धर्म

मैं कल से मस्जिद नहीं आऊंगा?

Ashraf Azmi
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#खुदा_के_लिए
एक आदमी ने अपनी मस्जिद के इमाम से कहा: मौलाना, मैं कल से मस्जिद नहीं आऊंगा?
पेश इमाम साहब ने पूछा: क्या मैं इसका सबब जान सकता हूँ ??

उसने जवाब दिया: हाँ, क्यों नहीं? दरअसल इसकी वजह ये है कि जब भी मैं मस्जिद में आता हूं, तो मैं देखता हूं कि कोई फोन पर बात कर रहा है, कोई दुआ पढ़ते हुए अपने मैसेज को देख रहा है, कहीं कोने में कोई ग़ीबत में मशगूल है, तो कोई आस-पड़ोस की खबर पर तब्सिरा कर रहा है वगैरा वगैर

इन असबाब के सुनने के बाद, इमाम साहब ने कहा: आप मस्जिद में न आने का आखरी फैसला लेने के पहले एक काम कर सकते हैं ? !!
उसने कहा: जी बिलकुल मैं तैयार हूं।

मौलाना मस्जिद से सटे अपने कमरे में गए और पानी का एक गिलास लेकर आए और उस आदमी से कहा कि इस गिलास को हाथ में ले लो और मस्जिद के अंदरूनी हिस्से में दो बार घूमो लेकिन ध्यान रहे कि पानी छलक न पाए

उस आदमी ने कहा: इसमें कौन सी बड़ी बात है? मैं कर सकता हूँ।

उसने गिलास लिया और ध्यान से मस्जिद के अंदर दो बार चक्कर लगाया । वह वापस मौलाना के पास आया और खुशी से उसे बताया कि पानी की एक भी बूंद नहीं गिरी।

पेशे इमाम साहब ने कहा: मुझे बताओ कि जब आप मस्जिद में गिलास ले कर घूम रहे थे तो कितने लोग फोन पर बात कर रहे थे, ग़ीबत कर रहे थे या पड़ोस की खबरों पर तब्सिरा कर रहे थे ??

उसने कहा: मेरा सारा ध्यान गिलास पर था, ताकि पानी छलक न पाए । मैंने लोगों पर कोई ध्यान नहीं दिया।
पेश इमाम साहब ने कहा : जब आप खालिस अल्लाह के लिए मस्जिद में आएंगे, अपना सारा का सारा ध्यान “खुदा ” के सिम्त रखेंगे तो आपको खबर ही नहीं होगी कि कौन क्या कर रहा है।

इसीलिए क़ुरान कहता है, “रसूल की पैरवी करो।” यह नहीं कहता, “मुसलमानों को देखो, के कौन क्या कर रहा है।” खुदा से तुम्हारा रिश्ता खुद के अमल के बुनियाद पर मजबूत होता है दूसरे के अमल के बुनियाद पर नहीं

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