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शब-ए-बारात में कब्रिस्तान और दरगाह न जायें

शिया-सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का फरमान, शब-ए-बारात में कब्रिस्तान और दरगाह जाने पर लगाई पाबंदी

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने शब-ए-बारात के मौके पर कब्रिस्तान और दरगाह में लोगों के आने पर पाबंदी लगा दी है। अगर पाबंदी का उल्लंघन किया गया तो इसके जिम्मेदार मुतवल्ली होंगे।
आगामी गुरुवार को शब-ए-बारात है। पहले शब-ए-बारात की रात मस्जिदों व घरों में लोग इबादत करते हैं। इसके बाद कब्रिस्तान जाते हैं और अपने परिजनों की कब्र पर फातिहा पढ़ते हैं और दरगाह में मजार पर चादरपोशी करते हैं।

लेकिन इस बार ऐसा करने पर रोक लगा दी गई है। बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएम शोएब ने मुतवल्लियों को भेजे पत्र में कहा कि वे लोगों को अपने घरों में ही इबादत करने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि लॉकडाउन की अवहेलना न हो। फरमान में साफ कहा गया है कि अगर आदेश की अवहेलना होती है तो सारी जिम्मेदारी मुतवल्ली की होगी।

वहीं यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी दरगाहों और कब्रिस्तान के ट्रस्टी और प्रबंधन समितियों को निर्देशित किया है कि वे अपने परिसर में लोगों को प्रवेश न दें। बोर्ड ने कहा है कि लोगों को 9 अप्रैल को घरों में ही इबादत करनी चाहिए।

आयत क्या कहती हैं? ईश्वरीय पैग़म्बरों का मूल दायित्व, बिना किसी डर व भय के ईश्वरीय संदेश को पहुंचाना है।

पैग़म्बरे इस्लाम और उनसे पहले वाले पैग़म्बरों को ईश्वरीय आदेशों के पालन में किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए।

सूरए अहज़ाब की आयत क्रमांक 39 का अनुवादः

(ये वे लोग हैं) जो ईश्वर के सन्देश पहुँचाते हैं और उससे डरते हैं और ईश्वर के सिवा किसी से नहीं डरते। और हिसाब के लिए ईश्वर काफ़ी है।

संक्षिप्त टिप्पणी:

ईश्वर के प्रिय बंदे और सच्चे ईमान वाले केवल ईश्वर को अपनी नज़र में रखते हैं और किसी की भी बातों व कटाक्षों से भयभीत नहीं होते क्योंकि वे जानते हैं कि उनके लिए ईश्वर काफ़ी है।

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

धर्म के प्रचार के लिए ईश्वर से भय व उस पर भरोसे और साहस व गंभीरता की आवश्यकता होती है और जिसमें ये विशेषताएं न हों वह धर्म के प्रचार के काम में सफल नहीं हो सकता है।

धर्म के प्रचार-प्रसार और उसकी रक्षा की राह में ईमान वालों को जो कठिनाइयां सहन करनी पड़ती हैं, उनका हिसाब ईश्वर के पास सुरक्षित है।

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