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#विनाश_पुरुष_मोदी : विश्वनाथ प्रताप सिंह के कार्यकाल में बिना कोई भाड़ा लिए 1 लाख 70 हज़ार भारतीयों को स्वदेश लाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था!

Jitendra Narayan
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1990 में प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के कार्यकाल में भारत इतना सक्षम था कि खाड़ी युद्ध के समय कुवैत और इराक से 13 अगस्त से 11 अक्तूबर के बीच एयर इंडिया के फ़्लाइट से बिना कोई भाड़ा लिए 1 लाख 70 हजार भारतीयों को स्वदेश लाकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया था…

2020 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में भारत इतना कंगाल हो चुका है कि अपने ही देश में फंसे छात्रों और मजदूरों को ट्रेन से भी बिना भाड़ा लिए अपने घर तक नहीं पहुँचा सकता है…

भारत को कंगाल बनाने वाले अपराधियों को देश की जनता कब सजा देगी…???

#विनाश_पुरुष_मोदी

Joher Siddiqui
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Indian Constitution vs Aarogya Setu Application.

As already discussed Article 21 of the Constitution of India states that “No person shall be deprived of his life or personal liberty except according to procedure established by law” it’s one of our fundamental rights.

Even after that the government of India says, People must have to download this application, so that, we can keep an eye on your every activity. This order also goes against the provisions of the IT Act and the proposed Personal Data Protection Bill. According to the app policy there is no liability for the government even if the personal information of users is leaked. Even at the time of installation This app says in its term and condition, you are installing the Arogya Setu application at your own risk.

After that, How can we download Arogya Setu App in such way? Our Aadhaar data kept in 14 fit thick wall (ones said by Attorney General of India) near government gets stolen. why should we download such a rubbish application at our own risk to get our data stolen?

Saleem Akhter Siddiqui
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सुबह 7 बजे से 11 बजे तक लगता नहीं कि लॉक डाउन है। दुकानों पर भीड़, बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें। 11 बजे के बाद सन्नाटा। शाम को खबर आती है, आज इतने कोरोना पोज़ोटिव पाए गए। लॉक डाउन का पालन न तो जनता खुद कर रही है और न सरकार को कराना आता है। सरकार के पास लॉक डाउन पालन कराने का मतलब सिर्फ डंडा होता है। सिर्फ डंडे से काम नहीं चलता, सिस्टम भी बनाना पड़ता है, लेकिन जो सिस्टम बनाया जाता है, जनता उसे मिनटों में तार तार कर देती है।सरकार की अपनी सीमाएं हैं। जनता को खुद ही सिस्टम डेवलप करना होगा। जनता हालात की गंभीरता को जितनी जल्दी समझ जाएं, उतना ही अच्छा। बाक़ी उंसकी मर्ज़ी।

 

वरदान (हिंदी)

आज फिर लेट हो गया । कंपनी कँपस में पार्किंग के तरफ़ जा रहा था । एक कॉर्नर में मेरे कंपनी के कुछ लोग कोरोना वायरस मदद के लिए कुछ काम कर रहे थे । मैं उन्हें मिला और थोड़ी मदद कर दी ।

मेरी बाईक के पास मैं गया । वहाँ एक आदमी खड़ा था । मुझे देखकर मुझसे बोला, “बहुत अच्छे । तुम हमेशा लोगों की सहायता करते हो ।”

मैं बोला,” थोड़ी बहुत करते रहता हूँ ।”

“वाह बेटे । मैं तुमसे बहुत खुश हूँ । बताओ मैं तुम्हें क्या वरदान दूँ ।” वह व्यक्ती बोला ।

अच्छी टी शर्ट जीन्स पहने उस व्यक्ति को मैंने फिर से देखा । “मुझे मज़ाक़ करने का कोई मुड़ नहीं ।” कहकर मैंने बाईक को चाबी लगाईं ।

“मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा । मैं ईश्वर हूँ ।” कहकर वह मुझे मेरे बारे में एक एक बातें बताने लगा । उसे मेरे जीवन की वह बातें भी पता थी जो सिर्फ़ मुझे ही पता थी । वह फिर बोला,”बोल बेटा ।”

मैं अब पूरी तरह से कन्फ्यूज हो गया था । यह सचमुच भगवान हैं? या नहीं? नहीं होंगे । मगर सचमुच भगवान हों तो?

अपने आप को सँभालते हुए मैं बोला,” मैं मामूली इन्सान हूँ । अभी कुछ सोच नहीं सकता । क्या मैं यह वरदान कल माँग लूँ ?”

मेरी बात पर वह हल्के से मुस्कुराए और बोले,” ठीक हैं । कल इसी वक्त यहीं मिलते हैं ।”

मैं घर पहुँचा और अपनी पत्नी को सारी बात बताई । वह बोली,” पता नहीं वह ईश्वर हैं या नहीं । पर माँगने में क्या हर्ज हैं । तुम उन्हें अपनी प्रमोशन का वरदान माँगों । या फिर बच्चों की पढ़ाई के लिए वरदान माँगों ।”

मैं बोला,” मगर अच्छी सेहत भी ज़रूरी हैं । और ख़ुशी भी ज़रूरी हैं ।”

अगले कुछ घंटे जीवन में क्या ज़रूरी हैं और क्या वरदान माँगना चाहिए यह सोचते सोचते मैं और भी ज़्यादा भ्रमित हो गया ।

दूसरे दिन ऑफ़िस में वहीं सोच रहा था । हम सामान्य लोगों को कितना कुछ चाहिए होता हैं । सिर्फ़ एक वरदान से क्या होगा?

मैं दस मिनिट पहलें ही उसी जगह जाकर रूक गया । वह व्यक्ति वहाँ नहीं था। मैं सोचने लगा । यह सचमुच हो रहा हैं? वह सचमुच ईश्वर होंगे? मैं रूक जाऊँ या चला जाऊँ?

“तो क्या सोचा बेटे?” आवाज़ सुनकर मैंने पीछे मूँड़कर देखा,” बताओ क्या वरदान दूँ?”

मैं पसीने से पूरी तरह से भीग गया था । क्या माँगूँ? ये माँगूँ या वह?

“बोलो बेटा ।” उन्होंने फिर से पुछा । यह सुनकर मैंने अपने हाथ जोड़ लिए ।

और बस इतना बोल सका,” हे ईश्वर, मैं आपसे क्या माँगूँ? बस आप हमेशा मुझे आपका प्रेम देते रहे ।”

मंद मुस्कुराते ईश्वर बोले,” जैसे तुम्हारी इच्छा।”

मैंने सर झुकाया । जब मैंने ऊपर देखा तब वह मेरे सामने नहीं थे ।

आपके अभिप्राय ज़रूर लिखें 🙏🙏🙏

प्रमोद वाघमारे
Pramod Waghmare

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