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ट्रम्प चिल्लाने और गालियां देने में व्यस्त : चीन ने ख़ुद को पहले स्थान पर पहुंचा दिया!

चीनी अपने संयम के लिए मशहूर हैं। अपने सारे ज़रूरी काम ख़ामोशी से करते रहते हैं। उन्हें अपने ख़िलाफ़ होने वाले प्रोपैगंडे की भी ज़्यादा फ़िक्र नहीं रहती। वह अपनी दक्षता, मेहनत, आविष्कार और उत्पादन शक्ति से जवाब देते हैं।

आजकल हाल यह है कि चीन की सारी वैज्ञानिक उपलब्धियों को शक की नज़र से देखा जाता है इसलिए कि अमरीका यही चाहता है। अगर कोई भी चीन की वैज्ञानिक प्रगति की बात कर दे तो अमरीकी घटक उस पर टूट पड़ते हैं।

दो घटनाएं इस प्रकार की हुई हैं जो व्यवहारिक रूप से दिखाती हैं कि चीन नई ऊंचाइयों की ओर जा रहा है।

पहली घटना यह हुई कि संयुक्त राष्ट्र संघ की नए आविष्कारों का पंजीकरण करने वाली संस्था ने बताया है कि वर्ष 2019 में सबसे अधिक आविष्कारों का पंजीकरण चीनियों ने किया है। अमरीका से इस साल 57 हज़ार नए आविष्कारों के पंजीकरण की डिमांड की गई जबकि चीन से आने वाली डिमांड 59 हज़ार थी। इसमें भी चीन की हुवावी कंपनी सबसे आगे थी जो टेक्नालोजी के मैदान में सारी दुनिया को पीछे छोड़ती जा रही है।

दूसरी घटना वुहान शहर में मनाया जाने वाला जश्न है। वुहान शहर में पहली बार कोरोना वायरस का पता चला था और महामारी फैल गई थी। अब 76 दिन गुज़रने के बाद वहां सामान्य जीवन बहाल हो गया है। ट्रेनें मुसाफ़िरों से भर गई हैं और सड़कों और फ़ुटपाथों पर ज़िंदगी लौट आई है। यह चीन की बहुत बड़ी विजय है।

संयोग की बात है कि यह दोनों घटनाएं उस समय प्रकाश में आईं जब अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली वित्तीय सहायता रोकने का एलान किया है और आरोप लगाया है कि उसने कोरोना वायरस के बारे में जानकारियों को पूरी पारदर्शिता से बाहर न आने देने में चीन से सहयोग किया।

अरब जगत में तो बड़ी मज़बूत अमरीकी लाबी मौजूद है जो चीन की तारीफ़ में एक शब्द भी बोल देने वाले इंसान पर टूट पड़ती है जबकि आज सच्चाई यह है कि चीन बहुत तेज़ रफ़तार से दुनिया के शिखर की ओर बढ़ रहा है और कोरोना से लड़ाई में वह महान रोल अदा कर रहा है जो एक सुपर पावर का होता है।

हमें तो यही बताया गया है कि शक्ति मिसाइलों, सैटेलाइटों और युद्धपोतों से नहीं बल्कि आविष्कारों से मिलती है और आज हम देख रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महत्वपूर्ण संस्था कह रही है कि चीन ने अमरीका को पीछे छोड़ते हुए इस मैदान में पहला स्थान हासिल कर लिया है। वैसे अब अगर ट्रम्प चीन पर प्रतिबंध लगा दें तो हमें ताज्जुब नहीं होगा।

चीन ने कोरोना वायरस की महामारी को बड़ी सफलता से कंट्रोल किया है और अब वह दुनिया के 98 से अधिक देशों की बिना किसी भेदभाव के मदद कर रहा है। कल हम देखेंगे कि चीन आधुनिक हथियारों की लंबी क़तार के साथ हमारे सामने है जिनके आगे अमरीकी विमानवाहक पोत की कोई हैसियत नहीं है और उन्हें रिटायर किया जा रहा है। इसके साथ ही हो सकता है कि हम यह भी देखें कि डालर के बजाए बड़े बड़े सौदे युवान में किए जा रहे हैं।

चीन आविष्कार कर रहा है और ख़ामोशी से आगे बढ़ रहा है और ट्रम्प चीख़ रहे हैं, गला फाड़ रहे हैं, ज़बान के ख़ंजर से कभी दाएं और बाएं हमले कर रहे हैं और अपने विरोधियों को गालियां दे रहे हैं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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