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भारतीय मुसलमानों के ख़िलाफ़ चरमपंथी संघियों की पैदा नफ़रत, हिंसा : एक्शन में मुस्लिम देश, मुसीबत में मोदी सरकार!

कुवैत के वकील और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था के निदेशक ” मुजबिल अश्शरीका” ने कहा है कि भारत और खाड़ी के देशों में सोशल मीडिया पर इस्लाम के प्रति घृणा व डर फैलाने के अपराध पर अंकुश लगाने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम बनायी गयी है।

इसी मध्य दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरूल इस्लाम ने एक फेसबुक पोस्ट किया है जिसके बाद भाजपा की नाराज़ हो गयी है।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि जफरुल इस्लाम भारत की छवि खराब कर रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने साफ कहा कि यह लिखना गलत है, झूठ है। भारत की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री इस पर जबाव दें, तुंरत इस्लाम को उनको पद से हटाएं।

जफरुल इस्लाम ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि भारतीय मुस्लिमों के साथ खड़े होने के लिए कुवैत का धन्यवाद।

जफरुल इस्लाम ने लिखा है कि जिस दिन भारत के मुसलमानों ने अरब देशों से अपने ऊपर होने वाले जुल्म की शिकायत कर दी उस दिन भूकंप आ जाएगा।

वास्तव में हिंदुत्व विचारधारा के लोग सोचते हैं कि कारोबारी हितों की वजह से अरब देश भारत के मुस्लिमों की सुरक्षा की चिंता नहीं करेंगे, लेकिन वो नही जानते हैं कि भारतीय मुस्लिमों का अरबों और मुस्लिम देशों से कैसे रिश्ते हैं।


फार्स की खाड़ी के देशों में दसियों लाख भारतीय काम करते हैं।
हालिया दिनों में भारत और कुछ अरब देशों में सोशल मीडिया पर मुसलमानों के खिलाफ प्रचार में तेज़ी आयी है और इसमें खाड़ी के देशों में रहने वाले भारतीय लोगों ने मुसलमानों के खिलाफ खूब टिप्पणी कीं जिसके यूएई सहित कई देशों ने एक्शन ले लिया।

यूएई के उच्च अधिकारियों, ओआईसी, और इस्लामी जगत के बुद्धिजिवियों ने एक चेतावनी जारी की थी। बताया जा रहा है कि हालिया दिनों में मुसलमानों के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने की वजह से कई भारतीय नागरिकों को यूएई से निकाल दिया गया है। इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और खाड़ी देशों में भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को देश के सब से बड़े अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं की ओर से सचेत किया है।

मोदी सरकार ने अरब जगत के साथ अपनी संबंधों पर काफी मेहनत की है इस लिए सोशल मीडिया पर मुसलमानों के खिलाफ प्रोपगंडे का असर खाड़ी देशों में रहने वाले भरतीय नागरिकों पर ही नहीं पड़ रहा है बल्कि इससे सरकारों के परस्पर संबंध भी प्रभावित हो रहे हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस्लामी जगत के नेताओं से बात कर चुके हैं।

सूत्रों की मानें तो भारत के विदेशमंत्री एस जे शंकर ने पूरे अरब जगत में अपने समकक्षों से व्यक्तिग वार्ता करके उन्हें विश्वास दिलाया है कि भारतीय राजदूत भी मुसलमानों के खिलाफ प्रोपंगडों को रोकने के लिए रात दिन मेहनत कर रहे हैं।

ओमान में भारतीय राजदूत मनु महावीर ने ओमान में रहने वाले भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वह सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही झूठी खबरों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि भारत और ओमान के बीच खास रिश्ता है।

यूएई में भी भारतीय राजदूत पवन कुमार ने एकजुटता और सौहार्द पर बल दिया था। भारत के विदेशमंत्री ने क़तर के अपने समकक्ष से भी वार्ता की थी। इसी तरह उन्होंने सऊदी अरब के विदेशमंत्री से भी बात चीत में इस देश में मौजूद भारतीय नागरिकों का हाल चाल पूछ और उनकी मदद करने का आश्वासन दिया और कहा कि भारत भरोसेमंद साथी रहेगा।

दर अस्ल भारतीय मुसलमानों के प्रति आज कल जो प्रोपगंडा भारत में चल रहा है उसमें सब से बड़ा हाथ राजनीतिक दलों और उनके नेताओं का है और उन्हें खुश करने के लिए भारतीय मीडिया हर मामले में मुसलमानों को घसीटने का प्रयास करता है।

हालांकि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विभिन्न विभिन्न अवसरों पर मुसलमानों और उनके त्योहारों के बारे में बयान देते रहते हैं और देश में सौहार्द व एकता पर बल देते हैं लेकिन उनकी ही पार्टी के नेता विभिन्न अवसरों पर मुसलमानों के खिलाफ ज़हरीले बयान देते हैं जिसका असर काफी समय तक रहता है।

भाजपा शायद अपनी राजनीतिक मजबूरियों की वजह से इस प्रकार के लोगों के खिलाफ खुल कर रुख नहीं अपनाती लेकिन अब जब मुस्लिम देशों ने नोटिस लिया है तो उसे सोचना पड़ रहा है।

अमरीका भी भारत को ब्लैक लिस्ट में डाल चुका है और इस्लामी देश भी भारत में मुसलमानों की दशा पर चिंता प्रकट कर रहे हैं। इन हालात में अगर भारत सरकार ने ज़हर घोलने वालों पर गंभीरता से अंकुश नहीं लगाए तो निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि सच में काफी खराब हो जाएगी जिसका नुक़सान पूरे देश को होगा।

– कुछ हिस्से दैनिक सियासत से

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