कश्मीर राज्य

भारत के डोमिसाइल क़ानून पर भड़का ओआईसी : कश्मीर में हो रहे ज़ुल्म को किया उजागर : रिपोर्ट

इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी के स्थाई मानवाधिकार आयोग “आईपीएचआरसी” ने भारत सरकार के हाल ही में पेश किए जाने वाले जम्मू कश्मीर ग्रांट आफ़ डोमिसाइल सर्टिफ़िकेट “प्रोसीजर” क़ानून 2020 की कड़े शब्दों में निंदा की है।

बयान में कहा गया है कि कमीशन की ओर से व्यक्त की जाने वाली चिंताएं वास्तविक सिद्ध हो रही हैं। बयान में कहा गया है कि भारत सरकार की ओर से की गयी क्रमबद्ध कार्यवाहियां ज़ोरज़बरदस्ती ढंग से डेमोग्राफ़ी को बदलने द्वारा व्यवस्थित ढंग से स्थानीय आबादी पर वर्चस्व को थोपना है और कश्मीर की जनता को उनकी अपनी ज़मीन पर अल्पसंख्यक बनाना और उनकी स्वाधीनता के अधिकार को समाप्त करना है।

उनका कहना था कि यह कश्मीरी जनता के मानवाधिकारों का घोर हनन है जिसकी गैरेंटी अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों के अनेक समझौतों के अंतर्गत प्राप्त की गयी थी जिसमें जेनेवा कन्वेन्शन के आर्टिकल 27 और 49 शामिल हैं।

कमीशन ने कहा कि इससे तनाव को अधिक जटिल किया जा रहा है जो पहले ही कश्मीरी मुसलमानों की हज़ारों बेगुनाह ज़िंदगियां ले चुका है।

आयोग ने चिंता व्यक्त की है कि 5 अगस्त के बाद से भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र संघ, ओआईसी और मानवाधिकार के अन्य संगठनों की ओर से व्यापक स्तर पर निंदा के बावजूद कश्मीर में राजनैतिक, आर्थिक और जनसंपर्क प्रतिबंधों द्वारा कश्मीरी मुसलमानों पर व्यवस्थित अत्याचारों का क्रम जारी रखे हुए है।

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