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दुनिया कोरोना जैसी महामारी से लड़ रही है, पर भारत मुसलमानों से लड़ रहा है

‎Azhar Shameem‎
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दुनिया कोरोना जैसी महामारी से लड़ रही है ,पर भारत मुसलमानों से लड़ रहा है।
पहले तब्लीगी जमात , फिर बांद्रा और अब मुरादाबाद के नाम पर मुस्लिम विरोधी एजेंडा लगातार चलाया जा रहा है। सरकार , प्रशासन , पुलिस , कथित राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया सभी अपने काम में लगे हुए हैं और मार , पीट , दुर्व्यवहार , दुष्प्रचार जारी है।

तब्लीगी मरकज़ में क्या हुआ अब सभी जानते हैं, फिर lockdown 2 में जिस तरह A.B.P Manjha ने अफवाह उड़ाई की प्रवासी मज़दूरों को उनके प्रदेश भेजने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी । बांद्रा स्टेशन पर 4,5 हज़ार मज़दूरों , कामगारों की भीड़ लग गयी। और वे उन्हें उनके प्रदेशों में भेजने की मांग करने लगे। बड़ी मुश्किल से उन्हें समझाया गया और उनकी परेशानी दूर करने का आश्वासन दिया गया तो मामला ठंडा हुआ ।अब चूंकि भीड़ मस्जिद के पास जमा हुई तो कव्वा मीडिया ने काँव , काँव करना शुरू कर दिया और इसे मुसलमानों से जोड़ दिया और conspiracy बता दिया। इसी तरह मुरादाबाद का भी मामला है ,जब एक कस्बे में एक परिवार में किसी की कोरोना पॉजिटिव होने से मौत हो गयी तो रात के 1 बजे टीम पहुँच गयी और औरतों , बच्चों को जबरन ले जाने लगी। परिवार के लोगों ने इस बात का विरोध किया और सुबह होने पर ले जाने व अधिकारियों से बात कराने की मांग की तो विवाद हो गया। टीम में शामिल डॉक्टर और पुलिस वाले नहीं माने तो पथराव हो गया ,जो बेशक गलत था और इससे बचा जाना चाहिए था।

ऐसी शिकायतें बराबर मिल रहीं हैं कि जिन लोगों को qorantine के लिए और इलाज के लिए ले जाया जा रहा है , उनकी उचित देखभाल नही हो रही है और न तो उनके खाने , पानी की उचित व्यवस्था की जा रही है और न ही बाथरूम की व्यवस्था है। जिसकी वजह से नहाने , धोने और हमाम जाने की परेशानी हो रही है। छोटे , छोटे बच्चों की भूख ,प्यास से बुरी हालत हो रही है और प्रशासन व जनता में अविश्वास का वातावरण बन गया है और इसी वजह से विरोध बढ़ता जा रहा है। प्रशासन को चाहिए कि जब भी वे प्रभावित इलाके में जाएं तो इलाके के जनप्रतिनिधि और धार्मिक नेताओं का भी सहयोग ले तो लोगों में विश्वास का माहौल बनेगा और उचित ज़रूरी सुविधा प्रदान करने से विरोध भी नही होगा ।

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