इतिहास

29 अप्रैल का इतिहास : 29 अप्रैल 1236 को महान सम्राट अबुल मुज़फ़्फ़र शमसुद्दीन ”अलतमस” का देहान्त हुआ!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 29 अप्रॅल वर्ष का 119 वाँ (लीप वर्ष में यह 120 वाँ) दिन है। साल में अभी और 246 दिन शेष हैं।

29 अप्रॅल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
==========
1997 – रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध लागू।
1999 – बच्चों के यौन शोषण पर रोक संबंधी विधेयक जापानी संसद में मंजूर।
2006 – पाकिस्तान ने हत्फ़-6 का परीक्षण किया।
2007 – आस्ट्रेलिया ने लगातार तीसरी बार क्रिकेट विश्वकप जीता।
2008 -ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदी नेजाद एक संक्षिप्त यात्रा पर भारत पहुँचे।
तिब्बत में मार्च 2008 में भड़की हिंसा के सिलसिले में एक स्थानीय अदालत ने 17 लोगों को 3 साल की क़ैद की सज़ा सुनाई।
2010 -भारत ने दुश्मनों के रडार की पकड़ में नहीं आने वाले मुंबई की मंझगांव गोदी में निर्मित आधुनिकतम उपकरणों से लैस युद्धपोत आईएनएस शिवालिक को नौसेना में शामिल किया। पहले पोत ‘आईएनएस शिवालिक’ को नौसेना में शामिल किया।
भारतीय इंजीनियर हरपाल कुमार ने लंदन में आँत में कैंसर के शिकार लोगों का ब्लड टेस्ट कर रोग का पता लगाने के बजाय उनके पेट का निरीक्षण कर सकने वाले कैमरे का आविष्कार किया है। इससे इस बीमारी की समय से पहले ही पहचान की जा सकेगी और 43 प्रतिशत रोगियों को मृत्यु से बचाया जा सकेगा।

29 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति
1965 – दीपिका चिखालिया – रामानन्द सागर के सीरियल ‘रामायण’ में सीता की भूमिका निभाकर प्रसिद्धि पाने वाली अभिनेत्री हैं।
1946 – अजीत जोगी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ, जो छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं।
1938 – ई. अहमद -एक राजनेता के रूप में भारत के दसवीं लोकसभा, ग्यारहवीं लोकसभा, बारहवीं लोकसभा, तेरहवीं लोकसभा और पंद्रहवीं लोकसभा सांसद के सदस्य रह चुके हैं।
1936 – ज़ुबिन मेहता – भारत सरकार द्वारा ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय संगीत निर्देशक।
1919 – अल्ला रक्खा ख़ाँ, सुविख्यात तबला वादक, भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल और संगीत वादकों में से एक
1848 – राजा रवि वर्मा, विख्यात चित्रकार
1547 – भामाशाह – मेवाड़ के महाराणा प्रताप के मित्र, सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार।
1946- अजीत जोगी- छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री।

29 अप्रॅल को हुए निधन
2010 – कमलादेवी शुक्ला, गायत्री मण्डल की संस्थापक सदस्या एवं समाज सेविका।
1999- केदार शर्मा – भारतीय फ़िल्म निर्देशक, निर्माता, पटकथा लेखक और हिंदी फ़िल्मों के गीतकार
1997 – आर. एन. मल्होत्रा – भारतीय रिज़र्व बैंक के सत्रहवें गवर्नर
1988 – बृष भान – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे।
1979 – राजा महेन्द्र प्रताप – भारत के सच्चे देशभक्त, क्रान्तिकारी, पत्रकार और समाज सुधारक
1960 – बालकृष्ण शर्मा नवीन – हिन्दी जगत् के कवि, गद्यकार और अद्वितीय वक्ता।
1958 – गोपबन्धु चौधरी – उड़ीसा के प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा गाँधीवादी कार्यकर्ता।

29 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस

=====

1639, दिल्ली में लालक़िले की नींव रखी गई।

1661, चीन के मिंग वंश ने ताइवान पर क़ब्जा किया।

1978, अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोहियों ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया।

1945, जापान की सेना ने रंगून छोड़ा।

1993, पहली बार बकिंघम पैलेस को आम जनता के लिए खोला गया और उसे देखने के लिए आठ पाउंड का टिकट लगाया गया।

2005, सीरिया की अंतिम फ़ौजी टुकड़ी लेबनान से रवाना हुई।

2010, भारत ने दुश्मनों के रडार की पकड़ में नहीं आने वाले मुंबई की मंझगांव गोदी में निर्मित आधुनिकतम उपकरणों से लैस युद्धपोत आईएनएस शिवालिक को नौसेना में शामिल किया।

29 अप्रैल सन 1682 ईसवी को रूस में पीटर द ग्रेट ने 10 वर्ष की आयु में शासन संभाला। वे रोमानोफ़ वंश के तीसरे ज़ार शासक थयूडर के भाई थे। शासन संभालने के पश्चात उनकी बहन ने, जो शासन की उत्तराधिकारी थीं पीटर को मॉस्को के निकट एक गांव भेजकर स्वंय सत्ता हथिया ली। कुछ समय बाद पीटर ने विशाल सेना तैयार की और अपनी बहन के मुकाबले में युद्ध के लिए डट गये। इस युद्ध में पीटर को विजय प्राप्त हुई और वे दोबारा रुस के शासक बन गये। इसके बाद से उन्होंने पूरी गम्भीरता के साथ देश की आंतरिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया। उन्होंने सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक, क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किये। पीटर ने इसी प्रकार बहुत से क्षेत्रों पर अधिकार करके अपने देश का विस्तार किया। सन 1725 ईसवी में पीटर की मृत्यु हुई।

========

 

29 अप्रैल सन 1747 ईसवी को फ़्रांस की 90 हज़ार की सेना ने हालैंड पर आक्रमण आरंभ किया। इस सेना ने बहुत तेज़ी से आगे बढ़ते हुए हालैंड में प्रवेश किया। इस युद्ध में ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया, हालैंड की सहायता कर रहे थे किंतु विजय फ़्रांस की हुई और हालैंड के कमज़ोर होने की प्रक्रिया, जो १७वीं शताब्दी के अंत से आरम्भ हुई थी, और भी तेज़ तथा व्यापक हो गयी। इस स्थिति के चलते हॉलैंड को योरोप से बाहर अपने कई उपनिवेशों से हाथ धोना पड़ा।

==============

29 अप्रैल सन 1928 ईसवी को तुर्की में अरबी लिपि के स्थान पर लैटिन लिपि को औपचारिकता दी गयी। यह कदम तुर्की में इस्लामी संस्कृति का अंत और पश्चिमी मूल्यों को उसके स्थान पर रखने के परिप्रेक्ष्य में उठाया गया था। यह कार्यवाही मुसतफ़ा कमाल नामक नेता ने, जो अतातुर्क के नाम से प्रसिद्ध हैं, सन 1923 में आरंभ की थी। अक्तूबर सन 1923 में 623 वर्षीय उसमानी शासन के पतन की घोषणा के पश्चात अतातुर्क के नेतृत्व में तुर्की में प्रजातंत्र की स्थापना हुई। उन्होंने तानाशाही का अंत किया और तुर्की के पारम्परिक वस्त्र के स्थान पर पश्चिमी वेशभूषा को प्रचलित किया। इस्लाम धर्म के प्रचार पर प्रतिबंध लगाया और राष्ट्रीय लिपि को अरबी से लैटिन में परिवर्तित कर दिया।

अंतत: तुर्की के संविधान से इस्लाम धर्म के औपचारिक धर्म होने को निकालकर देश में धर्म से दूर, शासन लागू किया और तुर्की की मुसलमान जनता के प्रतिरोध को निर्ममता से कुचल दिया। अतातुर्क के इस प्रकार के पश्चात्य प्रवृत्ति के क्रियाकलापों से तुर्की की इस्लामी संस्कृति और सभ्यता को आघात तो पहुंचा किंतु इस्लाम के प्रति इसदेश की जनता की निष्ठा में कोई कमी नहीं आयी और आज भी इस देश में इस्लाम समर्थकों की संख्या बहुत अधिक है।

===============

29 अप्रैल सन 1945 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में घटक सेनाओं को एक और बड़ी पराजय का सामना हुआ। इटली में जर्मनी की रक्षा पंक्ति के टूट जाने के बाद संयुक्त सेनाओं ने एक व्यापक आक्रमण करके इटली पर अधिकार कर लिया। इटली, जहॉ मसोलीनी का राज था, जर्मनी का घटक था। इटली में संयुक्त सेना की सफलता के पश्चात इस देश में तैनात जर्मन सैनिकों ने संयुक्त सेना के समक्ष हथियार डाल दिये।

==================

29 अप्रैल वर्ष 1236 ईसवी को भारत के बादशाह अलतमस का देहान्त हुआ। उनका पूरा नाम अबुल मुज़फ़्फ़र शमसुद्दीन अलतमस था। वे ग़ुलाम परिवार के संस्थापक क़ुतुबुद्दीन एबक के दामाद और उनके उतराधिकारी थे। वे तुर्कमनिस्तान में अलबरी क़बीले के प्रमुख अहल ख़ान के पुत्र थे। बचपन में उनके चचेरे भाईयों ने ईर्ष्या के कारण उन्हें ग़ुलाम बनाकर बेच दिया था। उनका प्रशिक्षण बुख़ारा में सद्र जहां के परिवार में हुआ था।

वहीं से एक व्यक्ति जमालुद्दीन ने उन्हें क़ुतुबुद्दीन एबक के हाथ बेच दिया। क़ुतुबुद्दीन एबक ने उन्हें पहले अपनी सेना का प्रमुख बनाया और उसके बाद शीकार का प्रमुख बना दिया और अपनी पुत्री से उनका विवाह कर दिया। बाद में उन्हें ग्वालियर और फिर बदांयू का गवर्नर बना दिया। वर्ष 1210 में एबक के देहान्त के बाद उनका पुत्र आराम शाह राजा बना किन्तु वह विफल राजा सिद्ध हुआ और देश के कई भागों में विद्रोह तथा अशांति फैल गयी।

इसीलिए अलतमस ने सरकार की ज़िम्मेदारी संभाल ली और वे भारत के राजा बन गये। वह अपने निर्माण कार्य के लिए बहुत प्रसिद्ध थे उनके द्वारा निर्माण की गयी इमारतों में क़ुतुब मीनार उल्लेखनीय है।

==============

 

10 उर्दीबहिश्त सन 1349 हिजरी शम्सी को ईरान के कवि लेखक और चित्रकार इसमाईल आश्तीयानी का निधन हुआ। उन्होंने शिक्षा प्राप्ति के पश्चात ईरान के विख्यात चित्रकार कमालुल मुल्क से चित्रकला सीखी जिसके पश्चात कमालुल मुल्क ने उन्हें अपने शिक्षा केंद्र का शिक्ष्क नियुक्त कर दिया और सन 1307 हिजरी शम्सी में यह केंद्र आश्तेयानी के ही हवाले कर दिया। उन्होंने इस शिक्षा केंद्र का कार्यभार संभालने के पश्चात गणित चित्रकला और इतिहास पर विशेष रुप से ध्यान दिया।

उनकी विख्यात पेटिंग्स में नामे नवीस रुयाए हाफ़िज़ और परन्देहाए तीर ख़ुर्दे का नाम लिया जा सकता है।

===============

10 उर्दीबहिश्त ईरानी कैलेन्डर में 10 उर्दीबहिश्त के दिन को “फार्स खाड़ी राष्ट्रीय दिवस” का नाम दिया गया है। इस दिन का नाम “फार्स की खाड़ी राष्ट्रीय दिवस” रखने की वजह यह है कि ईरान से शत्रुता रखने वाले कुछ देशों व व्यक्तियों ने इस एतिहासिक नाम में हेरा-फेरी करके “फार्स की खाड़ी” का दूसरा नाम रखा। विश्व की विभिन्न भाषाओं में इस एतिहासिक नाम का जो अनुवाद हुआ है उसमें “फार्स की खाड़ी” या “पार्स सागर” शब्द का प्रयोग किया गया है।

मैक्सिको और हेड्सन की खाड़ी के बाद “फार्स की खाड़ी” दुनिया की सबसे बड़ी तीसरी खाड़ी है। “फार्स की खाड़ी” में और उसके तटवर्ती क्षेत्रों में तेल और गैस के अपार भंडार हैं जिसके कारण इसे क्षेत्र एवं विश्व का महत्वपूर्ण जलमार्ग समझा जाता है। “फार्स की खाड़ी” सबसे असली व मुख्य नाम है जो प्राचीन किताबों व दस्तावेज़ों में मौजूद है। तबरी, मसऊदी और याकूबी जैसे इस्लामी इतिहासकारों और भूगोल वेत्ताओं की जो किताबें हैं उनमें इन लोगों ने स्वीकार किये हैं कि इस्लाम से पहले “फार्स की खाड़ी” के पूरे क्षेत्र का संबंध ईरान से था।

ईरानी राष्ट्र के शत्रुओं ने “फार्स की खाड़ी” का नाम जिन कारणों से बदलने की कोशिश की उस बात को ध्यान में रखते हुए इस्लामी गणतंत्र ईरान की उच्च सांस्कृतिक क्रांति परिषद ने दस उर्दीबहिश्त का नाम “फार्स की खाड़ी राष्ट्रीय दिवस” रख दिया। यहां इस बात का उल्लेख़ ज़रूरी है कि दस उर्दीबहिश्त को ही हुर्मुज़ स्ट्रेट से पुर्तगालियों को निकाला गया था।

“फार्स की खाड़ी का नाम बहुत पुराना है जिसके कारण कुछ लोगों का मानना है कि फार्स की खाड़ी विश्व की सभ्यताओं का पालना या सबसे पहले इंसान रहीं रहता था। प्राचीन यूनानी फार्स की खाड़ी को “पर्सीकूस सीनूस” या सीनूस “पर्सीकूस” के नाम से जानते थे जो वही फार्स की खाड़ी है। इस प्रकार ग़ैर ईरानी स्रोतों व किताबों में फार्स की खाड़ी का जो नाम करार दिया गया है उसमें किसी प्रकार के जातीय भेदभाव से काम नहीं लिया गया है।

***

5 रमज़ान सन 646 हिजरी क़मरी को सातवीं शताब्दी हिजरी के प्रसिद्ध हकीम अफ़ज़लुददीन अब्दुल्ला तबीब ख़ूंजी का निधन हुआ। उनके पिता अब्दुल मालिक तून्जी थे। अफ़ज़ूददीन का जन्म 590 हिजरी क़मरी में ईरान के पश्चिमोत्तरी क्षेत्र ख़लख़ाल में हुआ। उन्हें कई विषयों में दक्षता प्राप्त थी। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं।

==============

5 रमज़ान सन 1236 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात धर्मगुरु हाज मुल्ला अली अलियारी तबरेज़ी का ईरान के तबरेज़ नगर में जन्म हुआ। वे इस्लामी ज्ञान में पूरी तरह निपुण थे। इसके अतिरिक्त उन्हें गणित, चिकित्सा, और खागोल शास्त्र का भी एक योग्य शिक्षक समझा जाता था। वे आरंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद इराक़ के नगर नजफ़ चले गये जो उस समय इस्लामी शिक्षा का केन्द्र था। वहॉ उनहोंने शैख़ मुर्तज़ा अन्सारी तथा मीर्ज़ा शीराज़ी जैसे महान धर्मगुरुओं से शिक्षा ली। स्वदेश वापसी के बाद वे लोगों की शिक्षा दीक्षा में लगे रहे। वे गणित और खगोल शास्त्र भी पढ़ाते थे। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *