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ट्रम्प के एक फैसले ने ली 54000 से अधिक अमरीकियों की जान : कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोध का नतीजा!

अमरीकी राष्ट्रपति के केवल एक ही फैसले ने हज़ारों अमरीकियों की जान लेली हालांकि यह फैसला अगर कुछ पहले कर लिया जाता तो कम से कम 54 हज़ार से अधिक लोगों को सरलता से बचाया जा सकता था।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में कहा गया है कि अमरीकी सरकार ने अगर 1 मार्च से पहले लाॅकडाउन लगाया होता तो कम से कम 54 हज़ार लोगों के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता था। शोधकर्ताओं ने 3 मई तक कोरोना संक्रमितों के आंकड़ों का अध्ययन करने नतीजा निकाला है कि अगर लाकडाउन 1 मार्च से पहले लगाया गया होता तो 11 हज़ार 253 मौतें होतीं जबकि उस दौरान मरने वालों की संख्या 65 हज़ार 307 थी। एसे में लाॅकडाउन अगर दो सप्ताह पहले लगाया गया होता तो 54000 लोगों को बचाया जा सकता था। इस रिसर्च के प्रमुख ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए एक-एक दिन की देरी भी प्रभावी रही है।

ज्ञात रहे कि अमरीकी राष्ट्रपति ने 16 मार्च को अमरीका में लाॅकडाउन की अपील की थी। ट्रम्प की इस अपील के बाद अमरीकी राज्यों में अलग-अगल समय पर लाॅकडाउन लगाया गया। उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण अमरीका में 95 हज़ार से अधिक लोगों की मौतें हुई हैं। बहुत से अमरीकियों का कहना है कि ट्रम्प ने कोरोना संकट को सही से हैंडल नहीं किया और इस दौरान उन्होंने बहुत झूठ बोला।

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