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मध्य प्रदेश मामले में उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस की याचिका ख़ारिज की, फ़ैसले एक ख़ास संगठन के अनरूप हो रहे हैं !

विगत कुछ वर्षों में अगर अदालत के फैसलों को देखें तो कोई अँधा भी समझ सकता है कि वहां किस विचार के हिसाब से काम/फैसले हो रहे हैं, राफेल, बाबरी मस्जिद व् अन्य मामले इनकी अहम् मिसाल हैं, कोई कितना भी दिल या खुद को समझाये या ऊपर से अदालत के सम्मान की बात कहें पर सच यही है कि फैसले एक ख़ास संगठन के अनरूप हो रहे हैं

मध्य प्रदेश में फ़्लोर टेस्ट मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फ़ैसला देते हुए कहा है कि गवर्नर का आदेश सही था और कांग्रेस की याचिका ख़ारिज की जाती है।

भारत की सर्वोच्च अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अहम मामलों को निपटाने का क्रम जारी रखते हुए सोमवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से दायर याचिका पर फ़ैसला सुनाया। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि मार्च में हुए मामले में राज्यपाल द्वारा फ़्लोर टेस्ट का आदेश देना सही था। न्यायालय ने कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी के उस तर्क को नकार दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्यपाल ऐसा आदेश नहीं दे सकते हैं। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्यपाल ने कोई निर्णय नहीं लिया था बल्कि सिर्फ़ फ़्लोर टेस्ट कराने को कहा था। न्यायालय का कहना था कि जारी विधानसभा में दो ही रास्ते बचते हैं, फ़्लोर टेस्ट और अविश्वास प्रस्ताव। उच्चतम न्यायालय ने इस दौरान राज्यपाल के अधिकारों को लेकर एक विस्तृत आदेश भी जारी किया।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने राजनैतिक उठापटक के बीच विधानसभा में फ़्लोर टेस्ट का आदेश दिया था। लेकिन जब सदन की शुरुआत हुई तो विधानसभा स्पीकर ने सदन को कोरोना वायरस के चलते कुछ दिनों के लिए टाल दिया था। जिसके बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा था। न्यायालय ने उस समय तुरंत ही फ़्लोर टेस्ट करवा दिया था, जिसके बाद कमलनाथ सरकार को त्यागपत्र देना पड़ा था। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली थी।

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