दुनिया

अमेरिका ”ओपन स्काई संधि” को छोड़ देगा : रूस ने किया बड़ा एलान!

ट्रंप की धमकी
अमेरिका ने 35 देशों वाली ओपन स्काई संधि से निकलने की धमकी दी है. इस संधि के तहत सदस्य देश एक दूसरे के वायु क्षेत्र में निगरानी के लिए उड़ान भर सकते हैं. ट्रंप प्रशासन रूस पर संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है.

वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि संधि से औपचारिक तौर पर बाहर आने में छह महीने का समय लग सकता है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पूरे मामले को रूस पर डाल दिया है. उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं कि रूस के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं. लेकिन रूस इस संधि का पालन नहीं कर रहा है. तो जब तक वह ऐसा नहीं करता, तब तक हम इससे बाहर रहेंगे.”

इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन कई अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों से बाहर निकल चुका है.

क्या है संधि

ओपन स्काई संधि का प्रस्ताव सबसे पहले 1955 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आईजनहावर ने रखा था. इस पर आखिरकार 1992 में दस्तखत हुए और 2002 से इस पर अमल शुरू हुआ. इसका मकसद सदस्य देशों को एक दूसरे के वायुक्षेत्र में निगरानी उड़ानों की अनुमति देना है ताकि उनमें आपसी विश्वास मजबूत हो सके.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि रूस लगातार एक साल से पड़ोसी जॉर्जिया और बाल्टिक तट पर रूसी इलाके कालिनिनग्राद में अमेरिकी उड़ानों के लिए अड़चनें पैदा कर रहा है. इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि रूस अमेरिकी और यूरोपीय क्षेत्र में अपनी उड़ानों का इस्तेमाल संवेदनशील अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करने के लिए कर रहा है जिसे युद्ध की स्थिति में निशाना बनाया जा सके.

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अगर इस संधि से निकलता है तो फिर ऐसी रूसी उड़ानें अमेरिकी वायु क्षेत्र में संभव नहीं हो पाएंगी. इसके बाद रूस भी समझौते से हट सकता है और फिर अन्य सदस्य देश भी रूसी उड़ानों के लिए अपने आकाश को बंद कर सकते हैं. इससे पूरे यूरोपीय क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित होगी, खासकर ऐसे समय में जब रूस समर्थित अलगाववादी यूक्रेन और जॉर्जिया के कुछ इलाकों पर नियंत्रण किए हुए हैं.

वाशिंगटन स्थित आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के प्रमुख डेरिल किमबॉल का कहना है कि संधि को छोड़ने का ट्रंप का फैसला “अपरिपक्व और गैरजिम्मेदाराना है.”

नाटो सदस्यों के साथ साथ यूक्रेन जैसे देश अमेरिका पर ओपन स्काई संधि को ना छोड़ने का दबाव डाल रहे हैं. इसके तहत निगरानी उड़ानें सदस्य देशों को औचक सैन्य हमलों जैसी गतिविधियों की जानकारी देती हैं.

रूस की राजधानी मॉस्को में सरकारी समाचार एजेंसी रिया ने रूसी विदेश उप मंत्री एलेक्सांदर ग्रुशको के हवाले से कहा है कि उनके देश ने संधि का उल्लंघन नहीं किया है और वह उन तकनीकी मुद्दों पर बात करने को तैयार है जिन्हें अमेरिका संधि का उल्लंघन बता रहा है.

 

दूसरी संधि भीस वालों में

ट्रंप के ताजा कदम से इस बात को लेकर भी संदेह पैदा हो गए हैं कि क्या अमेरिका 2010 की नई स्टार्ट संधि को आगे बढ़ाएगा. यह संधि परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करती है. इसके तहत अमेरिका और रूस अपने-अपने 1,550 से ज्यादा रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती नहीं कर सकते. नई स्टार्ट संधि अगले साल फरवरी में खत्म हो रही है.

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों ने रूसी अधिकारियों से परमाणु हथियार वार्ताओं के नए दौर की शुरुआत की है, ताकि “परमाणु हथियारों के नियंत्रण के लिए नए उपायों का मसौदा तैयार करने” की प्रकिया शुरू की जा सके.

ट्रंप नई स्टार्ट संधि के स्थान पर एक दूसरी संधि लाना चाहते हैं और परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की संधि में वह चीन को भी शामिल करना चाहते हैं. हालांकि चीन इससे इनकार कर चुका है, जिसके पास लगभग 300 परमाणु हथियार हैं. व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकाररॉबर्ट ओ’ब्रायन ने फॉक्स न्यूज को बताया कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका नई स्टार्ट संधि को छोड़ेगा.

ओपन स्काई संधि को लेकर अमेरिका का फैसला छह महीने की समीक्षा के बाद आया है. इसमें अधिकारियों ने पाया कि रूस ने कई बार संधि का पालन नहीं किया. पिछले साल अमेरिकी प्रशासन रूस के साथ मध्यम दूरी के परमाणु हथियारों से जुड़ी संधि से बाहर निकल गया.

एके/आरपी (रॉयटर्स, एएफपी)

डाक्टर की भूमिका छोड़कर ट्रम्प अपना काम करें तो ठीक हैः हिलैरी

अमरीका की पूर्व विदेशमंत्री हिलैरी क्लिंटन का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रम्प को डाक्टर का रोल छोड़कर अपना काम करना चाहिए।

हिलैरी क्लिंटन ने ट्रम्प द्वारा कोरोना वायरस के उपचार के लिए बताई गई दवा पर आलोचना करते हुए यह बात कही है। उन्होंने ट्वीट करके चिकित्सकों के उन परिणामों का उल्लेख किया है जिनमें यह बताया गया है कि जिन लोगों ने कोविड-19 के इलाज के उद्देश्य से हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन नामक दवा ली थी उनको मौत का ख़तरा एसे लोगों से अधिक रहा जिन्होंने इस दवा का प्रयोग नहीं किया था।

एक रिसर्च में यह भी बताया गया है कि 96 हज़ार लोगों पर किये गए शोध से यह पता चलता है कि जिन लोगों ने हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का प्रयोग किया था उनको दिल से संबन्धित कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इन सभी बातों के बावजूद अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प आए दिन हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का प्रचार करते रहते हैं। ट्रम्प का दावा है कि स्वयं को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए वे भी हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का प्रयोग करते हैं। वास्तव में हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन मलेरिया की दवा है जिसे अब कोरोना मरीजों को भी दिया जा रहा है।

अमरीकी अस्पतालों में बीमारों के लिए बिस्तरों और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी

अमरीकी अस्पतालों में बीमारों के लिए बिस्तरों और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी की बात फिर सामने आई है।

अमरीका के कई राज्यों ने अपने यहां बीमारों के लिए बिस्तरों और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी के प्रति चेतावनी दी है। न्यूज़वीक के अनुसार अलाबामा राज्य के अधिकारियों ने अमरीका में कोरोना संक्रमण का उल्लेख करते हुए अपने यहां बिस्तरों और चिकित्सा उपकरणों की कमी की बात कही है। अमरीका के लाॅस एंजलिस और न्यूयार्क नगरों में पहले से ही चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी है।

ज्ञात रहे कि विश्व में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावितों की संख्या अमरीका में है। ट्रम्प प्रशासन पर इस मामले में सही ढंग से न निबटने का आरोप लगता रहा है और अमरीका के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर ट्रम्प प्रशासन के क्रियाकलापों की कड़ी आलोचना हो रही है।

रूस ने किया बड़ा एलान, ईरान के खिलाफ अमरीका को प्रतिबंध बढ़ाने नहीं देंगे!

रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा है कि मास्को, इस बात को यक़ीनी बनाने के लिए कि अक्तूबर के बाद ईरान के खिलाफ हथियारों के प्रतिबंध की अवधि बढ़ायी नहीं जाएगी, अथक प्रयास करेगा।

रूसी न्यूज़ एजेन्सी स्पूतनिक के अनुसार सरगई रियाबकोव ने कहा है कि रूस, अक्तूबर के बाद ईरान के खिलाफ हथियारों के प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने नहीं देगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिबंध को बढ़ाने का अर्थ, प्रस्ताव क्रमांक 2231 से पहले लगे प्रतिबंधों से भी अधिक प्रतिबंध लगाने के अर्थ में है। इस लिए हम सब को मालूम है कि रूस 18 अक्तूबर के बाद इस प्रकार के प्रतिबंध को जारी नहीं रहने देगा।

याद रहे सन 2015 में ईरान और विश्व की बड़ी शक्तियों ने एक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। ईरान और गुट पांच धन एक के सदस्य देशों, अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस , चीन और जर्मनी के मध्य होने वाले इस समझौते के आधार पर यह तय हुआ था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करेगा और उसके बदले उसके खिलाफ प्रतिबंध या तो खत्म कर दिये जाएंगे या फिर उन्हें स्थगित किया जाएगा।

इस समझौते में इसी प्रकार कहा गया है कि ईरान के खिलाफ हथियारों का प्रतिबंध पांच वर्ष के दौरान खत्म कर दिया जाएगा और इस से पहले भी ईरान, सुरक्षा परिषद की अनुमति से हथियार खरीद या बेच सकता है।

मई सन 2018 में अमरीका ने इस समझौते से निकलने का एलान कर दिया और ईरान के खिलाफ अधिक कड़े प्रतिबंध लगा दिये।

अब जब ईरान खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से लगाया गया हथियारों का प्रतिबंध खत्म हो रहा है तो अमरीका ने इस प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने के लिए भाग दौड़ शुरु कर दी है।

रोचक तथ्य यह है कि अमरीका, ईरान के खिलाफ हथियारों के प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने के लिए ईरान पर आरोप लगा रहा है कि उसने परमाणु समझौते का उल्लंघन किया है हालांकि वह 2018 में ही उस समझौते से निकल चुका है।

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