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भारत में मुसलमानों के भविष्य को लेकर अरब में चिंता : अरब देशों में हिंदुत्व एजेंडा आगे बढ़ाने का आरएसएस का सपना चकनाचूर : वीडियो

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने 2016 में केरल में बंद दरवाज़ों के पीछे अरब जगत में टॉप हिंदू व्यवसायियों के साथ एक मीटिंग की।

इस ख़ुफ़िया मीटिंग में इस बात पर चर्चा हुई और रणनीति तैयार की गई कि किस तरह से मुस्लिम देशों ख़ास तौर से तेल से माला-माल फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों में हिंदुत्वा एजेंडा आगे बढ़ाया जाए और मोदी सरकार के प्रभाव में वृद्धि की जाए।

कोस्टल डाइजेस्ट ने सन् 2016 में अपने भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से इस ख़ुफ़िया मीटिग का पर्दाफ़ाश करते हुए लिखा था कि आरएसएस प्रमुख ने मीटिंग में मौजूद दर्जन भर एनआरआई टाइकून्स से अरब देशों में संगठन के एजेंडे के विस्तार के लिए सहयोग के लिए कहा था।

इस बैठक में यूएई स्थित एमएमसी समूह के संस्थापक व सीईओ डॉ. बीआर शेट्टी, यूएई एक्सचेंज के प्रमुख सुधीर कुमार शेट्टी, प्राकृति नेस्ट बिल्डर्स के एमडी व चेयरमैन एन. बालाकृष्ण, जेआर एयरोलिंक के एमडी अनिल पिल्लई और एनएमसी समूह के सीओओ प्रशांत मंगत का ख़ास तौर पर नाम लिया जा सकता है, जिन्होंने भागवत से ज़रूरी दिशा निर्देश लिए।

हालांकि इनमें से सबसे अहम नाम भारतीय मूल के अरबपति व्यवसायी बीआर शेट्टी थे।

शेट्टी संयुक्त अरब इमारात में सबसे बड़ी हेल्थकेयर कंपनी एनएमसी हेल्थ के संस्थापक और सीईओ हैं। उनके बारे मशहूर है कि 70 के दशक में वह जब मेडिकल रिप्रेज़ेंटेटिव के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत के लिए दुबई पहुंचे थे तो उनकी जेब में सिर्फ़ 8 डॉलर थे। 2019 में फ़ोर्ब्स ने उन्हें 3.15 अरब डॉलर की संपत्ति का मालिक बताया था।

आरएसएस पिछले कई वर्षों से पश्चिमी एशिया के मुस्लिम देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने और हिंदू व्यवसायियों को संगठित करने का प्रयास कर रहा है। भागवत ने इन अरबपति व्यवसायियों से संघ परिवार द्वारा संचालित संस्थाओं को आर्थिक सहायता देने का भी आह्वान किया।

पश्चिम एशियाई देशों में पॉवरफ़ुल हिंदुत्व लॉबी के प्रयासों से ही भारतीय प्रधान नरेन्द्र मोदी ने न केवल सऊदी अरब, यूएई और बहरैन जैसे देशों की यात्राएं कीं, बल्कि इन देशों के शासकों ने बाहें फैलाकर मोदी का स्वागत किया और उन्हें अपने देशों के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया।

2018 में यूएई की अपनी यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री मोदी ने राजधानी अबू-धाबी में पहले हिंदू मंदिर की नींव भी रखी।\

फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों में भारत का प्रभाव ऐसी हालत में बढ़ रहा था कि जब भारत में 2014 में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार के गठन के बाद से ही पहले से हाशिए पर धकेल दिए गए भारतीय मुसलमानों पर हमलों में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही थी और उनके मूल अधिकारों को छीने जाने की साज़िश रची जा रही थी।

2019 में मोदी सरकार ने भारत प्रशासित कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाली धारा 370 को ख़त्म कर दिया और मुसलमानों के साथ भेदभाव करने वाले नागरिकता के क़ानून सीएए को पारित किया। उसके बाद पूरे देश में एनआरसी लागू करने की घोषणा कर दी, जिससे करोड़ों मुसलमानों की नागरिकता दांव पर लग गई।

मुसमलानों ने बढ़ चढ़कर इस घोर अन्याय का विरोध किया और देश भर में मुस्लिम महिलाओं के धरना प्रदर्शनों की गूंज पूरी दुनिया में सुनी गई। भारत में 20 करोड़ मुसलमानों के भविष्य को लेकर अरब देशों में भी चिंता बढ़ने लगी। लेकिन इन देशों में अपनी पैठ मज़बूत कर चुकी हिंदुत्व लॉबी ने उसे समझने में किसी हद तक ग़लती कर दी और उसके कई गुर्गों ने इन देशों में बैठकर ही सोशल मीडिया पर मुसलमानों और इस्लामी विश्वासों के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार शुरू कर दिया। जारी है..

 

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