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सऊदी सरकार में कितना भयानक रूप ले चुका है कोरोना वायरस?

मीडिया की ओर से सऊदी अरब में कोरोना की स्थिति को लेकर बार बार सवाल उठाए जा रहे थे और अटकलें जारी ही थीं कि अचानक सऊदी अरब ने कर्फ़्यू का एलान कर दिया। रियाज़ जिद्दा, तबूक, दम्माम, ख़ुबर, ज़हरान, हुफ़ूफ़, ताएफ़ और क़तीफ़ में 24 घंटे के कर्फ़्यू का एलान किया गया।

अगर सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्री के बयान को ध्यान से देखा जाए तो अंदाज़ा हो सकता है कि यह कर्फ़्यू लंबे समय के लिए लगाया गया है।

सऊदी अरब में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 2795 बताई गई है मगर सऊदी अरब के आंकड़ों को हर कोई संदेह की नज़र से देख रहा है। ब्लूमबर्ग ने अमरीकी इंटैलीजेन्स एजेंसियों की रिपोर्ट के हवाले से लिखा कि सऊदी अरब उन देशों में है जो कोरोना से संक्रमित और हताहत होने वालों की संख्या छिपा रहे है।

सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता मुहम्मद अब्दुल आली ने जो बयान दिया उसमें साफ़ कहा कि कोरोना से लड़ाई हफ़्तों नहीं महीनों तक चलेगी। उनका कहना था कि केवल 50 प्रतिशत आबादी ने ही घरों में रहने के आदेश पर अमल किया है जिसके बाद पूरी तरह कर्फ्यू लगाने का निर्णय किया गया है। इस बयान में यह भी कहा गया है कि लाखों की संख्या में लोग कोरोना की चपेट में आएंगे।

सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिस प्रकार का बयान दिया है सऊदी अरब में उस तरह के दो टूक बयान की मिसालें बहुत कम हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह बयान इसलिए आया है कि देश में कोरोना का प्रसार बड़े पैमाने पर हो चुका है और सरकार इस बात से डर रही है कि वह हालात को क़ाबू में रख पाने में नाकाम हो जाएगी।

इसका कारण यह है कि सऊदी अरब कई युद्धों में उलझा हुआ है और दूसरी ओर तेल की क़ीमतों में भारी गिरावट की वजह से उसका ख़ज़ाना भी ख़ाली है। इन हालात में कोरोना का संकट फैल रहा है तो रियाज़ सरकार के पास बस यही रास्ता रह गया है कि बेबसी से हालात को तकती रहे।

सरकार की ओर से खुलकर बयान देने का उद्देश्य यह है कि देश के लोगों को बदतरीन हालात के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जाए ताकि उनकी ओर से अचानक कोई व्यापक प्रतिक्रिया न शुरू हो जाए।

ख़ालिद अलजयूसी

फ़िलिस्तीनी पत्रकार

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