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देश की सकल घरेलू गन्दगी का 75 प्रतिशत यहाँ इकट्ठा हो गया है!

Kavita Krishnapallavi
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चलिए, फिर आपको एक किस्सा सुनाती हूँ ! किस्सा क्या, हाल ही का वाक़या है !

तीन दोस्त मुम्बई यूनिवर्सिटी से एम.ए. की डिग्री लेकर दो वर्षों से बेकारी और मुफ़लिसी के दिन काट रहे थे I दो इकोनॉमिक्स से एम.ए. थे और तीसरा हिन्दी साहित्य से ! बहुत भटकने के बाद एक पाँच-सितारा होटल में टेम्पररी नौकरी मिल गयी बार-टेंडर की !

मुम्बई की सबसे बड़ी और सबसे आलीशान रिहायशी इमारत में देश के सबसे बड़े पूँजीपतियों में से एक की बेटी की शादी एक दूसरे पूँजीपति के बेटे से हो रही थी ! शादी के समारोह में देश के अधिकांश बड़े पूँजीपति, व्यापारी, शेयर-दलाल, शीर्ष राजनेता, नौकरशाह, जज, वकील, डॉक्टर और फ़िल्मी दुनिया की लगभग सभी ऊँची तोपें मौजूद थीं ! हज़ारों की संख्या में सारे के सारे वी वी आई पी एक बहुत बड़े हॉल में एक साथ ! पार्टी की सारी ज़िम्मेदारी उस पाँच-सितारा होटल की थी ! तीनों दोस्त बारटेंडर के तौर पर वहाँ मौजूद थे और अतिथियों को दुनिया की नायाब शराबों के पेग बनाकर पेश कर रहे थे !

पहले वाले ने दूसरे के कान में फुसफुसाते हुए कहा,”इससमय देश के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) का 75 प्रतिशत यहाँ इस हाल में मौजूद है !” दूसरे वाले ने कोर्स की पढाई के साथ-साथ थोड़ा मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र भी पढ़ रखा था ! उसने तुरत प्रतिवाद किया,”नहीं-नहीं, यह देश भर के कुल निचोड़े गए सरप्लस का 75 प्रतिशत है जो यहाँ जमा हो गया है ! अ कैपिटलिस्ट इज़ ओनली कैपिटल पर्सोनिफ़ायड !” अब तीसरा दोस्त, साहित्य वाला, बोला,”मुझे तो लगता है, देश की सकल घरेलू गन्दगी का 75 प्रतिशत यहाँ इकट्ठा हो गया है ! गू और गंद से भरी हज़ारों रंग-बिरंगी रेशमी पोटलियाँ जो पूरे हॉल में लुढ़क-पुढ़क रही हैं !”

उनके ठीक पीछे खड़ा उनका बॉस उनकी बातें सुन रहा था ! अगले दिन ही तीनों की उस टेम्पररी नौकरी से भी छुट्टी मिल गयी ! तीनों फिर सड़क पर आ गये !


Satyam Varma
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गहने नहीं दिये तो अब सीधे वेतन-भत्ते ही काट लेंगे मोदी जी!

मोदी जी ने अपने गहने दान करने का आह्वान बड़े भरोसे के साथ किया था। सोचा था, मैंने ताली बजाने को कहा तो ये घण्टा-घड़ियाल भी बजाने लगे, जुलूस भी निकालने लगे। मैंने दिया जलाने को बोला तो ये पटाखे चलाने लगे, अपना घर और मुँह तक जला लिया। अब गहने की बात बोलूँगा, तो गहनों के साथ ही ज़मीन-जायदाद, बैंक बैलेंस भी लाकर मेरे चरणों में, मेरा मतलब है कि मेरे फ़ण्ड में दे देंगे।

मगर इस बार भक्तों ने ऐसी भटकसुन्न की तरह चुप्पी साधी कि मोदी जी का सारा कैल्कुलेशन ही गड़बड़ा गया। किसी भी ‘प्राउड हिन्दू’ या ‘प्राउड इंडियन’ ने एक ठो अँगूठी भी उतार कर नहीं भेजी मोदी जी को।

मगर मोदी है तो मुमकिन है। कब तक बचोगे रामगढ़ के वासियो! गब्बर के, सॉरी मोदी के ताप से तुम्हें एक ही आदमी बचा सकता है, खुद मोदी। और मोदी जी अभी तुम पर ऐसी कृपा करने के मूड में बिल्‍कुल नहीं हैं। गहने नहीं दे रहे हो, कोई बात नहीं, अब सीधे तुम्हारी अंटी ढीली करने का ही इन्तज़ाम कर दिया गया है।

कल ही भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन राजस्व विभाग ने अपने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है कि उनकी एक दिन की तनख्वाह हर महीने मार्च 2021 तक काटकर पीएम केयर्स फ़ंड में जमा कर दी जायेगी। नोटिस के अनुसार सबसे यह “अपील करने का फ़ैसला” किया गया है कि आप अगले एक साल तक अपना वेतन काटकर दान करें। लेकिन दान करना कर्मचारी की स्‍वेच्छा पर नहीं है। वेतन अपने आप काटना शुरू कर दिया जायेगा। जो लोग नहीं कटवाना चाहते हैं वे 20 अप्रैल तक लिखकर दे दें। ज़ाहिर सी बात है कि ऐसे माहौल में कम ही लोग होंगे जो लिखकर मना करने की हिम्मत जुटा पायेंगे।

तो सैकड़ों करोड़ जुटाने का एक इन्तज़ाम तो पक्का हो गया। अब अगला निशाना रेलवे है। आज के दैनिक हिन्दुस्तान के पहले पन्ने पर छपी ख़बर के मुताबिक रेलवे के 13 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर कैंची जल्द ही चलने वाली है। टीए-डीए, ओवरटाइम, रनिंग स्टाफ़ के प्रति किलोमीटर भत्ते, सब काटे जायेंगे। और विभागों को भी नोटिस मिल चुका होगा या मिलने ही वाला होगा।

रामगढ़ के वासियो, गब्बर के ताप से खु़द गब्बर तो तुम्हें बचायेगा नहीं, और ना ही ठाकुर के जय-वीरू आने वाले हैं बचाने के लिए। ये दोनों तो गब्बर का गैंग पहले ही ज्वाइन कर चुके हैं। अब गब्बर के ताप से तुम्हें कोई बचा सकता है, तो वह है ख़ुद तुम! और कोई नहीं।

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