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अंग्रज़ी की पत्रकार प्रियंका पाठक ने उठाया बाबा राम देव के अपराधों से पर्दा : रामदेव ने जिससे भी कुछ गुर सीखा वह मारा गया : देखें वीडियो

 

भारत में समय समय पर बाबाओं, संतों, साधुओं की खबरें आती रहती हैं, यहाँ सदियों से बड़े ही तपस्वी, चमत्कारी संत पैदा होते रहे हैं, संत, साधू समाज से खुद को अलग रख कर समाज की तरक्की, शिक्षा, न्याय, सद्भाव को ऊंचाइयों तक ले जाते हैं, भारत एक विशाल देश है और संस्कृति के लिहाज़ से महान देश है, ये देश एक तरफ से हिमालिया की बुलंद चोटियों, पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है, जहाँ दुनियां के खूबसूरत नज़ारे मौजूद हैं, एक तरफ अरब सागर है, एक तरफ हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी है, यहाँ दुनियां से सबसे बड़े दरिया हैं, घने जंगल और वन हैं, कुदरती ख़ज़ाने हैं, खनिजों के अपार भंडार हैं, यहाँ दुनियांभर में पाए जाने वाले सभी मज़हब के मानने वाले लोग हैं, विभिन भाषाएं हैं,

भारत मूल रूप से प्रवासियों का देश है जहाँ लगभग 90 फीसद से ज़ियादा आबादी बाहर से आये लोगों की है, मूल भारतियों संख्या बहुत कम है जो कि दक्षिण और उत्तर भारत में मिलते हैं,

भारत की संस्कृति में धर्म का सबसे ऊँचा िस्थान है, आज़ादी के बाद भी यहाँ संविधान के रहते हुए धर्म का वर्चव है, सरकारों से लेकर न्याय व्यवस्था तक धर्म के हिसाब से काम करती हैं, 21 वीं सदी के भारत में पूर्व काल से अधिक जटिलताएं हैं, इस समय देश के अंदर धर्म ने हर संस्था को अपने लपेटे में ले लिया है लिहाज़ा धर्म की आढ़ लेकर अनेक लोग अपने काले धंधे, काले कारनामे भी करते हैं, इन लोगों की पहुँच सरकारों में सर्वाच्य व्यक्तियों तक होती है इस लिए इनका रुतबा ज़बरदस्त होता है, इन लोगों के अपने निजी ‘भक्त’ ”लठैत” होते हैं जो इशारा मिलते ही ‘काम’ तमाम कर देते हैं, ये लोग अपने आडम्बर और पाखंड से चमत्कारी संसार की रचना करते हैं जहाँ जो पहुँच गया वो फिर इनके चंगुल से नहीं निकल पाता है

ये लोग देखने में कोई संत मालूम होते हैं लेकिन इनकी असली दुनियां बहुत भयानक होती है, सरल स्वाभाव का दिखावा करने वाले अंदर से कुख्यात होते हैं,

पीछे कुछ वर्षों में देश के अंदर अनेक बाबाओं के काले चिट्ठे सामने आ चुके हैं, इनके मायावी दुनियां के राज़ भी फ़ाश हुए हैं, इनमे से कई नामी बाबा जेलों में बंद हैं, कुछ फरार हैं तो कुछ सरकारों का आशीर्वाद प्राप्त मज़े ले रहे हैं

यहाँ एक बाबा के बारे में एक जर्नालिस्ट ने अपनी किताब में चौंकाने वाले राज़ खोले हैं, इन्होने एक किताब में सारी कहानी बयान की थी, खबर तो ये पुरानी है लेकिन है मज़ेदार

अंग्रज़ी की पत्रिकार हैं प्रियंका पाठक ये रिपोर्ट उनके ज़रिये किये गए खुलासों पर आधारित है

देखें रिपोर्ट


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अंग्रेजी पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण पिछले कुछ सालो से बाबा रामदेव पर स्टडी कर रही है प्रियंका पाठक ने करीब 6 साल की कठोर मेहनत से बाबा रामदेव पर रिसर्च करती रही और उसपर एक बुक लिखी है जिसका नाम है ‘गॉडमैन टू टाइकून’ । इस बुक में बाबा रामदेव के फर्श से शीर्ष तक के सफर को बड़े ही सहज तरिके से बताया है प्रियंका पाठक के अनुसार यह सब इनफार्मेशन उसने बाबा रामदेव के आसपास व उसके निजी रहे लोगो से ली है |

प्रियंका पाठक ने अपनी बुक में बाबा के खिलाफ ऐसे रहस्यों से पर्दा उढ़ाया है जो बाबा के समर्थकों को शायद गवारा नहीं होगा लेकिन एक बार निष्पक्ष होकर यदि सोचेंगे तो शायद पाठक की बातो पर आप विश्वास करेंगे ।

प्रियंका पाठक के अनुसार बाबा रामदेव के गुरु शंकर देव एक दिन सुबह की सैर के वक्त से गायब है या हो गए । आपको बता दे की गुरु शंकर देव वही शख्स है जिन्होंने ही हरिद्वार में बाबा रामदेव को दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट और अपनी अरबों रूपए की ज़मीने दान की ।

लगातार कई साल से बाबा रामदेव पर स्टडी कर रही प्रियंका पाठक ने इस किताब में बाबा के कई भेद खोलें हैं उसके अनुसार यह एक इत्तफाक था या साजिस का हिस्सा, आखिर बाबा रामदेव ने जिससे भी कुछ गुर सीखा वह कुछ समय बाद क्यों एक रहस्मयी मौत का शिकार हो गया ।

जब गुरु शंकर देव रहस्मयी तरीके से गायब हुए तो बाबा रामदेव उस वक्त जुलाई 2007 में ब्रिटेन यात्रा पर थे अपने प्रमुख गुरु के लापता होने के बाद भी रामदेव ने अपने ब्रिटेन यात्रा चालू रखी और गायब होने के दो महीने बाबा रामदेव भारत वापिस लौटे ।

बाबा रामदेव के एक ओर गुरु व मित्र आयुर्वेद के जाने माने वैद्य स्वामी योगानंद की हत्या भी कम रहस्मयी नहीं है 1995 में स्वामी योगानंद ने ही बाबा रामदेव को आयुर्वेद दवा बनाने का लाइसेंस उपलब्ध कराया था या यह कहे की आयुर्वेद की दुनिया में स्वामी योगानंद की छाव में ही बाबा रामदेव ने चलना सीखा था । अगले 8 सालो तक बाबा रामदेव ने स्वामी योगानंद के लाइसेंस पर दवाइया बनाता रहा लेकिन 2003 में बाबा रामदेव ने स्वामी योगानंद के साथ अपनी साझेदारी ख़त्म कर ली और कुछ ही महीने बाद स्वामी योगानंद का शरीर खून से लथपथ उसके ही घर में मिला । कुछ समय बाद 2005 में हत्या की छानबीन बंद कर दी ।

मार्च 2005 ट्रस्ट के व्यवसायीकरण को लेकर बाबा रामदेव का विवाद कर्मवीर से हो गया था कर्मवीर उस समय दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष थे इसके बाद कर्मवीर ने हमेसा के लिए ट्रस्ट को अलविदा कह दिया ।

इसी तरह कुछ समय बाद सन 2009 में में बाबा रामदेव का का विवाद आस्था टीवी के संस्थापक सदस्य किरीट मेहता से हुआ मेहता के प्रयास और मेहनत से ही बाबा रामदेव को आस्था टीवी के ज़रिये ही अपना नाम कमाया और लोगो में पॉपुलर हुए । किरीट मेहता ने तो बाबा के खिलाफ अपहरण का केस भी दर्ज करवा दिया था।

राजीव दीक्षित, जिसके स्वदेशी अभियान पर आज पतंजलि का सम्पूर्ण करोबार चल रहा है 2010 में राजीव दीक्षित लोगो को सम्बोधित करने गए, उस वक्त बाथरूम में उनकी लाश मिली लेकिन अगर उस वक्त मरने के उपरांत उनका पोस्टमार्डर होता तो शायद उसकी मौत के रहस्य से पर्दा उठ जाता लेकिन उसकी मौत के तुरंत बाद राजीव दीक्षित के पार्थिव शरीर को बाबा के आश्रम में लाया गया व उसके शरीर को अग्नि देने में बहुत ही ज्यादा जल्दबाजी की गई और लोगो को कहा गया की उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है लेकिन राजीव दीक्षित की शव यात्रा में शामिल लोगो के अनुसार राजीव दीक्षित के होठो का रंग नीला पड़ने लगा था । अक्सर ऐसा शरीर, जहर के होने से होता है ।

और भी ऐसे हादसों से पर्दा उठाना बाकि हो सकता है जो बाबा रामदेव की सफलता का राज है

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रामकृष्ण यादव उर्फ बाबा रामदेव के जीवन पर आधारित पुस्तक―’Godman to tycoon: The Untold Story of Baba Ramdev’ लिख कर महिला पत्रकार और लेखिका प्रियंका पाठक-नारायण ने देश-भर में एक नई हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका में पढ़ी-लिखी और मुंबई में रहने वाली प्रियंका की इस पुस्तक के प्रकाशक को न्यायालय ने एक आदेश पारित कर किताब की अन्य प्रतियां छापने पर रोक लगा दी है।

रामदेव की बायोग्राफी के रूप में लिखी इस किताब में तीन हत्याओं, या तीन मौतों का विस्तार से परिस्थितियों व शंकाओं का प्रमाण सहित उल्लेख किया गया है। लेखक के अनुसार यह पुस्तक बाबा रामदेव के जीवन से जुडी और कई पत्रकारों के साथ, पचास से ज्यादा साक्षात्कारों के आधार पर लिखी गयी है जिनमें से कई तो टेप भी किए गए हैं, जिसमें रामदेव खुद स्वयं और अपने निकट सहयोगियों और परिवार के सदस्यों सहित शामिल हैं।

इस पुस्तक में उन स्रोतों पर विस्तृत 25-पृष्ठो के नोट भी शामिल हैं, जो साक्षात्कार, लेख, पुलिस रिपोर्ट और आरटीआई द्वारा मांगी गयी सूचनाओ के जबाबो के आधार पर लिखे गए है दोस्तों आज राम किसान यादव, उर्फ बाबा रामदेव, भारत में सबसे अधिक फेमस लोगों की सूची में सबसे आगे हैं बाबा ने सन 2002 में सबसे पहले संस्कार टीवी पर अपना पेट घूमना शुरू किया था। और आकड़ो के मुताबिक पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड आज भारत में शीर्ष दस विज्ञापनदाताओं में से एक है जिससे आज रामदेव का चेहरा सर्वव्यापी हो गया है।

आज बच्चा बच्चा रामदेव को जानता है पर बाबा के बारे में अर्थात उनके जीवन के रहस्यों को कुछ ही लोग जानते है ऐसे ही रहस्यों को उजागर करती है यह पुस्तक जो कि फिरहाल न्यायालय के आदेश से बाजार से गायब है

आइये जानते है कि इस किताब में किन तीन मामलो के बारे में लिखा गया है जिससे कि न्यायालय को इस किताब को बैन करना पड़ा

पहला मामला गुरु शंकरदेव का गायब होना
रामदेव के 77 वर्षीय गुरु शंकरदेव का गायब होने से पूर्व रामदेव का एक माह के लिए विदेश चले जाना। दिव्य योगपीठ ट्रस्ट की सभी सम्पत्तियां शंकरदेव के नाम थीं, जो अब रामदेव के पास हैं। इस प्रकरण की CBI जाँच अत्यंत मद्धम गति से जारी है।

दूसरा मामला स्वामी योगानन्द की हत्या
रामदेव को आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण का लाइसेंस देने वाले स्वामी योगानंद की वर्ष 2005 में रहस्यपूर्ण हत्या हो गयी। कुछ लोगों का शक रामदेव पर है।

तीसरा मामला राजीव दीक्षित की संदिग्ध मृत्यु
राजीव दीक्षित का जन्म 30 नवम्बर, 1967 को ग्राम नाह, जिला अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता का नाम राधेश्याम दीक्षित (BTO officer) तथा माता का नाम मिथिलेश कुमारी दीक्षित था। एमटेक तक की शिक्षा ग्रहण करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता दीक्षित, आज़ादी बचाओ आन्दोलन व स्वदेशी मूवमेंट के सूत्रधार भी रहेे।

30 नवम्बर, 2010 को भिलाई, छत्तीसगढ़ में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गयी। लोगों के अन्दर स्वदेशी की भावना जगाने वाले दीक्षित की मौत को कुछ लोग हत्या भी मानते है जिसका दोषी रामदेव को माना जाता हैे।

तीनों मामलो की हो सीबीआई जाँच

लोगों का मानना है कि रामदेव के गुरु शंकरदेव का रहस्यपूर्ण ढंग से गायब हो जाने के साथ ही अन्य दो हत्याओं/मौतों को भी CBI के दायरे में लाना उपयुक्त होगा। उक्त जाँच में भी शीघ्रता कर CBI को दूध का दूध और पानी का पानी अवश्य करना चाहिए। इसके अतिरिक्त साधू वेशधारी इस कॉर्पोरेट व्यवसायी रामदेव के विराट आर्थिक साम्राज्य के पीछे दबे-ढके अनेक मामलों की जांच होनी आवश्यक है

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Mayur Panghaal
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The courts are definitely under feku’s pressure.Issuing such ex parte orders is unprecedented without asking the respondents for a reply.And by the way…the way he teaches pranayama is deleterious for your health.Ask any of the old school yoga masters like sadashiv nimbalkar or iyengar or any other yoga guru and they will tell you that if you do pranayama the way he teaches you it will harm you more than help you.Ayurveda is never about peddling remedies in the bottle for all.Its a highly individualised science.Ramdev is registered as a charity.Gets free land.Pays zero taxes.He also has an island in Scotland.He was under investigation for sending money via hawala via madagascar for the purchase of the island..but feku won the elections.
All trust accounts are public documents.The returns have to be filed with the IT and Charity commissioner…but ofcourse none have.This is the favorite method of looting the nation.almost all netas and cronies do it this way.

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