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जर्मनी ने कैसे लड़ी कोरोना की लड़ाई, दुनिया हैरत से देख रही है : Report

​​​​​​​”मुझे गर्व है कि मैं उस देश में रहती हूं जहां का स्वास्थ्य सिस्टम बहुत मज़बूत है। जर्मनी की शासन व्यवस्था ने साबित किया है कि उसे इंसानों से बहुत प्यार है।“ यह एक जर्मन किशोरी की टिप्पणी है जिसने रायुल यौम अख़बार से बात की।

मगर जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने सफलता का श्रेय लेने के बजाए देश के नागरिकों से कहा कि जर्मनी को कोरोना से संघर्ष में मिलने वाली विजय आंशिक और अस्थायी है, हमें स्वास्थ्य संबंधी कड़े उपायों पर अमल करना जारी रखना होगा।

कोरोना की महामारी के दौरान भी एंगेला मर्केल ने साबित किया कि वह फ़ौलादी महिला हैं लेकिन उनका दिल बहुत नर्म है। आज मीडिया उन्हें एक आदर्श के रूप में पेश कर रहा है।

पर्यवेक्षक कहते हैं कि जर्मनी ने पहले से ही हेल्थ सेक्टर को बहुत बुनियादी विभाग मानते हुए उसे मज़बूत बनाया जिसका नतीजा यह हुआ कि कोरोना की महामारी फैली तो जर्मनी को स्पेन, इटली और ब्रिटेन जैसी दुर्दशा का सामना नहीं करना पड़ा। जर्मनी के पास पहले से ही 29 हज़ार आईसीयू बेड थे जिनमें 20 हज़ार वेंटीलेटर से युक्त थे। जब कोरोना वायरस फैला तो जर्मनी ने फ़ौरन यह संख्या बढ़ाकर 40 हज़ार कर दी।

इटली ने पूरे संकट के दौरान 8 लाख से कुछ अधिक टेस्ट किए जबकि जर्मनी हर हफ़्ते 5 लाख से अधिक टेस्ट कर रहा है। जर्मनी में संक्रमितों की तुलना में मृतकों की संख्या 1.2 प्रतिशत रही है जो अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है।

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