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तब्लीग़ी जमाअत पर इल्ज़ाम लगाना पूरी तरह ग़लत है : अपनी नाक़ामियाँ को छिपाने के लिए ‘तब्लीग़ी जमाअत’ की आढ़ ले रहे हैं ‘संघी’ : रिपोर्ट

 

तब्लीग़ी जमाअत पर इल्ज़ाम लगाना पूरी तरह ग़लत है, सरकार झूठी ख़बर पर रोक नहीं लगा रही हैः बदरुद्दीन अजमल

भारतीय सांसद ने कहा है कि सरकार कोरोना वायरस का इस देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ दुरुपयोग कर रही है।

तस्नीम न्यूज़ के मुताबिक़, असम के धुबरी से सांसद बदरुद्दीन अजमल ने देश के मुसलमानों के संबंध में भारत सरकार की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि मुसलमानों पर कोरोना वायरस के फैलाव का इल्ज़ाम लगाना बेबुनियाद व अनैतिक है।

उन्होंने कहा कि देश में कुछ मीडिया हल्क़ें मुसलमानों के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार कर रहे हैं। मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि कुछ मीडिया हल्क़ों की ओर से नई दिल्ली स्थित तब्लीग़ी जमात के केन्द्र को कोरोना के फैलाव के लिए ज़िम्मेदार ठहराना पूरी तरह ग़लत है।

मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कहाः भारत सरकार अच्छी तरह जानती है कि तबलीग़ी जमाअत आम लोगों के जीवन से जुड़े मामलों पर ध्यान देती है, लेकिन इसके बावजूद सरकार मुसलमानों के ख़िलाफ़ झूठी ख़बरों पर रोक नहीं लगा रही है।

रिपोर्ट मिलने तक भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, देश के विभिन्न क्षेत्रों में कोरोना से संक्रमित 1964 मामले सामने आए हैं, जिनमें 50 लोगों की मौत हुयी है।

छुपे नहीं बल्कि लॉकडाउन के कारण फंस गए थे तबलीगी जमात के लोग

by – Mohammad Anas
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तबलीगी जमात को हम मुसलमान ‘अल्लाह मियाँ की गाय’ कहते आए हैं दशकों से। मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग, वो भी इतना सीधा सादा की पूछिए मत। एकदम से गैरराजनीतिक। सिर्फ मस्जिद में रहना। अल्लाह-अल्लाह करना और घरों को चले जाना। आपस में ही इस्लाम की बातें करना, सबको अपना मानना। पैजामे टखनों से ऊपर, लंबी दाढ़ी, सर पर टोपी, ईमानदारी ऐसी की गैरमुस्लिम भी उनकी मिसाल दें।

अब आपको गाय से भी दिक्कत हो गई। आपदाएं जब आती हैं तो फासीवाद को मजबूत करके जाती हैं। कल से टीवी पर देख रहा हूं। किसी ने भी सच्चाई नहीं दिखाई। दिल्ली के निज़ामउद्दीन इलाके में बंगले वाली मस्जिद को तबलीगी जमात का वैश्विक मुख्यालय कहते हैं। सबसे पहले तो हमें गर्व करना चाहिए कि हमारे देश में इस्लाम धर्म के एक प्रमुख वैचारिक धड़े का मुख्यालय है जहां हर साल लाखों की तादाद में दुनिया के हर देश से मुसलमान आते हैं और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों की मस्जिदों में जाकर इस्लाम-कुरान और हजरत मोहम्मद साहब की बातें बताते हैं। इसी को तबलीग कहते हैं। तबलीग करना मतलब मुसलमानों को कुरान-हदीस की बातें बताना।

हमारे देश में जब कोविड-19 को लेकर किसी भी प्रकार की हेल्थ एडवाइज़री नहीं जारी की गई थी और इंटरनेशल फ्लाइट्स आदि पर रोक नहीं लगी थी तभी मरकज़ निज़ामउद्दीन पर विभिन्न देशों तथा भारत के कई राज्यों से तबलीगी जुटे थे। यह जुटान 10-15 मार्च के दौरान हुई। इस दौरान सरकारी कारिंदे मीडिया में कहते रहे कि पैनिक होने की ज़रूरत नहीं है। हमारे यहां ऐसा कोई मामला नहीं हुआ है। उधर दुनिया भर में कोविड से निपटने के लिए वहां की सरकारें हर संभव प्रयास कर रही थीं। डर का माहौल सब ओर था लेकिन अपने ही नागरिकों को कोई दुश्मन की तरह नहीं ट्रीट कर रहा था, और भारत से फ्लाइट आने जाने में किसी भी देश को कोई परेशानी नहीं हो रही थी। तबलीगी जमात के मुख्यालय पर इस दौरान हजारों लोग थे। वहां आमतौर पर भी एकाध हजार लोग हमेशा रहते हैं। हर देश के नागरिक।

ख़ैर, 22 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का एलान किया। इस दौरान लोग सड़क पे निकले, नाच गाना किया, तो सरकार ने दिल्ली में 144 लगा दिया। मरक़ज ने अपने नज़दीकी थाने तथा हल्के के एसडीएम को पत्र लिख कर कहा कि उनके यहां करीब 1500 लोग हैं। कृप्या उन सभी को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए हमने गाड़ियों का इंतज़ाम किया है, उन गाड़ियों का पास मुहैया करा दें ताकि वे अपने घरों को चले जाएं। यह पत्र 25 मार्च 2020 को लिखा जाता है। 22 को जनता कर्फ्यू लागू रहता है, जिस कारण से बहुत से लोग वहां से नहीं निकल पाते लेकिन 23 को करीब एक हजार लोग मरक़ज से निकल कर अपने घरों को चले जाते हैं। फिर 23 को ही प्रधानमंत्री ने आधी रात से ‘जो जहां है वहीं रहे’ कह कर पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया।

इन परिस्थितियों में मरकज़ निज़ामउद्दीन में करीब करीब 1500 लोग फंस गए, ग़ौर करें। दंगाई मीडिया इन लोगों को ‘छुपे’ होने को कह रही है। जबकि ये सबके सब लॉकडाउन की वजह से मरकज़ में फंस गए होते हैं। मरकज़ की तरफ से इसके बावजूद 25 मार्च को निज़ामउद्दीन थाने के एसएचओ से सात (7) चारपहिया गाड़ियों के लिए पास बनवाने हेतु निवेदन किया जाता है, जिसकी कॉपी एसडीएम को भी भेजी जाती है लेकिन परमीशन नहीं मिलती।

ये वो गाड़ी नंबर हैं, जिनके लिए दिल्ली मरकज़ ने पास मांगा था, ताकि मरकज़ में छुपे लोग अपने घरों को जा सकें
इसके बाद 29 मार्च को फिर से मरकज़ की तरफ से लेटर लिखा जाता है असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस,दिल्ली अतुल कुमार को। यह लेटर दिल्ली पुलिस के नोटिस लेटर संख्या 717/SO-ACP/Lajpat Nagar के जवाब में लिखा जाता है। नोटिस मिलने के बाद मरकज़ ने सारी परिस्थितियों से अवगत कराया एवं कहा कि जितने भी लोग मरकज़ में बचे हैं उनमें अधिकतर विदेशी नागरिक तथा दूर राज्यों के भारतीय हैं जिन्हें आईसोलेट किया जा चुका है। सारे ज़रूरी कदम एहतियातन उठाए जा चुके हैं।

फिर तेलंगाना से एक ख़बर आती है कि निज़ामउद्दीन मरकज़ से लौटे छह लोगों की मौत कोरोना वॉयरस की वजह से हो गई है। उसके बाद तो ज़ी मीडिया, रिपब्लिक, टीवी9 भारतवर्ष समेत हिंदी भाषा के सारे दंगाई चैनल में मरकज़ को देशद्रोहियों का अड्डा बताने की होड़ लग गई। हेल्थ डिपॉर्टमेंट की गाड़ियां मरकज़ पहुंचने लगीं, पुलिस लगा दी गई। मरकज़ को बदनाम करने में कौन कितना आगे निकलेगा इसकी बाज़ी लग गई। देश भर के मुसलमानों को इसके बहाने घेरा जाने लगा। यह सब जानते हैं कि कोरोना देसी बिमारी नहीं बल्कि विदेशी है। और यह भी सभी जानते हैं कि दिसंबर में पहला मामला सामने आया था उसके बाद जनवरी फरवरी एवं आधा मार्च आते आते इसका खतरा पूरी दुनिया पर आ गया। फिर भी हमारे देश के ज़िम्मेदारान सोते रहे। विदेश से हर दिन हजारों लोग बिना किसी जाँच पड़ताल के आते रहे। अमेरिका से लेकर फ्रांस, इज़राइल, यूके, यूरोप, अरब तक से लाखों लोग भारत में आए। किसी की भी जांच नहीं हुई। लापरवाही का ऐसा मंज़र शायद ही किसी देश ने देखा हो। गलती हमारी व्यवस्था करे और भुगते हम? यह कहां का न्याय है।

मरकज़ में विदेशी आए क्योंकि भारत सरकार ने उन्हें वीज़ा दिया। एयरपोर्ट पर उनकी जांच नहीं हुई तो गलती तबलीगियों की है? अगर ईमानदार हैं तो जवाब खोज कर खुद को दीजिएगा। मुझे मत बताइएगा। मरकज़ में साल के बारहों महीने हजारों लोग रहते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया और फिर अगले ही दिन रात से लॉकडाउन कर दिया। लोग वहां फंसे रह गए। जैसे पूरा देश फंस गया अपने अपने घरों में। जो जहां था वहीं फंस गया। तो फिर ये हिंदी भाषा के दंगाई चैनल और नरपिशाच एंकर मरकज़ में फंसे तबलीगियों को ‘छुपा’ होने क्यों कह रहे हैं। क्या हमने यूपी-दिल्ली सीमा पर फंसे लाखों लोगों को कहा था क्या कि ये सब कहां छुपे थे। हां, कहा गया था। यही सारे चैनल और एंकर इन मज़दूरों को भी ‘कोरोना बम’ से तुलना कर रहे थे। हम सबको पता था कि मज़दूरों की इस भीड़ में अस्सी प्रतिशत हिंदू हैं। फिर भी सरकार के तलवे चाटने वाले ये खूनी एंकर उन गरीब-बेसहारा मज़दूरों और हिंदी राज्यों के बाशिंदों को ‘कोरोना बम’ कह रहे थे। असल में यह केंद्र में बैठी निकम्मी सरकार के पालतू पिट्ठू हैं। वे जैसा कहती है वैसा ही ये करते हैं। इनके लिए क्या हिंदू क्या मुसलमान। सब कुछ पैसा और पॉवर ही होता है। इंसानियत का क़त्ल करने वाले ये, वे गंवार हैं जिनको पता है कि वे क्या कर रहे हैं।

ऐसा पहली बार हो रहा है कि जो बिमार हैं उनके प्रति टीवी वाले नफरत भर रहे हैं। यही तो फासीवाद की पहचान है। फासीवाद को किसी की मौत से फर्क़ नहीं पड़ता जब तक कि उसका अपना कोई न मर जाए। बिमार की सेवा के बजाए उसे मरने के लिए छोड़ने की बातें हो रही हैं। लोग तो गोली मारने को कह रहे हैं। मने हम बचे रहे बाक़ि सब मर जाएं। हम यहां आ पहुंचे हैं। नफरत ने यहां ला खड़ा किया है हम सबको।

केजरीवाल की सारी राजनीति मीडिया और ट्विटर के ट्रेंड से चलती है। कल मरकज़ को लेकर मीडिया सक्रिय हुई। ट्विटर पर ट्रेंड चला तो केजरीवाल ने केस दर्ज करने का आवेदन दिल्ली पुलिस में कर दिया। उसे मालूम है कि मुसलमान उसे कुछ नहीं कहेगा। वोट भी देगा। यह केजरीवाल की उस राजनीति का हिस्सा है जहां वह मुसलमानों पर बात ही नहीं करना चाहता। भाजपा उसे मुसलमान कह कर छूती है तो वह खुद पर केमिकल का छिड़काव करने लग जाता है ताकि सब कुछ साफ हो जाए।

ख़ैर जो भी है। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करूंगा कि निज़ामउद्दीन मरकज़ में फंसे विदेशी तथा भारतीय नागरिकों की हिफाज़त करे। हिंदू-मुसलमान के बीच नफरत फैलाने वालों को दिलों में प्यार भर दे। उन्हें अच्छी समझ और बेहतर सोच वाला बनाए।

-मोहम्मद अनस

Md Sajid Hussain
Yesterday at 13:59
तब्लीगी जमात की कहानी बताकर सरकार बेहद बेशर्मी से अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। जिस वक्त चीन से निकलकर कोरोना यूरोप और खुद भारत में प्रवेश कर चुका था उस वक्त मोदी ने दुनिया के बाप ट्रम्प को 500 से ज्यादा डेलीगेट्स और उसके दामाद, बेटी, साढू के साथ भारत बुला लिया।

एक अनुमान के मुताबिक अहमदाबाद के स्टेडियम में ट्रम्प के जलसे में शामिल होने 20 हजार से ज्यादा एनआरआई भारत आये रहे। बात यही नही खत्म हुई जैसे जैसे कोरोना अपना असर दिखाता गया विदेश मंत्रालय विदेशों से भारतीयों को लाने के एकसूत्रीय कार्यक्रम में लग गया।

सच्चाई यह थी कि तब्लीगी जमात के लोगों को ही नही देश मे जहां तहां फंसे आम हिंदुस्तानियों को सम्मान के साथ उनके घर पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिये था। सरकार के बेशर्म कुप्रबंधन, अभिजनवादी मानसिकता और गरीब एवम अल्पसंख्यक विरोधी नीतियों का खामियाजा देश

भुगत रहा है।

 

Babar Khan

दिल्ली दंगे का आरोप ताहिर हुसैन पर डालने के बाद अब मीडिया को कोरोना के नाम पर निजामुद्दीन मरकज के रूप में नया शिकार मिल गया है।तीन दिन पहले तक मीडिया के पास ना उन लाखों लोगों के लिए वक़्त था जो भूखे प्यासे सड़कों पर निकल आये थे ना हिम्मत थी हुकूमत से सवाल पूछने की कोरोना से लड़ने के लिए लॉक डाउन के सिवा क्या तैयारी की गई है ना ही ये की दुनिया के दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश मे अभी तक 35 हजार टेस्ट ही क्यो हुए ?केरल के तिरुमला मंदिर में बदस्तूर पूजा हो रही थी तो आदित्यनाथ योगी अयोध्या में श्री राम की मूर्ति स्थापित कर रहे थे पर इस पब्लिक गेदरिंग से कोरोना नही फैल रहा था बल्कि हवन के धुएं से हवा में फैले हुए कोरोना के वायरस मारे जा रहे थे।

न्यूज़ चैनलों पर अंताक्षरी खेलने वाले वाले एंकर अब अपने तमामतर हरबे के साथ कोरोना जिहाद जैसा हैडलाइन लगाकर उतर चुके है।

मुल्क के किसी भी मुद्दे को हिन्दू मुस्लिम का रुख दे देने का ना ये मामला पहला है और ना ही आखरी। आप पिछले सवा सौ सालों की तारीख उठाकर देखो भारतीय मीडिया की। यहां एन्टी मुस्लिम लोगो का हर दौर हर हुकूमत में बोलबाला रहा है।हमे लगता है मीडिया पिछले 6-7 सालों में एंटी मुस्लिम हुई है जबकि कांग्रेस के हुकूमत में दहशतगर्दी के इल्जाम में गिरफ्तार होने वाले लोगों को भी यही मीडिया वाले लश्कर ए तैयबा का कमांडर, इंडियन मुजाहिदीन का मास्टर माइंड बता बताकर नफरत फैलाते रहे हैं।

उसके बाद आते है हम डिफेंसिव मोड में और लग जाते है सफाई देने, चिल्लाना शुरू कर देते है कि मीडिया इल्जाम तराशी करके नफरत फैलाने की कोशिश कर रही है।

पता नही मुस्लिम कौम समझती क्यो नही की उसके रोने गाने से कुछ नही होने वाला बल्कि आपके रोने से देश का बहुसंख्यक तबका खुश होता है इसलिए रोना छोड़ मिल बैठ के इस फ़ितने से लड़ने का रास्ता निकालो। अपने मरकज, खानकाह और दरगाह वालो से कहो कि सैकड़ो करोड़ का बैलेंस रखने के बाद भी क्या फायदा की मीडिया के कुछ जमीर फरोश फितरत के लोग जब जी चाहे आपपर कोई भी इल्जाम लगा दे। इनसे लड़ना है तो अपने फण्ड का कुछ हिस्सा निकालो और प्लान बनाओ की हर साल कम से कम अपने 100 बच्चो को पत्रकार, वकील और डॉक्टर बनाना है फिर देखो 5- 10 साल में कैसे हालात बदलते है। इन्हें इनके जबान में जवाब दो, घसीटो इनको कोर्ट के कटघरे तक तब इनका दिमाग ठिकाने आएगा वरना हाथ पर हाथ रखकर सिर्फ अपने साथ होने वाले ज्यादती का रोना रोना है तो कोई बात नही, अपना पीस tv बैन करवा लो और जी सलाम देखते रहो।

Renu Pandey·
#कोरोना से #जीतना है तो #एकजूट रहें
#हिन्दू #मुस्लिम ना करें

#दलाल_मीडिया
#मोदीयापा

Srivatsa
@srivatsayb
A 25-yr-old died on Monday at BRD Medical College, Gorakhpur, UP

Today, two days after death, tests say he was #CoVid

He was in a Normal Ward & doctors attended to him without PPE Crying face

Why wasn’t a person with symptoms tested before & isolated? This is why we need more testing!


ANI
@ANI
Many of them (attendees of Tablighi Jamaat event) are objecting against testing&feel they don’t need admission. So, this put security of our staff at risk. Now, police have been deployed around 3 blocks where they have been kept: Dr JC Passey*, Medical Director of LNJPN Hospital

Dr. Loneranger INC Globe with meridians #WithRG
@Loneranger9new
Do you think these pious and innocent #Tablighis will ever do a sin like propagating #CoronaVirus, they themselves are undergoing a treatment at hospital. They shall soon recover by the grace of Allah (SWT) and go back to their homes, Al Hamdullilah.
#TabhleegiJamaat


Aditya Raj Kaul
@AdityaRajKaul
#BREAKING: India has identified 9000 #TabhleegiJamaat workers impacted by #COVID19. They have been quarantined. Out of this 9000, 1306 are foreigners and rest Indians. 200 identified in Delhi, 250 out of them foreigners. 1804 in Quarantine, 334 admitted in the hospital.

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