलांटा के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) में भेजा गया. बाद में सीडीसी की तरफ से राज्यों को जो टेस्ट किट भेजी गईं, वे भी खराब थी. इससे टेस्टिंग में और विलंब हुआ.

ढीला रवैया
अमेरिका में पहला मामले सामने आने के एक महीने बाद 29 फरवरी को वहां इस वायरस से पहली मौत हुई. तब कहीं जाकर अमेरिकी सरकार ने प्रतिबंध हटाया और प्राइवेट सेक्टर इस मामले में सक्रिय हो सका.

देरी ने की गड़बड़
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में इमरजेंसी मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ गेबोर केलेन कहते हैं, “अगर हम जल्दी ज्यादा से ज्यादा मामलों का पता लगा लेते तो वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जगहों को बंद कर सकते थे.”

बचाव
अमेरिकी अधिकारी अपने रुख का बचाव करते हैं. वह बार बार कह रहे हैं कि दक्षिण कोरिया में टेस्ट के जिस तरीके को शुरू में सबसे प्रभावी बताया गया, उससे कभी कभी गलत नतीजे भी सामने आए. रिपोर्ट: एके/एनआर (एएएफपी)

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