विशेष

अब सिर्फ़ बीड़ी पियूँगा सिगरेट नही

Saud Ul Hasan
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हम सबकी ज़िम्मेदारी है।

याद रखिए अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया की…
“अगर तुम्हारा पड़ोसी भूखा सो गया तो तुम्हारा खाना तुम पर हराम है” किसी की तकलीफ़ की वजह मत बनिये बल्कि ख़ुशी की वजह बनिये,अल्लाह नेक राह में लुटाने वालों पर ही दौलत की बारिश करता है। फिर ये उम्मत की शहज़ादी इस हाल में क्यों है? क्या इस मासूम के घर के आस पास ऐसा कोई नहीं होगा जो इसके लिए कपड़े मुहैय्या करवा सके, उसके रुख्सार पर तबस्सुम की वजह बने, ख्याल कीजिए अपने आस पास, अपने खानदान में, अपने मुहल्ले में, अपने कस्बे में, अपने शहर में।

कुछ तस्वीरे कई सालों से मेरे फ़ोन में है। अक्सर देखता हूँ और हर ईद पर कुछ ना कुछ लिखता हूँ, पर वो नहीं लिख पाता जो इस तस्वीर के दुःख दर्द को बयान कर सके, अल्फ़ाज़ कम पड़ जाते हैं, इस मासूम को देखकर अजीब सी तकलीफ़ होती है जिसको बयान नहीं कर सकता..!!

इस तस्वीर को गौर से देखिये और सिर्फ इतना महसूस कीजिए की तस्वीर में जो बच्ची है, वो आपकी बहन है, वो आपकी बेटी है, वो आपकी भांजी है, क्या गुज़रेगा आपके दिल पर? कैसा महसूस करेंगे आप? दिल फट जायेगा, आँखें नम हो जाएंगी दिल रेज़ा रेज़ा हो जाएगा, अगर दुनिया के मुसलमान ईमानदारी से अपनी ज़कात मिस्कीनों में तक़सीम करते तो शायद ये मासूम बिटिया अपनी हम उम्र के सामने शर्मसार नहीं होती, वो ये ना सोचती की मेरे पास नए कपड़े नहीं, वो ये ना सोचती की मेरे जिस्म पर नए कपड़े क्यों नहीं हैं? ईद ख़ुशी का दिन है, नए नए कपड़े और नए नए पकवान बनाने और दोस्त अहबाब को खाने, खिलाने, मिलने, जुलने का दिन है, अल्लाह के लिए अपनी इन खुशियों में अपने आस पास के ग़रीबों को शामिल कीजिए, उनके चेहरे की मुस्कान की वजह बनिये, उनसे गले मिलिए, उनको पास में बैठाइए और बड़े छोटे के एहसास को दफ़्न कर दीजिए, ये तो अल्लाह के रसूल की हदीस है कि..”ना किसी गोरे को काले पर, ना किसी काले को गोरे पर, ना किसी अरबी को अजमी पर, ना किसी अजमी को अरबी पर, ना किसी अमीर को ग़रीब पर, ना किसी ग़रीब को अमीर पर, कोई फौकियात नही है”


Arif Kamal
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धूम्रपान
आत्मकथा😂😂

सन 2000 में सिगरेट पीना शुरू किया।उस वक्त पैसे नही होते थे पास तो ज़्यादा नही पी जाती थी।दिन भर में 3,4 बस। उसके बाद MS करने पहुच गए।बहुत सख्त ट्रेनिंग थी।मिलिट्री ट्रेनिंग से बस एक दर्जा कम मानी जा सकती है।जो लखनऊ से पढ़े हैं वो हालात जानते है।दिमागी टेंशन ऊपर से तनख्वाह मिलने लगी तो सिगरेट की संख्या भी बढ़ गई।शुरू में कोई दिक्कत नही हुई।पर धीरे धीरे लगने लगा कि ये सिगरेट सेहत को नुकसान कर रही है साथ ही ये काम मे बाधा भी बन रही है।कई बार लगता था जैसे सिगरेट के ही लिए जी रहे है।बहुत बार अपने पास नही है तो मांग कर भी पी जाती है।सबके सामने नही पी सकते तो टॉयलेट ही का इस्तेमाल होता है स्मोकिंग के लिए।

कई बार शर्मिंदगी का भी सामना होता है जब अचानक से कोई सामने आकर कहे डॉक्टर साहब आप सबको तो मना करते हो खुद पीते हो।
उसके बाद शुरू होती है छोड़ने की कोशिश।तरहः तरहः की कसमें खाई गई।अल्लाह की कसम की तो पचासों बार धज्जियां उड़ाई गई।पर कामयाबी नही मिली।जो कसमें और खाई गई वो निम्न प्रकार हैं।

*अब सिर्फ बीड़ी पियूँगा सिगरेट नही।
नतीजा ये हुआ के सिगरेट नही छूटी बीड़ी की लत और लग गई।

*अब सिर्फ ट्रेन में पियूँगा।नतीजा ये हुआ कि रोज़ 4 किलोमीटर बाइक चला के रेलवे स्टेशन जाता था रात को और किसी खड़ी ट्रेन में सिगरेट पी के आता।

*अब सिर्फ किसी और कि दी हुई सिगरेट पियूँगा।
नतीजा ये की सिगरेट के भिखारी बन गए।मांग मांग के शर्मिंदा हो गए तो फिर से खुद खरीद कर पीना शुरू कर दिया।

*सिर्फ नॉनवेज खाएंगे तभी पियेंगे।नतीजा ये हुआ कि मैस का खानां छोड़ कर रोज़ चौक में चिकन खानां शुरू।

*एक दिन में बस 3 पियेंगे।नतीजा ये की बुझा बुझा के एक सिगरेट 3 बार मे पी जा रही है।

और भी पचासों कहानियां है।कहने का तातपर्य ये है कि ये जानते हुए भी की सिगरेट नुकसानदायक है और नही पीनी चाहिए इसको छोड़ना नामुमकिन सा हो गया।
आखिरकार 20 जनवरी 2020 को वो दिन आ गया जब अंतिम बार कोशिश की गई ।एक साथ बहुत सारी सिगरेट पी और आगे से ना पीने का इरादा किया।इस बार कोई कसम नही खाई।अल्लाह का ऐसा करम हुआ कि कामयाबी मिल गई।20 साल की आदत से छुटकारा मिल गया।

(नशा बुरी चीज है।हल्का हो या भारी।चाहे गुटखे पान का ही क्यो ना हो आपको अपना गुलाम बना लेता है।शराब का नशा तो इन सब से बदतरीन।अपने बच्चो को खुद को इस नशे की आदत से बचाने की कोशिश कीजिये।अगर आदत है तो छोड़ने की कोशिश कीजिये।नामुमकिन नही है छोड़ना)

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