इतिहास

16 मई का इतिहास : 22 रमज़ान सन 273 हिजरी क़मरी को पसिद्ध धर्मगुरु और इतिहासकार इब्ने माज़ा का निधन हुआ!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 16 मई वर्ष का 136 वाँ (लीप वर्ष में यह 137 वाँ) दिन है। साल में अभी और 229 दिन शेष हैं।

16 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1999 – दक्षेस का 2002 ई. में होने वाला शिखर सम्मेलन थिम्पू में कराये जाने की घोषणा।
2004 – रोजर फ़ेडेरर ने हेम्बर्ग मास्टर्स ख़िताब जीता।
2006 – हॉलीवुड की चर्चित अदाकारा ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामित नाओमी वाट्स को संयुक्त राष्ट्र संस्था का राजदूत बनाया गया। न्यूजीलैंड के 47 वर्षीय मार्क इंजलिस ऐसे पहले पर्वतारोही बन गये, जिन्होंने कृत्रिम पैरों के सहारे एवरेस्ट की चोटी पर झण्डा फहराया।
2008 -उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों के स्नाकोत्तर पाठ्यक्रमों में 27% ओबीसी कोटा पर रोक के कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्णय को ख़ारिज कर दिया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर थिम्पु पहुँचे।
2010 – सुल्तान अजलान शाह कप हॉकी प्रतियोगिता में PTI पिछले विजेता भारत और दक्षिण कोरिया को बारिश के कारण मैच न होसकने पर संयुक्त विजेता घोषित किया गया।

16 मई को जन्मे व्यक्ति
1949 – चर्चिल अलेमाओ – गोवा के भूतपूर्व चौथे मुख्यमंत्री रहे हैं।
1948 – मंगलेश डबराल – हिन्दी की आधुनिक कविता के सम्मानीय और शीर्ष रचनाकारों में से एक हैं।
1805 – सर अलेक्ज़ेंडर बर्न्स, वर्तमान पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़बेकिस्तान एवं ईरान में अभियानों के लिए प्रसिद्ध ब्रिटिश अन्वेषक एवं राजदूत थे।
1857 – आर.एन. माधोलकर – भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने एक अवधि तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया
1933- गुलशेर ख़ाँ शानी- प्रसिद्ध साहित्यकार

16 मई को हुए निधन
2014 – रूसी मोदी – भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति तथा टाटा समूह के शीर्ष सदस्य।
1945 – गोपाल चंद्र प्रहराज – उड़िया भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार तथा भाषाविद।

16 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
सिक्किम स्थापना दिवस
राष्ट्रीय डेंगू दिवस

16 मई सन 1502 ईसवी को वर्तमान दक्षिणी अमरीका के देश होन्डोरास को स्पेन ने अपने उपनिवेश मे शामिल कर लिया।

1877, फ्रांस में राजनीतिक संकट शुरू हो गया।

1929, हॉलीवुड में पहले एकेडमी अवॉर्ड दिए गए।

2007, फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी का राष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल 16 मई को ही शुरू हुआ।

2013, अमरीकी वैज्ञानिकों को पहली बार क्लोन किए गए इंसानी भ्रूण से स्टेम सेल यानी मूल कोशिका निकालने में सफलता मिली।

2014, भारत के एक बड़े बिज़नेसमैन रुस्तमजी होमसजी मोदी का निधन आज ही के दिन हुआ था। रुस्तमजी मोदी टाटा समूह के सदस्य और टाटा इस्पात के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक थे।

2014, नैरौबी में एक धमाका हुआ जिसमें क़रीब 12 लोगों की मौत हो गई।

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इससे पहले तक यह देश माया जाति की सभ्यता का केंद्र था किंतु स्पेन का अधिकार हो जाने के बाद होन्डोरास में माया जाति का सफाया हो गया। 19वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ में स्पेन की आंतरिक स्थिति के बिगड़ जाने के कारण यह देश भी दक्षिणी अमरीका के दूसरे उपनिवेशो की तरह स्पेन से स्वंतत्र हो गया।

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16 मई सन 1836 ईसवी को फ्रांस के क्रान्तिकारी शायर रोजर डोलील का निधन हुआ। वे इस देश की सेना मे नौकरी करते थे और फ्रांस की क्रान्ति के समय सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के लिए जवानों की प्रशंसा में शेर पढ़ते थे। उनका लिखा तराना इस देश का राष्ट्रीय गान बन गया है।

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16 मई सन 1916 ईसवी को ब्रिटेन फ्रांस और रुस के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण समझौते साइक्स पीको पर हस्ताक्षर हुए। बाद मे रूस इस समझौते से निकल गया।

इस समझौते के आधार पर ब्रिटेन और फ्रांस ने अरब देशो को जो उसमानी शासन का भाग थे आपस में बांट लिया। इस प्रकार इराक और जॉर्डन ब्रिटेन के अधिकार में और सीरिया एवं लेबनान फ्रांस के अधिकार में चले गये। उक्त समज्ञौते के आधार पर ब्रिटेन ने फिलिस्तीन पर भी अधिकार किया जिसके चलते इस क्षेत्र में अवैध जोयानी शासन की स्थापना क़ी भूमिका प्रशास्त हुई।

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16 मई सन 1995 ईसवी को जापान में आओम सम्प्रदाय के नेता शोको आसाहारा गिरफतार हुए। मार्च सन 1995 में इस सम्प्रदाय के एक व्यकित ने टोकियो की मेट्रो ट्रेन में रासायनिक आक्रमण किया जिसके बाद से यह सम्प्रदाय चर्चा मे आया। इस आक्रमण के बाद जिसमें 12 लोग हताहत और 5 हजार घायल हुए थे जापान की पुलिस ने आओम सम्प्रदाय के बहुत से नेताओ और सदस्यों को गिरफतार किया।

आओम सम्प्रदाय में बौद्ध और हिंदू धर्म की विचारधाराओं को मिलाकर कुछ सिद्धांत बनाए गये हैं। इस सम्प्रदाय के लोग वियतनाम जापान रूस और ऑस्ट्रेलिया मे पाए जाते हैं

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16 मई सन 1975 को जापान की जोन्को ताबी, एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। एवरेस्ट हिमालय की सब से ऊंची चोटी है और हमेशा ही पर्वतारोहियों के लिए चुनौती रही है। हिमालय की इस चोटी का नाम कुछ और था किंतु सन 1865 ईसवी में अग्रेज़ सरकार ने जार्ज एवरेस्ट को भारत का नक़्शा तैयार करने का आदेश दिया और बाद में उन्ही के नाम पर हिमालय की इस चोटी को एवरेस्ट कहा जाने लगा।

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16 मई सन 1988 को अफगानिस्तान से सोवियत संघ की लाल सेना के बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरु हुई। दर अस्ल नूर मुहम्मद तुर्की के विद्रोह के बाद सोवियत संघ के समर्थन से अफगानिस्तान में पहली कम्यूनिस्ट सरकार का गठन हुआ। नूर मुहम्मद तुर्की की सरकार, सन 1979 में उन्ही के एक साथी हफ़ीज़ुल्लाह अमीन के विद्रोह के बाद गिर गयी लेकिन अमरीका की ओर झुकाव रखने और पूरब व पश्चिम से संबंधों में संतुलन के इच्छुक नूर मुहम्मद तुर्की पर सोवियत संघ ने भरोसा नहीं किया और सन 1979 के अंतिम दिनों में सोवियत संघ ने अपने समर्थक पांच हज़ार छाताधारी सैनिकों को काबुल में उतार कर हफ़ीज़ुल्लाह अमीन की सरकार गिरा दी और इस तरह से अफगानिस्तान पर सोवियत संघ की लाल सेना का अतिक्रमण आरंभ हो गया।

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27 उर्दीबहिश्त सन 1366 हिजरी शम्सी को ईरान पर इराक़ द्वारा थोपे गये युद्ध के दौरान इराक़ी के युद्धक विमानो ने फार्स की खाडी में अमरीका के स्टार्क नामक युद्धपोत पर आक्रमण करके 37 अमरीकी सैनिकों को मार दिया। यह घटना उस समय हुई जब फार्स की खाड़ी में तेल वाहक जहाजों की सुरक्षा के बहाने अमरीकी सेनाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही थी। स्टार्क पर आक्रमण के तुरंत बाद इराक़ सरकार ने आक्रमण को ग़लती का परिणाम बताते हुए वाशिंगटन सरकार से क्षमायाचना कर ली और इससे होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति के लिए अपनी तत्परता की घोषणा की। अमरीका ने भी जो अपने सैनिकों और सैनिक जहाज़ों पर आक्रमण को बहुत गम्भीरता से लेता है इस घटना पर बहुत अधिक हो हल्ला नहीं मचाया। क्योंकि वो ईरान के विरूद्ध इराक़ की सहायता कर रहा था। बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार्क पर इराक़ का आक्रमण वास्तव में वाशिंगटन और बगदाद सरकार की मिलिभगत से हुआ था जिसका उद्देश्य फार्स खाड़ी को असुरक्षित दिखाना था ताकि इस क्षेत्र में अमरीकी सैनिकों और युद्धपोतो की संख्या बढ़ाई जा सके।

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22 रमज़ान सन 273 हिजरी क़मरी को पसिद्ध मुसलमान धर्मगुरु और इतिहासकार इब्ने माजा का निधन हुआ। वे 209 हिजरी क़मरी में ईरान के क़ज़वीन नगर में पैदा हुए। उन्होंने इस्लाम ज्ञान की प्राप्ति के लिए कई देशों की यात्रा की। वे मुसलमानों में सुन्नी समुदाय के विश्वसनीय लेखको और इतिहासकारो मे हैं।

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22 रमज़ान वर्ष 1286 हिजरी क़मरी को ईरान के महान विद्वान व धर्मगुरू अब्दुलहुसैन तेहरानी की मृत्यु हुई। वे शैख़ुल इराक़ीन के नाम से प्रसिद्ध थे। वे अत्यंत दक्ष धर्मगुरू, शोधकर्ता, बुद्धिजीवी और ईश्वर का भय रखने वाले मनुष्य थे और उनकी स्मरण शक्ति असाधारण थी। शैख़ुल इराक़ीन, फ़िक़्ह, हदीस और क़ुरआने मजीद की तफ़सीर अर्थात व्याख्या में बहुत दक्ष थे। उन्हें धार्मिक पुस्तकें एकत्रित करने का बहुत शौक़ था। वे एक बड़े पुस्तकालय के स्वामी थे जिसे उन्होंने शोधकर्ताओं और अध्ययनकर्ताओं के लिए समर्पित कर दिया।

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