दुनिया सेहत

ये दवा कर रही है चमत्कार, बहुत तेज़ी से ठीक हो रहे हैं कोरोना के बीमार!

कोरोना वायरस से संक्रमितों के लिए एक राहत की ख़बर है कि प्रयोग के चरण से गुज़र रही दवा रेमडेसीवीर बहुत अच्छा असर दिखा रही है। जिन लोगों पर इस दवा का प्रयोग किया गया है वह बहुत जल्दी ठीक होकर घर जा रहे हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार रेमडेसीवीर दवा का क्लिनिकल टेस्ट चल रहा है जो लैब टेस्ट के बाद का चरण है और इस चरण में इस दवा को इंसानों पर टेस्ट किया जा रहा है। देखने में आया कि जिन बीमारों को सांस लेने में बहुत तकलीफ़ थी और तेज़ बुख़ार था वह भी एक हफ़्ते से भी कम समय में ठीक होकर डिसचार्ज हो गए।

क्लिनिकल टेस्ट टीम की इनचार्ज और शिकागो युनिवर्सिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डाक्टर कैथलीन मुलेन का कहना है कि यह बहुत अच्छी ख़बर है कि हमारे अधिकतर पेशेंट डिसचार्ज हो गए हैं, यह बहुत शानदार बात है, अब हमारे पास केवल दो मरीज़ ही बचे हैं।

युनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल का आफ़िशियल रिज़ल्ट तैयार किया जा रहा है जिसके बाद इस दवा के बारे में बाक़ायदा बयान जारी किया जाएगा।

अभी तक कोविड-19 का कोई स्वीकृत इलाज नहीं है लेकिन अमरीका का नेशनल इंस्टीट्यूट्य आफ़ हेल्थ रेमडेसीवीर सहित कई दवाओं पर रिसर्च कर रहा है जिनमें रेमडेसीवीर दवा का अच्छा नतीजा मिला है।

यह दवा इबोला के बीमारों पर भी टेस्ट की गई थी लेकिन उसमें ज़्यादा कारगर नहीं रही थी मगर फिर जानवरों पर किए गए प्रयोग से पता चला कि यह दवा कोविड-19 जैसी बीमारियों को रोकने और उनके इलाज में प्रभावी है।

यह दवा जीलीड साइंसेज़ नाम की कंपनी बनाती है। कंपनी का कहना है कि महीने के अंत तक ट्रायल का रेज़ल्ट पूरी तरह सामने आ जाएगा।

 

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कोरोना की वैक्सीन के लिए अभी कीजिए इन्तेज़ार

कोरोना की वैक्सीन बनाने में एक साल का समय लग सकता है।

भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण को रोकने वाली वैक्सीन के बनने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है।

फरीदाबाद स्थित ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक गगनदीप कंग के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी को हराने के लिए विस्तार और गति के हिसाब से वैश्विक शोध और विकास प्रयास बेहद बेमिसाल हैं। किंतु इस बारे में कोई भी वैक्सीन एक साल से पहले बनना मुश्किल है। उनका कहना है कि किसी भी वैक्सीन को तलाशने के बाद उसे सुरक्षित, प्रभावी और बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने के लिए कम से कम एक साल का समय अवश्य लगेगा। केरल के राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर ई. श्रीकुमार और हैदराबाद के सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायलॉजी के निदेशक राकेश मिश्रा भी मानते हैं कि किसी वैक्सीन को तैयार करने में कई साल का समय लगता है। उनके अनुसार परीक्षण के विभिन्न स्तरों को पार करने और उसके बाद मंजूरी मिलने में लगने वाले समय के चलते इस साल कोरोना वायरस की वैक्सीन उपलब्ध होना संभव नहीं है। संसार के कई अन्य वैज्ञानक भी यह कह चुके हैं कि कोरोना का वैक्सीन उपलब्ध कराने में निश्चित रूप में समय लगेगा।

कोरोना वायरस या कोविड-19 का संक्रमण वैश्विक स्तर पर 19 लाख से ज्यादा लोगों को पीड़ित कर चुका है। कोरोना के कारण विश्व में 1 लाख 26 हज़ार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

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