सेहत

मैं समलैंगिक हूं : कॉन्डम की कमी हो गई है!

एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन की स्थिति के बीच एक ओर जहां कॉन्डम की डिमांड बढ़ गई है तो वहीं फैक्ट्रीज में काम बंद होने के कारण इस प्रॉडक्ट की सप्लाई रुकी हुई है। इस वजह से दुनियाभर में कॉन्डम की कमी हो गई है।

दुनियाभर में हुई कॉन्डम की कमी, जानें कैसे अपनी कामेच्छा पर करें काबूकोरोना वायरस के कारण दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन लागू किया गया है। इससे फैक्ट्रीज में प्रॉडक्शन का काम रुक गया है और कॉन्डम बनाने वाली कंपनियां भी इससे अछूती नहीं रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति के कारण कॉन्डम की डिमांड और सप्लाई के बीच संतुलन बिगड़ गया है। हालात यह है कि दुनियाभर में इस प्रॉडक्ट की भारी कमी हो गई है, जिससे बाजार में लोगों को यह नहीं मिल पा रहा है। अगर आप भी इस स्थिति से गुजर रहे हैं तो कुछ टिप्स आपको अपनी कामेच्छा पर काबू पाने में मदद कर सकते हैं।

अपने पार्टनर से बात करें

अपने पार्टनर से खुलकर इस विषय पर बात करें और दोनों इस स्थिति के लिए मिलकर रास्ता ढूंढें। अगर आपके पार्टनर को इस बात का पता होगा कि आप सेक्शुअल अर्ज को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं तो वह कई तरह से इस पर नियंत्रण पाने में आपकी मदद कर सकती हैं। चूंकि वह आपको सबसे अच्छे से जानती हैं और उनके व आपके बीच का फिजिकल कनेक्शन भी बेहद स्ट्रॉन्ग है इसलिए उनका साथ मिलने पर आप इस स्थिति को ज्यादा बेहतर तरीके से संभाल सकेंगे।

विचार पर काबू करें, कहीं और ध्यान लगाएं

अपने विचारों पर काबू करने की कोशिश करें। हर बार यौन संबंधों के बारे में सोचेंगे तो आपकी कामेच्छा को काबू करना नामुमकिन हो जाएगा। बेहतर यही है कि जब भी ऐसा कोई ख्याल दिमाग में आए तो दिमाग को तुरंत किसी और थॉट की ओर डायवर्ट करने की कोशिश करें। चाहे तो न्यूज देखें या फिर कोई फिल्म या सीरियल देख लें। इससे आपके दिमाग को अन्य सेंसेस के जरिए डायवर्ट होने का मौका मिल जाएगा।

खाली न रहें, बनाएं शेड्यूल

चाहे वर्क फ्रॉम होम मिला हो या न मिला हो, खुद को खाली न रहने दें। अपने दिनभर के शेड्यूल को प्लान करें। इसमें सुबह उठने के बाद की पहली क्रिया से लेकर रात तक के अपने प्लान को लिखें। अगर ऑफिस का काम है तो जाहिर सी बात है कि आपके लिए टाइम काटना ज्यादा आसान होगा, पर दफ्तर का काम नहीं है तो टाइमपास करने के लिए पहले से ही मूवीज, सीरीज आदि की लिस्ट तैयार रखें, ताकि आप बिंज वॉचिंग कर सकें।

इरॉटिक सामग्री से रहें दूर

अगर आपको सेक्शुअल अर्ज को कंट्रोल करने में दिक्कत आ रही है तो इरॉटिक सामग्री से दूरी बना लें। इस तरह की चीजें आपकी कामेच्छा को और बढ़ा सकती हैं। इसकी जगह ऐसी मूवी या किताब पढ़ें जो आपके इमोशन्स को दूसरे पक्ष पर चैनलाइज कर दे। चाहे तो आप इसके लिए किसी फनी मूवी-कार्टून, नॉवल, ऐक्शन मूवी आदि का सहारा ले सकते हैं।

एक्सर्साइज

कामेच्छा को कंट्रोल करने में व्यायाम काफी मदद कर सकता है। अगर घर पर जिम के उपकरण हैं तो चाहे तो आप हेवी वर्कआउट कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं भी है तो कार्डियो, पुश अप्स, लंजेस जैसी एक्सर्साइज करें। यह आपको थकाने के साथ ही माइंड को कंट्रोल करने में मदद करेगी। चाहे तो आप योग का भी सहारा ले सकते हैं। ध्यान की मदद से अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करने का प्रयास करें।

नतीजों के बारे में सोचें

इस बारे में सोचें कि अगर उस पल आपने अपनी इच्छा में गिव इन कर दिया तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं। अगर पत्नी प्रेग्नेंट होती है तो ऐसे में क्या आप परिवार को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं? क्या आप अतिरिक्त जिम्मेदारियों को अपनी वर्तमान स्थिति में वहन कर सकेंगे? क्या आपकी पत्नी इस स्थिति के लिए तैयार है? इस तरह के विचारों को आप दिमाग में लाएंगे तो शायद नतीजों के बारे में सोचकर खुद ही कदम पीछे खींच लेंगे।

प्यार व रोमांस के हैं और भी रूप

रोमांस और प्यार का मतलब सिर्फ यौन संबंध ही नहीं होता है। इसकी जगह पत्नी के साथ देर तक बात करना, कडलिंग, उनके साथ घर में ही कैंडल लाइट डिनर का मजा लेना, काम में उनका हाथ बंटाना, साथ में गेम खेलना, साथ में मूवी देखना, उनके लिए खास डिनर बनाना जैसी चीजें आपको कामेच्छा पर काबू करने में काफी मदद करेंगीं।

डॉक्टर से करें बात

अगर कोई भी उपाय आपके काम नहीं आ रहा है तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। लॉकडाउन के कारण आप उनके क्लीनिक नहीं भी जा पाएं तो इसमें टेंशन न लें, क्योंकि कई नामी डॉक्टर्स तक मरीजों के साथ ऑनलाइन या फिर फोन के जरिए जुड़े हुए हैं। आप चाहे तो सेक्सॉलजिस्ट से अडवांस में अपॉइनमेंट ले सकते हैं। अगर वे आपको दवाई का पर्चा मेल या वॉट्सऐप करते हैं तो उन्हें आप दवाइयों की दुकान पर जाकर आसानी से ले सकते हैं।

मैं समलैंगिक हूं, इसे कैसे रोकूं?

मेरा शरीर पिछले दो वर्षों में कुछ बदलाव से गुजर रहा है। मेरा चेहरा भी बहुत बदल गया है। लोग सोचते हैं कि मैं समलैंगिक हूं लेकिन मैं पुरुषों के प्रति आकर्षित नहीं हूं। मैं इसे कैसे रोक सकता हूं?

Dr Mahinder Watsa
Mumbai Mirror

सवाल: मैं एक 44 वर्षीय व्यक्ति हूं। मेरा शरीर पिछले दो वर्षों में कुछ बदलाव से गुजर रहा है। मेरा चेहरा भी बहुत बदल गया है। लोग सोचते हैं कि मैं समलैंगिक हूं लेकिन मैं पुरुषों के प्रति आकर्षित नहीं हूं। मैं इसे कैसे रोक सकता हूं? क्या कोई इलाज है?

जवाब: संभवतः आपका शरीर हार्मोनल परिवर्तनों से गुजर रहा है और इसकी जांच और उपचार करना होगा। कृपया अपने प्रत्येक लक्षण को ध्यान से देखें और जांच और उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

नोट: आप भी अगर इस तरह की किसी समस्या से पीड़ित हैं तो अपना सवाल हमारे सेक्सपर्ट को drwatsa@timesgroup.com पर मेल कर सकते हैं।

संभोग करने से पहले ही वीर्य गिर जाता है, क्या करूं?

संभोग करने से पहले ही वीर्य गिर जाता है जिससे मन में निराशा हो जाती है। कृपया उचित परामर्श दें।

Dr. Sanjay Deshpande

सवाल:संभोग करने से पहले ही वीर्य गिर जाता है जिससे मन में निराशा हो जाती है। कृपया उचित परामर्श दें।

जवाब: सेक्स की शुरुआत से पहले स्खलन, शीघ्रपतन का ही चरम रूप है। कई बार यह कम उम्र में या पहली बार सेक्स करने के दौरान होता है। हालांकि, उसके बाद अपने आप सुधर जाता है। लेकिन अगर यह काफी लंबे समय के बाद इसमें सुधार नहीं होता है, तो आपको कुछ दवाओं की आवश्यकता हो सकती है जो स्खलन के समय को बढ़ा देती हैं।

नोट:- आपका भी कोई सवाल है? हमें हिन्दी या अंग्रेजी में सवाल भेजें drdeshpandesanjay@gmail.com पर। कंसल्टेंट सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर संजय देशपांडे काउंसिल ऑफ सेक्स एजुकेशन एंड पैरंटहुड इंटरनेशनल के चेयरपर्सन हैं।

 

खुद को नुकसान पहुंचाते समलैंगिक किशोर

ब्रिटेन में करीब आधे समलैंगिक किशोर ऐसे हैं, जिन्होंने कभी न कभी खुद को नुकसान पहुंचाया है. एक नई स्टडी बताती है कि अपनी सेक्सुएलिटी को लेकर जूझने वाले ये किशोर अपने जीवन से संतुष्ट नहीं होते.

‘द चिल्ड्रंस सोसायटी’ की रिपोर्ट बताती है कि समलैंगिकों को नापसंद करने और बुलिंग किए जाने से एलजीबीटी युवाओं पर दबाव बढ़ रहा है जो पहले ही अपने लैंगिक झुकाव को लेकर संघर्ष कर रहे हैं.

‘द चिल्ड्रंस सोसायटी’ में रिसर्च मैनेजर रिचर्ड क्रेलिन कहते हैं, ”आज भी एलजीटीबी समुदाय को कलंक माना जाता है”. उनके मुताबिक, ”कई ऐसे स्कूल हैं, जहां गे कहलाना अपमान माना जाता है. वहां सभी को साथ लेकर चलने का माहौल नहीं है और युवा लोग अपनी सेक्सुएलिटी को छिपाते हैं. उन्हें डर लगता है कि स्कूल का स्टाफ या सहपाठी उन्हें तंग करेंगे.”

हालांकि ब्रिटेन उन चुनिंदा देशों में एक से हैं जहां एलजीबीटी समुदाय को बराबर संवैधानिक अधिकार मिले हुए हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसके बावजूद युवाओं को अक्सर सेक्सुएलिटी के मामले में भारी दबाव सहना पड़ता है. स्टोनवॉल संस्था की पिछले साल की रिपोर्ट बताती है कि करीब आधे समलैंगिक छात्रों की बुलिंग की गई.

हाल में अमेरिका के कोलोराडो राज्य में अपने साथियों द्वारा बार-बार परेशान किए जाने के बाद एक नौ साल के लड़के ने अपनी जान दे दी. लड़के की मां लीया पियर्से ने स्थानीय मीडिया को बताया, ”मेरे बेटे ने मेरी सबसे बड़ी बेटी को बताया था कि उसके स्कूली साथियों ने उससे खुद की जान लेने के लिए कहा था.”

‘द चिल्ड्रंस सोसायटी’ ने साल 2015 में 14 साल के करीब 19 हजार किशोरों से मिली जानकारी का विश्लेषण किया. संस्था की रिपोर्ट बताती है कि समान लिंग के प्रति आकर्षण रखने वाले किशोरों और बाकी किशोरों के बीच खुशी के मामले में काफी अंतर था. एक चौथाई से ज्यादा समलैंगिक किशोर अपने जीवन से कम संतुष्ट थे. वहीं सर्वे में शामिल सभी लोगों के बीच यह आंकड़ा महज 10 फीसदी तक था.

करीब 40 फीसदी किशोरों में अत्यधिक डिप्रेशन के लक्षण पाए गए. रिपोर्ट कहती है कि कि सभी किशोरों में से करीब 15 फीसदी ने पिछले साल खुद को नुकसान पहुंचाया. वहीं समलैंगिक किशोरों में ऐसे लोगों की संख्या लगभग 50 फीसदी के बराबर थी.

एलजीबीटी समुदाय के लिए काम करने वाली संस्था स्टोनवॉल का कहना है कि स्कूलों और अभिभावकों को मिल कर ऐसे बच्चों का साथ देना चाहिए. संस्था के प्रवक्ता के मुताबिक, ”अगर बुलिंग के मामलों को निपटा नहीं जाए तो आगे चल कर इसका युवाओं पर इसका लंबा और गहरा असर पड़ता है.”

वह आगे कहते हैं, ”हम ऐसे स्कूलों का बढ़ावा देंगे जो एलजीबीटी छात्रों की मदद करना चाहते हैं ताकि यह सुनिश्तिच हो सके कि डराने-धमकाने के मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”

वीसी/एके (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

 

समलैंगिक-संबंध-भविष्य-का-समाज-कैसा-होगा?

समलैंगिक संबन्ध

आइये जानते हैं, इससे हमारे समाज को कितना भयंकर नुकसान भविष्य मे होने वाला है। समलैंगिक संबंध हमारे भविष्य को क्या देगा यह एक गंभीर मुद्दा हैं। समलैंगिक संबंध भविष्य का समाज कैसा होगा?

हमारे देश की अदालत ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है। इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा।

कानून
भारतीय दंड संहिता (IPC) या यूं कहे तो भारतीय कानून में समलैंगिकता को अपराध माना गया था। IPC की धारा 377 के मुताबिक जब जो कोई भी किसी पुरुष किसी महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है, तो इस अपराध के लिए उस व्यक्ति 10 वर्ष की सज़ा या आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया था। इसमें जुर्माने का भी प्रावधान था और इसे ग़ैर ज़मानती अपराध की श्रेणी में रखा गया था।

वर्तमान कानून से अब कोई भी महिला, महिला के साथ और कोई भी पुरूष, पुरुष के साथ अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बना सकता है, अब इसे कोई अपराध नहीं माना जाएगा।

यह प्रथा विदेशो में चलती है। परन्तु भारत एक आध्यत्मिक देश है। यहाँ अप्राकृतिक संबध बनाना पाप माना जाता है, ये हमारे शास्त्र विरुद्ध कार्य है। जो मनुष्य को भयंकर नुकसान पहुँचाता है।

द चिल्ड्रंस सोसायटी’ ने साल 2015 में 14 साल के करीब 19 हजार किशोरों से मिली जानकारी का विश्लेषण किया। संस्था की रिपोर्ट बताती है कि समान लिंग के प्रति आकर्षण रखने वाले किशोरों और बाकी किशोरों के बीच खुशी के मामले में काफी अंतर था। एक चौथाई से ज्यादा समलैंगिक किशोर अपने जीवन से कम संतुष्ट थे। वहीं सर्वे में शामिल सभी लोगों के बीच यह आंकड़ा महज 10 फीसदी तक था।

करीब 40 फीसदी किशोरों में अत्यधिक डिप्रेशन के लक्षण पाए गए। रिपोर्ट कहती है कि सभी किशोरों में से करीब 15 फीसदी ने पिछले साल खुद को नुकसान पहुंचाया। वहीं समलैंगिक किशोरों में ऐसे लोगों की संख्या लगभग 50 फीसदी के बराबर थी।

हमारे, हिन्दू धर्म में समलैंगिक संबंधों पर प्रतिबंध है। इसे नैतिक पतन का लक्षण माना जाता है। इसलिए यहाँ पकड़े जाने पर समलैंगिकों को हमेशा कठोर सजा दी जाती थी।

परन्तु, आज धीरे-धीरे कर देश इस तरह के एक ही शारीरिक सम्बन्ध की शादियों को स्वीकार करने लगा है। समलैंगिकता को अब कानूनी दर्जा मिल रहा है। एक ही सेक्स के दो लोग अब शादी रचाकर एक साथ रहने के लिए आजाद है, लेकिन ये शादी ना केवल समाज के नियमों को तोड़ती है बल्कि प्रकृति के नियमों का भी उल्लघंन करती है।

यह प्राकृतिक कानून का उल्लंघन है :

समलैंगिक संबंध

ईश्वर ने स्त्री और पुरुष क्यूँ बनाया। स्त्री-स्त्री या पुरुष-पुरुष क्यूँ नहीं बनाया। इससे साफ है की शादी या शारीरिक संबंध दो विपरीत लिंगो के बीच ही होता हैं।

जो इंसानों समलैगिंक संबंध बनाता हैं वे कोई मनोरोगी हो सकता हैं। बीमारी के कारण ही समलैगिंक संबंध बनाता हो।

शादी दो इंसानों के बीच का संबंध है, जिसे समाज द्वारा जोड़ा जाता है और उसे प्रकृति के नियमों के साथ आगे चलाया जाता है। समाज में शादी का उद्देश्य शारीरिक संबंध बनाकर मानव श्रृखंला को चलाना है। यहीं नेचर का नियम है। जो सदियों से चलता आ रहा है, लेकिन समलैंगिक शादियां मानव श्रृंखला के इस नियम को बाधित करती है।

अंधेरे में बच्चे का भविष्य:-
सामान्यतः बच्चों का भविष्य मां-बाप के संरक्षण में पलता है। समलैगिंक विवाह की स्थिति में बच्चों का विकास प्रभावित होता है। वो या तो मां का प्यार पाते हैं या पिता का सहारा। मां-बाप का प्यार उन्हें एक -साथ नहीं मिल पाता जो उनके विकास को प्रभावित करता है। “संडे टेलिग्राफ’’ अखबार के मुताबिक समलैंगिक शादी उस मूलभूत विचार को बिल्कुल खत्म कर देगा। बच्चे के विकास हेतू मां और बाप दोनों चाहिए।

एक ही सेक्स में विवाह की कानूनी मान्यता जरूरी है। ये शादियां समाज के नियम के साथ-साथ पारंपरिक शादियों को नुकसान पहुंचाती है। लोगों के सोचने के नजरिए को प्रभावित करती है। बुनियादी नैतिक मूल्यों , पारंपरिक शादी के अवमूल्यन, और सार्वजनिक नैतिकता को कमजोर करता है ।

नागरिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल:-
समलैंगिक कार्यकर्ताओं को एक ही सेक्स में शादी करने का मुद्दा 1960 के दशक में नस्लीय समानता के लिए संघर्ष का मुद्दा बन गया था। एक औरत और एक मर्द के बीच उनके रुप-रंग, लंबाई-चौड़ाई को बिना ध्यान में रखे संबंध बनाया जा सकता है, लेकिन एक ही सेक्स में शादी प्रकृति का विरोध करता है। एक ही लिंग के दो व्यक्तियों, चाहे उनकी जाति का, धन, कद अलग हो संभव नहीं होता।

बांझपन को बढ़ावा देता है:-
प्रकृतिक शादियों में महिलाएं बच्चे को जन्म देती हैं, लेकिन समलैंगिक शादियों में दंपत्ति प्रकृतिक तौर पर बांझपन का शिकार होता है।

सेरोगेसी के बाजार को मिलता है बढ़ावा:-
एक ही लिंग की शादियों में दंपत्ति बच्चा पैदा करने में प्रकृतिक तौर पर असमर्थ होता है। ऐसे में वो सेरोगेसी या किराए की कोख का इस्तेमाल कर अपनी मुराद को पूरा करना का प्रयास करता है। समलैंगिक विवाह के कारण सेरोगेसी के बाजार को बढ़ावा मिलता है।

यह सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि शादी भगवान द्वारा स्थापित प्राकृतिक नैतिक आदेश का उल्लंघन करती है।

समाज पर दबाव:-
समलैंगिक शादियां समाज पर अपनी स्वीकृति के लिए दबाव डालती है । कानूनी मान्यता के कारण समाज को जबरन इन शादियों को मंजूर करना ही होता है। जिन देशों में समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, उन देशों में समलैंगिक शादियों से पैदा हुए बच्चों को शिक्षा देनी ही होती है । अगर कोई व्यक्ति या अधिकारी इसका विरोध करता है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ता है।

मनुष्य को इतने भयंकर नुकसान के कारण ही समलैंगिक संबध बनाना गैरकानूनी था, पर अभी पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के कारण आज देशवासी भी पशुता की ओर जाने लगे है इससे सावधान रहना जरूरी है ।

न्यायालय के पास आम जनता के विवादो को सुनने का समय नहीं है, परन्तु अप्राकृतिक संबध बनाने वाले फैसला सुनाने के लिए समय मिल जाता है।

 

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