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सुरक्षित घर पहुंचे मजदूर कहा, ‘राहुल गांधी मददगार बनकर आए और…दुख के सारे बादल छंट गए’

Sagar PaRvez
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सुरक्षित घर पहुंचे मजदूर बोले “राहुल गांधी मददगार बनकर आए और… दुख के सारे बादल छंट गए”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मदद से दिल्ली से बुंदेलखंड के झांसी जिले के रानीपुर पहुंचे सभी मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उन्हें होम क्वारंटाइन किया गया है। इन मजदूरों ने राहुल गांधी का आभार जताया है, क्योंकि विपत्ति के समय उन्होंने बहुत बड़ी मदद की है।

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी बीते दिनों बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ मजदूरों के लिए अचानक उस समय मददगार बनकर सामने आए, जब ये मजदूर पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने घर के लिए पैदल सफर के बीच दिल्ली पहुंचे थे। राहुल गांधी ने सड़क किनारे बैठकर ही इन मजदूरों से संवाद किया था और फिर सभी को…

विशेष वाहन का इंतेजाम करवाकर उनके गांव तक भिजवाया था। साथ ही कांग्रेस ने उनके राशन पानी के इंतजाम की जिम्मेदारी भी ली है।

वे सभी मजदूर बुंदेलखंड के झांसी जिले के रानीपुर के रहने वाले हैं। राहुल गांधी के साथ इनकी बातचीत का वीडियो आज जारी किया गया है। संवाद के दौरान राहुल गांधी ने इन मजदूरों के दर्द को समझा, जाना और उन्हें ढांढस देने के साथ ही मदद का भरोसा दिलाया। इन मजदूरों के वाहन मध्य प्रदेश के ग्वालियर और दतिया से होकर भी गुजरे। इस दौरान इनकी जरूरतों को स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने पूरा किया।

दिल्ली से झांसी के रानीपुर पहुंचे इन 14 मजदूरों का पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और इसके बाद इन्हें होम क्वारंटाइन कर दिया गया है। कांग्रेस की झांसी इकाई के जिला अध्यक्ष भगवानदास कोरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनको आवश्यक जरूरत की सामग्री मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है।

अपने गांव पहुंचे मजदूर सुरेंद्र कुमार प्रजापति ने बताया कि वह तो अंदर से हताश और निराश थे और घर की तरफ पैदल ही बढ़े जा रहे थे कि इसी दौरान राहुल गांधी उनके लिए भगवान बन कर आ गए और उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद उन्होंने ही वाहन उपलब्ध कराया, जिससे वे अपने गांव पूरी तरह सुरक्षित पहुंच चुके हैं। सुरेंद्र ने कहा कि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि कोई व्यक्ति या राजनेता उनकी मदद के लिए आगे आ सकता है। मगर राहुल गांधी ने इस विपत्ति के समय उनकी मदद की, जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष भगवान दास कोरी ने बताया कि यह मजदूर अपने घरों को पहुंच गए हैं और पूरी तरह संतुष्ट हैं। जिला इकाई ने इन मजदूरों को हर संभव सहयोग और मदद का भरोसा दिलाया है। इन मजदूरों ने राहुल गांधी के प्रति आभार जताया है, क्योंकि विपत्ति के समय उनकी राहुल गांधी की ओर से बहुत बड़ी मदद की गई है।

बता दें कि बुंदेलखंड राहुल गांधी का सियासी पाठशाला माना जाता है, क्योंकि उन्होंने साल 2008 में इस इलाके का सड़क मार्ग से दौरा किया था। इतना ही नहीं, इस दौरान उन्होंने कई गांवों में गरीबों की झोपड़ी में रातें भी गुजारी थीं। उसके बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने बुंदेलखंड के लिए 7200 करोड़ का विशेष पैकेज मंजूर किया था।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अशोक गुप्ता का कहना है कि
राहुल गांधी ने वास्तव में जमीनी हालात को बुंदेलखंड के दौरे से ही जाना था, सियासी पाठशाला तो उनकी बुंदेलखंड ही है। वे यहां गरीबों की झोपड़ी में रुके थे और यही कारण रहा कि उनके हर भाषण में बुंदेलखंड के लोगों का दर्द सुनाई दिया।

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