धर्म

देखिये, कैसे दीन व शरियत के नाम पर, ग़ैर क़ुरआनी हुक्मों को आम किया गया!

Nizamuddin Sheikh
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क़ुरआन को महजुरा बना रखा है, 25/30, (और ये काम उलमा ही अंजाम दे सकते हैं) महजुरा का तर्जुमा, छोड़ना किया है, जबकि ये हल्का जुर्म है ,महजुरा इससे बड़ा जुर्म है।

अरब लोग अपने बेक़ाबू हुए घोड़े या ऊंट को गर्दन में रस्सी से पैरों को करीब झुका कर बांध देते,जिससे दौड़ना तो दूर आसानी से चल फिर भी नही सकता, इसे वो महजुरा कहते, और यही लफ्ज़ क़ुरआन में रसूल के हवाले से इस्तेमाल हुआ है, कि आख़िरत में रसूल कहेगा कि ऐ मेरे रब मेरी क़ौम ने क़ुरआन को महजुरा कर रखा था, यानी ये मज़हबी पेशवा क़ुरआन को, अपनी मर्ज़ी अपनी ख्वाहिशों अपने असलाफ़, अपने मुफ़स्सिरों मुहद्दिसों, फिक़ही ईमामों के आगे क़ुरआन की नही चलने देते, क़ुरआन को अक़ीदत सवाब, रस्म तिलावत से ज़्यादा अहमियत नहीं देते, हिंदुस्तान में 700,750,साल हुकूमत होने के बावजूद क़ुरआन अपनी ज़बान के साथ आम नही किया गया,ताकि आम मुसलमान समझ ना लें, जान ना जाये। क़ुरआनी अहकाम के खिलाफ ग़ैर क़ुरआनी मसलकी रिवायती अहकाम लागू किया और उसे ही मशहूर किया।

अगर ऐसा नही हु होता तो आज मुसलमान का बच्चा बच्चा क़ुरआन मानी के साथ जानता होता, और उसपर ही अमल कर रहा होता, लेकिन देखिये कि, कैसे दीन व शरियत के नाम पर, ग़ैर क़ुरआनी इस्तिलाहों ( हुक्मों ) को आम किया,
1,तीन तलाक़ जिसका क़ुरआन से कोई लेना देना नही, मगर मशहूर किया।
2, हलाला, जो क़तअन हराम है लेकिन उस पर अमल करवाया।
3, रज़्म संगसार ज़ानी की सज़ा क़ुरआन में संगसार रज़्म नही है।
4, मुसलमान, जबकि क़ुरआन मुस्लिम कहता है सिफत खूबी थी काम था, जिसे क़ौम बना दिया ।
5,शरीयत अपने असलाफ़, मुफ्तियों की राय, जबकि शरीयत खुद क़ुरआन है।
6, कुर्बानी जो आम लोगों को क़ुरआन में हुक्म नही है, मगर खास व आम से करवाया जाता है ।
7,मुर्तद का क़त्ल,जो दीन से फिरने वालों का क़त्ल क़ुरआन में नहीं ।
8, तौहीने रिसालत की सज़ा क़ुरआन नही बताता मगर दीन के नाम पर क़त्ल तक का फतवा हैं ।
9, क़ुरआन के खिलाफ अलग अलग इमाम बना लिया ।
10, फिर इन्ही इमामों की राय फैसले को बुनियाद बना कर खुद उन्ही के नाम से मसलक बना लिया मुतज़ाद ।
11, क़ुरआन के खिलाफ, अल्लाह की रस्सी क़ुरआन (3/103)पकड़ने के बजाए अपनी रस्सी बना ली और लोगों को पकड़वा दी ।
12, क़ुरआन फिरक़ाबन्दी से रोकता है मगर 30/32 ये नही माने और फिरक़ाबन्दी का शिकार बना दिया मुसलमानों को।

Sheikh nizamuddin
09,04,2020

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