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23 या 24 अप्रैल से रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है : इस साल यह महीना पहले से कुछ अलग रहने वाला है!

दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाले कोरोना वायरस के प्रसार के दौरान, 23 या 24 अप्रैल से रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है, लेकिन इस साल यह महीना पहले से कुछ अलग रहने वाला है।

इस्लाम धर्म में इस महीने का अपना अलग महत्व है। मुसलमानों का मानना है कि इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने में अल्लाह ने अपने अंतिम दूत हज़रत मोहम्मद पर क़ुरान नाज़िल किया था। रमज़ान के महीने में मुसलमानों पर रोज़े वाजिब किए गए हैं। एक अनुमान के मुताबिक़, दुनिया भर के 1.6 अरब मुसलमान महीने भर रोज़ा रखते हैं और विशेष इबादतों के साथ ही अन्य आध्यात्मिक काम अंजाम देते हैं।

रमज़ान में सूर्यास्त के बाद, सामूहिक रूप से रोज़ा इफ़्तार करना और जमात से नमाज़ अदा करना मुसलमानों के लिए विशेष महत्व रखता है। लोग मस्जिदों में या अपने घरों में एक साथ रोज़ा इफ़्तार करते हैं।

लेकिन इस साल दुनिया भर में कोरोना वायरस की महामारी के कारण, कहीं कर्फ़्यू है तो कहीं लॉकाडाउन। सरकारें और विशेषज्ञ लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने और विशेष सुरक्षात्मक उपाय करने का आग्रह कर रहे हैं, ताकि महामारी को अधिक फैलने से रोका जा सके। मस्जिदें बंद हैं और लोगों से अपने घरों में ही नमाज़ अदा करने की सिफ़ारिश की जा रही है।

रोज़ा रखना कुछ शर्तों के साथ हर बालिग़ मुसलमान पर वाजिब है और व्यक्तिगत रूप से यह हर मुसलमान की धार्मिक ज़िम्मेदारी है। इसलिए सामूहिक रूप से इफ़्तार करने या नहीं करने और मस्जिद में जाकर नमाज़ पढ़ने या घर पर ही नमाज़ अदा करने में परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव हो सकता है, लेकिन रोज़ा हर हाल में रखना होगा, मगर यह कि डॉक्टर स्वास्थ्य कारणों से ऐसा करने से रोके।

इसलिए रमज़ान को मुसलमान सिर्फ़ एक त्यौहार मात्र न समझें, बल्कि इसका अपना आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व है, जिससे हर हाल में लाभ उठाया जा सकता है। सामाजिक दूरी का ख़याल रखते हुए मुसलमान अपने घरों में रहते हुए ऑनलाइन मस्जिदों से जुड़ सकते हैं और धर्मगुरुओं से अपने सवाल पूछ सकते हैं या वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा धार्मिक आयोजनों में भाग ले सकते हैं।

कुछ मस्जिदों और धार्मिक केन्द्रों ने शुक्रवार के दिन साप्ताहिक नमाज़ के ख़ुत्बों या भाषणों का ऑनलाइन प्रसारण भी शुरू कर दिया है और रमज़ान में भी इसी तरह से अन्य कार्यक्रमों को जारी रखने का एलान किया है।

 

सऊदी सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए पहले ही उमराह बंद कर दिया था और अब दो सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों मक्का और मदीना में पूर्ण रूप से कर्फ़्यू लागू कर दिया है। सऊदी प्रशासन का कहना है कि इस साल हज के आयोजन के प्रभावित होने की भी संभावना है।

यहां ध्यान योग्य बात यह है कि रमज़ान के महीने में मुसलमान ग़रीबों का बहुत ख़याल रखते हैं और जमकर दान देते हैं। इस साल लॉकडाउन और प्रतिबंधों ने मज़दूर और ग़रीब वर्ग को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है, इसलिए जो कार्यकर्ता और स्वयं सेवी ग़रीबों तक खाना और ज़रूरत की चीज़ें पहुंचा रहे हैं, लोग उनसे संपर्क करके ऑनलाइन या अन्य तरीक़ों से ग़रीबों के लिए दान दे सकते हैं।

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