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कोरोना नस्लपरस्त बिल्कुल नहीं था मगर ट्रम्प और ”ये” बना देना चाहते हैं!

कोरोना नस्लपरस्त बिल्कुल नहीं था मगर ट्रम्प और जान्सन उसे बना देना चाहते हैं, बड़ी संख्या में चपेट में हैं अफ़्रीक़ी मूल के लोग और नज़र आने लगे हैं विद्रोह के लक्षण!

कोरोना वायरस की महामारी अपने चरम बिंदु पर है और विशेष रूप से पश्चिमी समाजों में भारी तबाही मचा रही है। मगर इस बीच नस्लपरस्ती के बड़े शर्मनाक आयाम भी ज़ाहिर होने लगे हैं।

अमरीका में किए गए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि काले अमरीकियों की पीड़ा बहुत ज़्यादा है और कोरोना से मरने वालों में अधिक संख्या उन्हीं की है। यहां तक कहा जा रहा है कि कालों को अस्पताल, दरवाज़े से ही लौटा दे रहे हैं और बेड ख़ाली न होने की बात कह कर उन्हें मरने के लिए घर भेज दे रहे हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के अच्छे दोस्त बोरिस जानसन भी नस्ल परस्ती वाली सोच रखते हैं और इसका ख़मियाज़ा भी उन्हें भुगतना पड़ा। वह कोरोना से संक्रमित होकर अस्पताल पहुंचे। अलबत्ता अब उन्हें आईसीयू से बाहर लाया गया है और उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है। बहरहाल ब्रिटेन में कोरोना के चलते हेल्थ सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर है। मरने वालों की संख्या हज़ारों में है। इस समय जो तसवीर है वह बड़ी भयानक है।

पश्चिम का नस्लपरस्त और स्वार्थी पूंजीवादी समाज अपने को अल्पसंख्यकों विशेष रूप से कालों से मुक्त कर लेना चाहता है साथ ही बूढ़ों को तो बे मौत मार देने पर तुला हुआ है क्योंकि उन्हें एक बोझ के रूप में देखता है।

अरब मूल के एक ब्रितानी मित्र ने जो डाक्टर हैं मुझे बताया कि वह ख़ुद भी कोरोना से संक्रमित हो गए और उनकी वजह से उनका परिवार भी संक्रमित हो गया। उनका कहना है कि न कोई दवा मिल रही है और न देखभाल की जा रही है इसलिए हर चीज़ का भारी अभाव हो गया है। मेरे मित्र ने बताया कि हमने कोरोना का टेस्ट कराया और एक हफ़्ता इंतेज़ार करते रहे मगर कोई जवाब ही नहीं आया। पता चला कि टेस्टिंग की मशीनें काम ही नहीं कर रही हैं।

चरमपंथी फ़ासीवादी सोच अब सत्ता में बैठी हुई है और वह सारे प्रवासियों के साथ बेरहमी का बर्ताव कर रही है।

तीन महीने तक ट्रम्प ने कोरोना महामारी के भयानक ख़तरे को नज़रअंदाज़ किया और अब जाकर उन्हें पता चला है कि अफ़्रीक़ी मूल के अमरीकी इस महामारी में ज़्यादा निशाना बने हैं तो अब उन्होंने हमदर्दी जताई है इसलिए कि उनकी नज़र में अमरीका वह है जहां केवल गोरे बसते हों।

अमरीका में कालों की क्रांति करवट ले रही है और इसको कोरोना से नई रफ़तार मिली है। ट्रम्प और उनके दामाद कुशनर के व्यापार के दिन अब समाप्त होने वाले हैं। कोई नया मार्टिन लूथर किंग उभरने वाला है जो गोरों की नस्ल परस्ती और वर्चस्व को कुचल देगा। यही चीज़ ब्रितानी समाज में भी नज़र आ रही है जिसे ट्रम्प के चेलों ने यूरोपीय संघ से बाहर निकाल कर कमज़ोर कर दिया है। वह घड़ी आने वाली है जब नस्लपरस्तों का हिसाब लिया जाएगा।

स्रोतः रायुल यौम

इधर भारत में कोरोना ‘मुसलमान’ निकला है, तब्लीग़ी जमायत को लेकर भारतीय मीडिया ने इस वक़्त पर जबकि दुनियांभर में मातम छाया हुआ है, मुसलमानों की ऐसी तैसी करने की ठान ली है, कोई इक्का दुक्का समाचार चैनल ही बचा होगा जो ‘कोरोना’ को तब्लीग़ी जमायत के बहाने मुसलमानों से न जोड़ रहा हो, खतरनाक हैडिंग, ब्रेकिंग न्यूज़ चलायी जा रही हैं,,,मौतों पर दुःख, अफ़सोस ज़ाहिर करने की जगह पर जश्न मनांए जा रहे हैं,,,गो कोरोना गो,,,तमाशा बना दिया है

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