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….1341 श्रद्धालु आश्रम में छिपे हुए थे!

Sagar PaRvez‎
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जब मोदी मीडिया और भक्त ‘तबलीगी-तबलीगी’ खेल रहे थे… 1341 श्रद्धालु लातूर आश्रम में थे (छिपे!)

दिल्ली के तबलीगी जमात की वजह से देश में लगातार कोरोना संक्रमितों के मिलने का मामला फिलहाल थमा भी नहीं कि महाराष्ट्र के लातूर जिले से भी ऐसा ही एक मामला सामने आ गया है। पुणे के जाधववाडी गांव में महानुभाव संप्रदाय के लोग लॉकडाउन शुरू होने से पहले एक सत्संग में शामिल होने के लिए यहां पहुंचे थे, लेकिन उसके बाद पूरे देश में अचानक से लॉकडाउन शुरू हो गया और ये सभी लोग यहीं फंसे रह गए।

सत्संग में फंसे लोगों को भेजा जा रहा है उनके गांव
मामला प्रकाश में तब आया जब तेज आंधी और पानी की वजह से चार दिन पहले यहां लगा मंडप गिर गया और लोगों को खाने-पीने तक की दिक्कत होने लगी। खाना बनाने का सामान खराब हो गया। इसकी वजह से इन महानुभावी साधकों को पेट भरने और सिर छुपाने के लिए मंदिर और स्कूलों का सहारा लेना पड़ा।

अब प्रशासन इन लोगों को इनके घर तक पहुंचाने के लिए निजी बसों का इंतज़ाम कर रहा है। बता दें कि लॉकडाउन के कारण देश के कई इलाकों में लोग जहां-तहां फंसे हैं। प्रदेश की सरकारें इनके लिए उचित प्रबंध कर रही हैं ताकि कोरोना के संक्रमण का खतरा पैदा न हो। कुछ राज्यों में लोगों को वहीं रोक कर खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा है तो कहीं लोगों को उनके गृह प्रदेश भेजने का भी काम हो रहा है।

जरूरी जांच के बाद गांव भेज रहा है प्रशासन
इनकी स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निजी बसों से इन सभी लोगों को इनके गांव जाधववाडी आश्रम लौटने की अनुमति दे दी है। इन लोगों को भेजने के लिए 44 सीट वाली एक बस में 22 यात्रियों को बैठाकर पुणे की जाधववाडी भेजा जा रहा है। फिलहाल 32 बसें उपलब्ध हुई हैं। इन बसों से सभी साधकों को वापस भेजने के लिए तीन दिन लगेंगे। इन सभी साधकों पर प्रशासन ध्यान दिए हुए है।

इन सभी साधकों के टेस्ट करने के बाद ही उन्हें आगे जाने की अनुमति दी जा रही है।

आसान नहीं होगा कोरोना को हरा पाना
हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि तबलीगी जमात की तरह ही अब इस कांड के सामने आने पर एक बार फिर कोरोना के मरीजों की संख्या में इजाफा होने की आशंका है।

दुख तो इस बात का है कि न जाने कब तक ऐसे हालातों से देश को गुजरना होगा और चिंता इस बात की है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो कोरोना को हरा पाना हमारे लिए आसान नहीं होगा।

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