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ये है वो प्रयोगशाला जहाँ तैय्यार किया गया ”कोरोना वायरस” : अमेरिका और चीन के बीच होगा ”युद्ध”

फ़्रांस की मदद से बनी…उस चीनी प्रयोगशाला के बारे में जानिए जहां से कोरोना वायरस फैलने का है आरोप, क्या कहते हैं वैज्ञानिक!

चीन के वुहान नगर में एक टीले पर एक प्रयोगशाला है जो महामारियों के बारे में रिसर्च करती है। इसका निर्माण फ्रांस की मदद से किया गया। बहुत से वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस जानवर से इंसान में ट्रास्मिट हुआ और सारी उपलब्ध जानकारियां वुहान के उस बाज़ार की ओर संकेत करती हैं जहां अनेक प्रकार के जानवर बिकते हैं।

मगर कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित प्रयोगशाला के बारे में भी संदेह जताया जा रहा है कि वायरस का प्रसार वहां से शुरू हुआ। पहले मीडिया में इस पर ख़ूब बहस हुई और फिर अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने कहा कि इस विचार पर जांच हो रही है।

यहां हम उन महत्वपूर्ण सवालों के बारे में आपको बता रहे हैं जो वुहान की प्रयोगशाला को लेकर उठाए जा रहे हैं।

यह प्रयोगशाला क्या है?

वाशिंग्टन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि बीजिंग में अमरीकी दूतावास के प्रतिनिधियों ने वुहान प्रयोगशाला का कई बार दौरा किया और 2018 में अमरीकी प्रशासन को सूचित किया था कि इस प्रयोगशाला में सेफ़्टी के मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है।

फ़ाक्स न्यूज़ ने भी कई ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी कि वुहान में जो कोरोना वायरस फैला है उसकी शुरूआत शहर की इसी प्रयोगशाला से हुई है। अगर यह वायरस चीनियों ने नहीं बनाया है तो भी किसी ग़लती की वजह से यह वायरस फैल गया है।

इस प्रयोगशाला को कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है और वहां सेफ़्टी के बड़े कठोर नियमों को लागू किया गया है क्योंकि वहां इबोला जैसे बहुत से ख़तरनाक वायरसों पर रिसर्च होती है।

यह प्रयोगशाला फ्रांस की मदद से बनाई गई जहां संक्रामक रोगों की रोकथाम के सटीक उपायों के बारे में शोध किया जाता है।

प्रयोगशाला के निर्णम में 40 मिलियन यूरो ख़र्च हुए। यह बी-4 ग्रेड की प्रयोगशाला है। दुनिया में इस ग्रेड की लगभग 30 प्रयोगशालाएं हैं।

इस प्रयोगशाला में अलग अलग वायरसों को 1500 नमूने मौजूद हैं और इसे एशिया की सबसे महत्वपूर्ण वायरोलोजी लैब माना जाता है। अमरीकी मीडिया में बी-4 प्रयोगशाला की बात हो रही है लेकिन कोरोना वायरस जैसे शोध जिसमें बहुत अधिक रिस्क नहीं होता बी-3 ग्रेड की प्रयोगशालाओं में किए जाते हैं अलबत्ता वुहान की प्रयोगशाला में वह भाग भी मौजूद है।

क्या वाक़ई कोरोना वायरस यहीं से फैला है?

इस बारे में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वाशिंग्टन पोस्ट और फ़ाक्स न्यूज़ ने जानकार सूत्रों के हवाले से सारे दावे किए हैं। फ़ाक्स न्यूज़ का दावा है कि जिस पहले मरीज़ पर प्रयोगशाला के भीतर शोध किया गया वही अपने साथ यह वायरस लेकर बाहर आ गया।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो कई बार चीन पर संदेह जता चुके हैं और धमकी भरे बयान भी दे चुके हैं कि अगर चीन ने जान बूझ कर यह किया है तो उसे ख़मियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

बहरहाल प्रयोगशाला के डायरेक्टर ने आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है।

वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

बहुत से वैज्ञानिक यह मानते हैं कि कोरोना वायरस निकला तो चमगादड़ से ही है लेकिन वह इंसान तक पहुंचने से पहले किसी और प्राणी के भीतर ट्रांसमिट हुआ है। चीनी विशेषज्ञ कहते हैं कि यह बीच वाला प्राणी ऐसा है जो चींटियां खाता है। यह स्तनधारी प्राणी है जो विलुप्त होने की कगार पर है।

कुछ अन्य चीनी वैज्ञानिक कहते हैं कि कोरोना वायरस का जो पहला मरीज़ है वह वुहान के उस बाज़ार में नहीं गया था जहां अलग अलग प्रकार के जानवर बिकते हैं।

लंदन के किंग्ज़ कालेज की बायोसेफ़्टी रिसर्चर फ़िलिपा लिन्ज़ोस का कहना है कि अब तक यह सवाल अपनी जगह मौजूद है कि कोरोना वायरस की शुरुआत कहां से हुई। उन्होंने कहा कि कोई भी साक्ष्य नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि वायरस प्रयोगशाला से फैला है और इसी तरह इस का भी साक्ष्य नहीं है कि यह वायरस वुहान के जानवरों के बाज़ार से निकला है।

स्रोतः एएफ़पी+अलजज़ीरा

चारों तरफ़ से आरोप की बौछार के बीच चीनी प्रयोगशाला ने तोड़ी चुप्पी, कहा वायरस फैलाने के आरोप बेबुनियाद

चीन की उस प्रयोगशाला ने जहां से कोरोना वायरस फैलने का आरोप लगाया जा रहा है बयान दिया है कि आरोप ग़लत हैं।

वुहान प्रयोगशाला के डायरेक्टर युवान ज़ीमिंग ने जो वायरोलोजिस्ट हैं कहा है कि यह असंभव है कि कोरोना वायरस हमारी प्रयोगशाला से बाहर आया हो।

ज़ीमिंग ने सीजीटीएन टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि कोरोना वायरस के फैलने में वुहान प्रयोगशाला की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें पूरी तरह मालूम है कि इस प्रयोगशाला में क्या रिसर्च हो रही है और वहां सेंपल और वायरसों को किस तरह संभाला जाता है।

ज़ीमिंग ने कहा कि मीडिया लोगों को धोखा दे रहा है बग़ैर साक्ष्यों के अटकलबाज़ी शुरू हो गई है।

वाशिंग्टन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि बीजिंग में अमरीकी दूतावास के प्रतिनिधियों ने वुहान प्रयोगशाला का कई बार दौरा किया और 2018 में अमरीकी प्रशासन को सूचित किया था कि इस प्रयोगशाला में सेफ़्टी के सारे मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है।

चीन ने की डब्लूएचओ के संबन्ध में अमरीकी क्रियाकलापों की कड़ी निंदा

चीन के विदेशमंत्री ने घोषणा की है कि उनका देश अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का समर्थक है और आगे भी रहेगा।

चीन के विदेशमंत्री वांग यी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डाक्टर “टेडरोस अधानोम ग्रेबियेसेस” से टेलिफोनी वार्ता की। इस वार्ता में उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील दौर में कि जब पूरा संसार कोरोना से निबटने में लगा हुआ है, डब्लूएचओ तथा उसके महानिदेशक का समर्थन, वास्तव में बहुपक्षीयवाद के सिद्धांत के समर्थन के अर्थ में है। उन्होंने कहा कि चीन की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन का समर्थन वास्वत में कोरोना महामारी से मुक़ाबले के अर्थ में है।

चीनी विदेशमंत्री ने अमरीका की ओर से डब्लूएचओ की वित्तीय सहायता रोकने की आलोचना करते हुए कहा कि इस माध्यम से वाशिग्टन, अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों पर अपना दबाव बनाना चाहता है। ज्ञात रहे कि कोरोना वायरस को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ट्रम्प ने डब्लूएचओ की वित्तीय सहायता रोकने की घोषणा की है।

उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन पोलियो, मलेरिया, खसरा, टीबी, क्षयरोगों, मधुमेह, कैंसर और कुपोषण जैसी समस्याओं के समाधान में विश्व स्तर पर सक्रिय रूप से काम करता है। वर्तमान समय में डब्लूएचओ, कोरोना वायरस की जांच में सहायता कर रहा है। इसीके साथ वह कोरोना टेस्टिंग और उनसे जुड़े कामों के बारे में सुझाव भी देता है। वह कोरोना से संबन्धित शोधकार्यों, दवाओं तथा इसके टीके पर किये जा रहे काम में सहायता दे रहा है। इन परिस्थितियों में उसकी वित्तीय सहायता रोका जाना वास्तव में खुला अन्याय और अत्याचार है। डब्लूएचओ का वार्षिक बजट 4.5 बिलयन डाॅलर का है जिसमें अमरीका की भागीदारी 15 प्रतिशत है।

कोरोनाः ट्रम्प ने धमकाया कि अगर चीन लिप्त हुआ तो…

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने धमकी दी कि अगर साबित हो गया कि चीन ने जान बूझ कर कोरोना वायरस फैलाया है तो उसे सज़ा दी जाएगी।

दुनिया भर में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या अब 22 लाख 90 हज़ार से अधिक हो चुकी है जिनमें 1 लाख 58 हज़ार की मौत हो गई और 5 लाख 86 हज़ार संक्रमित ठीक हो गए।

इस बीच ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि अगर साबित हो गया कि कोरोना महामारी चीन ने जान बूझ कर फैलाई है तो उसे सज़ा दी जाएगी। ट्रम्प ने कहा कि अगर ग़लती से यह हुआ तो ग़लती तो ग़लती होती है लेकिन अगर जान बूझ कर यह किया है तो निश्चित रूप से इसका ख़मियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

ट्रम्प ने इसके साथ ही कहा कि चीन ने मरने वालों की संख्या छिपाई है। उन्होंने कहा कि चीन ने जो संख्या बताई है उस पर कौन विश्वास कर सकता है? चीन ने शुक्रवार को संख्या में सुधार करते हुए घोषणा की कि वुहान में 1300 अन्य लोग भी कोरोना से हताहत हुए थे लेकिन चूंकि यह मौतें अस्पतालों में नहीं हुई थीं इसलिए उन्हें गिनती में शामिल नहीं किया जा सका था।

दूसरी ओर इटली से सूचना आई है कि शनिवार को कोरोना से मरने वालों की संख्या 482 थी जबकि 3490 नए मामले सामने आए थे। इससे एक दिन पहले इटली में 575 मौतें हुई थीं और 3493 नए मामले सामने आए थे।

इतालवी अधिकारी कहते हैं कि अब हालात धीरे धीरे बेहतर हो रहे हैं। इटली में अब तक 23 हज़ार से अधिक मौतें हो चुकी हैं जबकि संक्रमितों की कुल संख्या लगभग एक लाख 76 हज़ार है।

इटली की तरह न्यूयार्क में भी कोरोना से होने वाली मौतों की दर में गिरावट आई है। शनिवार को न्यूयार्क में कोरोना से 540 मौतें हुईं। यह पिछले दो सप्ताह में एक दिन में होने वाली सबसे कम मौतें हैं। न्यूयार्क के गवर्नर एंड्र्यू कूमो ने बताया कि शनिवार को न्यूयार्क में 2000 से अधिक नए मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि संख्या को देखते हुए लगता है कि न्यूयार्क महामारी के चरम बिंदु को पार कर चुका है और अब गिरावट आ रही है।

वैसे अमरीका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 37 हज़ार से अधिक हो चुकी है और 7 लाख 6832 लोग संक्रमित हैं। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि हम चरम बिंदु को शायद पार कर चुके हैं और अनुमान है कि कोरोना से 60 से 65 हज़ार तक मौतें होंगी।

ट्रम्प ने इसके साथ ही कई राज्यों में लाक डाउन के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन किया। उन्होंने ट्वीट किया कि मिनेसोटा, मिशिगन औ वरजीनिया को आज़ाद करा लो।

इन राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नर हैं।

इस बीच तुर्की में संक्रमितों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ी है और यह 82 हज़ार से अधिक हो गई है। तुर्की में शनिवार को 3783 नए मामले सामने आए। तुर्की में कोरोना से मरने वालों की संख्या 1890 हो गई है।

ईरान ने कोरोना के प्रसार पर नियंत्रण कर लिया है जिसके बाद अब खाने पीने की चीज़ों और दवाओं के अलावा दूसरी चीज़ों की दुकानें भी खुलने लगी हैं। प्रशासन की ओर से सामाजिक दूरी और अन्य सावधानी बरतने के निर्देश के साथ कहा गया है कि आर्थिक गतिविधियां धीरे धीरे शुरू की जा सकती हैं।

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